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Monday, 18 May 2020

ईशर के विनाश का सिद्धांत / Principle Of God's Destruction

ईशर के विनाश का  सिद्धांत / Principle Of God's Destruction
(Aadishri Arun)


Philosophy अर्थात मत सर्वोपरि नहीं होता बल्कि Principle अर्थात सिद्धांत सर्वोपरि होता है ।  Philosophy अर्थात मत तो बदल जाते हैं पर Principle अर्थात सिद्धांत नहीं बदलता ।  
सिद्धांत अर्थात Principle क्या है ? 
गीता 4:7 में  ईश्वर ने कहा कि - जब भी और जहाँ भी धर्म का पतन होता है और अधर्म की प्रधानता होने लगती है, तब तब मैं अवतार लेता हूँ | केवल भगवान् ही किसी धर्म की व्यवस्था कर सकते हैं | धर्म के नियम भगवान् के प्रत्यक्ष आदेश हैं (धर्मं तु सा क्षा द् भगवत् प्रणीत म् ) | गीता में भगवान् स्वयं आदेश देते हैं कि सर्वोच्च धर्म उनकी ही शरण ग्रहण करना है |
वैदिक नियम जीव को पूर्ण शरणागति की ओर अग्रसर कराने वाले हैं और जब भी असुरों द्वारा इन नियमों में व्यावधान आता है तभी भगवान् प्रकट होते हैं | भगवान् के प्रत्येक अवतार का विशेष उद्देश्य होता है लोगों को ईश भावना भावित करना तथा धार्मिक नियमों के प्रति आज्ञाकारी बनाना | कभी वे स्वयं प्रकट होते हैं तो कभी अपने प्रामाणिक प्रतिनिधि को अपने पुत्र या दास के रूप में भेजते हैं, या वेश बदल कर स्वयं ही प्रकट होते हैं |
दो और दो मिलाकर चार होते हैं, यह गणितीय नियम प्राथमिक कक्षा के विद्यार्थी के लिए उतना ही सत्य है, जितना कि उच्च कक्षा के विद्यार्थी के लिए | तो भी गणित उच्चस्तर तथा निम्नस्तर का होता है | अतः भगवान् प्रत्येक अवतार में एक-जैसे सिद्धान्तों की शिक्षा देते हैं, जो परिस्थितियों के अनुसार उच्च या निम्न प्रतीत होता हैं |  धर्म के उच्चतर सिद्धान्त चारों वर्णाश्रमों को स्वीकार करने से प्रारम्भ होते हैं ; और  वह है  - " उनकी ही शरण ग्रहण करना  " | 
गीता 4:8 में  ईश्वर ने कहा कि - साधू पुरुष का उद्धार करने के लिए , पापकर्म करने वालों का विनाश करने के लिए और धर्म कि अच्छी तरह से स्थापना करने के लिए मैं युग - युग में प्रकट हुआ करता हूँ । यह का हर युग में धर्म के PRINCIPLE के आधार पर होता है  ।  मत तो बदलता है परन्तु यह PRINCIPLE नहीं बदलता है । 
लूत एक धर्मी व्यक्ति था इसलिए परमेश्वर ने अपने दूत को लूत के पास भेज कर कहवाया कि मैं इस शहर - सदोम और अमोरा को नाश करने वाला हूँ इसलिए तुम अपने परिवार के साथ जल्दी भाग जाओ । और उन्हें आज्ञा दी जाती है कि पीछे मुड़कर नहीं देखना । जिस दिन सदोम और अमोरा नष्ट हुआ उसी दिन लूत अपने परिवार के साथ घर को छोड़ा था लेकिन लूत की पत्नी ईशर की आज्ञा को नहीं मानी, वह पीछे मुड़ कर नष्ट होते सदोम शहर को देखी और मर गई तथा वह नमक के खम्बे में बदल गई । 
धरती पर के लोग जो परमेश्वर को समर्पित थे, जो बर्फ से उजले थे, जो दूध के  धुले थे पर अब उनके मुख  धुंए से काले हो गये हैं । वास्तव में, सदोम और अमोरा की ही तरह  आज गाँव - गाँव, देश - देश और शहर - शहर के लोगों की चिल्लाहट बढ़ गई है और उनका पाप अत्यन्त गम्भीर हो गया है । पूर्व समय में सदोम और अमोरा के विनाश के समय में ईश्वर  ने अब्राहम को बताया था कि "सदोम और अमोरा की चिल्लाहट बढ़ गई है और उनका पाप बहुत भारी हो गया है" धर्मशास्त्र, उत्पत्ति 18:20 उलटा कर देखो । 
ईश्वर ने कहा कि अब वक्त आगया है कि पापियों और दुष्टों को नष्ट कर दिया जाय । इसके लिए क्या करना होगा ?  यदि बिना योजना के विनाश काम  शुरू कर दिया जाय तो क्या धर्मी और क्या पापी सब के सब नष्ट नहीं हो जाएँगे ? तो अब सबाल यह उठता है कि कैसी व्यवस्था बनाई जाय ?  लेकिन इसके लिए वर्तमान समय में ईश्वर का कार्य क्या है ? 
यह जानकारी 8 अरब अवादी वाले धरती के किसी भी लोगों के पास नहीं है । ईश्वर इस काम को कैसे करेंगे और हम 8 अरब अवादी वाले धरती  में से धर्मी लोगों को कैसे सुरक्षित निकालेंगे यह देखने  के लिए आपके पास अंतिम अवसर होगा ।  

और आप सब इस महा विनाश और महा विपत्ति से कैसे बचेंगे इस रहस्य को आज मैं बताऊंगा ताकि आप अपने आप को बचा सकें । अपने आप को सुरक्षित करने के लिए आपके पास यह अंतिम अवसर होगा ।  
मैं आपको  बताना चाहता हूँ कि Philosophy अर्थात मत सर्वोपरि नहीं होता बल्कि Principle अर्थात सिद्धांत सर्वोपरि होता है ।  Philosophy अर्थात मत Personal होता है पर Principle अर्थात सिद्धांत सबको मानने के लिए आवश्यक होता है । Philosophy अर्थात मत तो बदल जाते हैं पर Principle अर्थात सिद्धांत नहीं बदलता ।  इसलिए आज मैं ईश्वर के Philosophy अर्थात मत  की बात नहीं करूंगा बल्कि विनाश का Principle अर्थात सिद्धांत की बात करूँगा । आज आप जानेंगे कि वर्तमान समय में ईश्वर के कार्य क्या हैं ? ईश्वर का स्वभाव कैसा है ? तथा ईश्वर का विचार क्या है ?  
ईश्वर ने कहा कि  चेतावनी दिया जाए; पर यह चेतावनी किसको  दिया जाए ? ईश्वर ने जबाब  दिया केवल अपने भक्तों को । यह चेतावनी दुनिया वालों को नहीं दिया और न उनको जो ईश्वर से नफ़रत करते हैं । 
ईश्वर ने कहा कि गाँव - गाँव, देश - देश और शहर - शहर के लोगों की एक लिस्ट तैयार करो कि विनाश की पृष्टभूमि क्या होगी ? 
ईश्वर ने कहा कि यदि 50  धर्मी मिले तो उसके कारण उस स्थान को छोड़ दूंगा । अर्थातमैं उस स्थान को नष्ट नहीं करूँगा जिसमें 50 धर्मी मिले ।  (धर्मशास्त्र, उत्पत्ति 18:26 उल्टा कर देखो)

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