Latest Post

Saturday, 10 February 2018

Maha Upadesh of Aadishri; Part - 6 / आदिश्री के महा उपदेश; भाग – 6




आदिश्री के  महा उपदेशभाग – 6

(आदिश्री अरुण

Maha Upadesh of Aadishri; Part - 6 / आदिश्री के  महा उपदेश; भाग – 6

ब्रह्मा जी ने क्षीरदकोसाई विष्णु जी से आदेश पाकर सृष्टि रचना का कार्य आरम्भ कर दिए और उन्होंने अपने 10  मानस पुत्रों को रचा लेकिन 10  मानस पुत्रों ने सृष्टि के विस्तार में  कोई रूचि नहीं लिया तब उन्होंने आपने आप को दो भागों में विभाजित कर लिया । ब्रह्मा जी ने मनुष्य की क्वालिटी को बहुत निम्न श्रेणी का  कर दिया और उन्होंने अपने  एक भाग से स्वयंभू मनु प्रकट किए और दूसरे भाग से सतरूपा स्त्री  प्रकट किए  । ब्रह्मा जी ने  के इन दोनों को सृष्टि  विस्तार कार्य में लगा दिया (श्रीमद्भागवताम महा पुराण)  


धर्मशास्त्र यह कहता है कि ईश्वर ने अपने स्वरुप के समान मनुष्य को रचा जिसका नाम रखा आदम  । धर्मशास्त्र, उत्पत्ति 1 : 27  ने  कर दी इस कथन की पुष्टि । ईश्वर ने कहा कि  आदम का अकेला रहना अच्छा नहीं है,  इसलिए उसके लिए एक सहायक बनाऊँगा जो उससे मेल खाए।  धर्मशास्त्र, उत्पत्ति 2 : 18  ने  कर दी इस कथन की पुष्टि । परन्तु सृष्टि रचना के क्रम में ऐसा कोई न मिला जो आदम से  मेल खाए । तब ईश्वर ने आदम को गाढ़ी नींद में डाल दिया और जब वह सो गया तब उसने आदम की  एक पसली निकाल कर उसमें मांस भर दिया । ईश्वर ने उस पसली को जो आदम में से निकाली थी उसको स्त्री बना दिया और उसको आदम के पास ले आया और आदम ने कहा कि " चुकि  यह   मेरी हड्डीओं में की  हड्डी और मेरे मांस में का मांस है इसलिए इसका  नाम नारी होगा,  क्योंकि यह नर में से निकाली गई है । इसकारण पुरुष अपने माता - पिता को छोड़कर अपनी पत्नी से मिला रहेगा और ये एक ही तन बने रहेंगे  । धर्मशास्त्र, उत्पत्ति 2 : 18 से 24 ने  कर दी इस कथन की पुष्टि । इसलिए आदिश्री आपको आदेश देता है कि हरएक मनुष्य अपनी पत्नी से अपने ही शरीर के समान प्रेम रखे और पत्नी भी अपने पति का भय माने ।धर्मशास्त्रइफिसियों 5:33  ने  कर दी इस कथन की पुष्टि ।


हे पत्नियों ! तुम अपने पति के ऐसे अधीन रहो जैसे लोग ईश्वर के आधीन रहते हैं  क्योंकि पति पत्नी का सिर है  । धर्मशास्त्र,  इफिसियों 5 : 22 - 23  ने  कर दी इस कथन की पुष्टि । यदि तुम अपने पति का इज्जत लोगों के बीच उतार दी तो  इसका यह अर्थ हुया कि लोगों के आगे तुम अपना सिर स्वयं काट डाली। 

पति पत्नी के  सिर का ताज होता है   यदि तुम अपने पति का इज्जत लोगों के बीच उतार दी तो  इसका यह अर्थ हुया कि लोगों के आगे तुम अपने सिर का ताज स्वयं अपने हाथों से उतार ली अपने ताज में स्वयं दाग लगा ली । 


स्त्री इस बात को सदैव याद रखे कि आदम सैतान के द्वारा नहीं बहकाया  गया था बल्कि स्त्री (हव्वा)  सैतान के बहकावे में आकर अपराधिनी हुई थी । धर्मशात्र, 1 तीमुथियुस 2 : 12 से 14 ने  कर दी इस कथन कि पुष्टि । 

हर बुद्धिमान स्त्री अपने घर को  बनाती है परन्तु मुर्ख स्त्री उसको अपने हाथों से ढ़ाह देती है । धर्मशास्त्र, नीतिवचन 14 : 1 ने कर दिया इस कथन की पुष्टि । जो स्त्री सुन्दर है पर यदि वह  विवेक व् बुद्धि नहीं रखती है  तो वह नाक में  सोने के नथ पहने हुए रहने के बाबजूद भी सूअर के समान है । धर्मशास्त्र, नीतिवचन 11 : 22 ने कर दिया इस कथन की पुष्टि । 


सच पूछो तो जहाँ बुद्धी की युक्ति नहीं वहाँ लोग विपत्ति में पड़ते हैं । धर्मियों को तो आशा रखने में आनन्द मिलता है परन्तु दुष्टों की आशा टूट जाती है । धर्मशास्त्र, नीतिवचन 10 : 28 ने कर दिया इस कथन की पुष्टि । मेरी इस बात को सदैव याद रखना कि अनुग्रह करने वाली स्त्री अपनी प्रतिष्ठा कभी नहीं खोती।  धर्मशास्त्र, नीतिवचन 11 : 16 ने कर दिया इस कथन की पुष्टि ।  धर्मी स्त्री ग्रहण करने योग्य बातें समझ कर बोलती है परन्तु दुष्ट स्त्री के मुख से उलट फेर की बातें निकलती है।  धर्मशास्त्र, नीतिवचन 10 : 32 ने कर दिया इस कथन की पुष्टि ।  नम्र स्त्री में बुद्धि होती है परन्तु दुष्ट स्त्री अपनी दुष्टता  के कारण अपने स्थान से निचे गिर जाती है । धर्मी स्त्री के मुख से बुद्धि टपकती है परन्तु मुर्ख स्त्री जो उलट फेर की बातें कहती है वह घर में विनाश लाती है । धर्म का पालन करने वाली स्त्री अपने लोगों को मृत्यु से भी बचा लेती है परन्तु दुष्ट स्त्री अपना हरा - भरा घर भी अपने हाथों से स्वयं ही उजार  लेती है   धर्मी स्त्री अपने घर को स्वर्ग बना लेती है परन्तु मुर्ख और दुष्ट  स्त्री अपनी दुष्टता के कारण अपने स्थान से नीचे  गिर जाती है । धर्मी स्त्री के वचनों से बहुतों का पालन - पोषण होता है और वह बहुत यश एवं कीर्ति पाती है । 


दुष्ट स्त्री जिस विपत्ति से डरती है वह विपत्ति उसके ऊपर आपड़ती है परन्तु धर्मी स्त्री की हर अभिलाषाएँ पूरी होती  है । जो उपद्रवी स्त्री होती है वह सबके नजर से नीचे गिर जाती है परन्तु धर्मी स्त्री बहुतों से आशीर्वाद पाती है । जो धर्मी और बुद्धिमान स्त्री होती है वह अपने पती के आज्ञाओं को स्वीकार करती  है परन्तु जो बकवादी और मुर्ख स्त्री होती है वह अपने ही घर को सत्यानाश कर देती है । 

हे स्त्रयों ! बुराई के बदले बुराई  मत करो और गाली के बदले गाली मत दो बल्कि आशीष दो क्योंकि तुम आशीष के वारिस होने के लिए बुलाये गए हो। तुम लड़ते हो और झगड़ते हो इसलिए तुम कुछ भी अर्थात तुम   छोटी सी छोटी चीज भी माँगते हो पर तुम्हें कुछ भी नहीं मिलता है    धर्मशास्त्र, याकूव  4 : 3 ने कर दिया इस कथन की पुष्टि । 


प्रत्येक धर्मशास्त्र ईश्वर की प्रेरणा से लिखी गई है और उसका उपदेश समझाने,  सुधारने तथा धर्म की शिक्षा देकर  समाज में  धर्म को संतुलित बनाए रखने के लिए है ।  धर्मशास्त्र,  तीमुथियुस  3 : 16 ने कर दिया इस कथन की पुष्टि । यदि कोई स्त्री अपने आप के अन्तःकरण को शुद्ध करेगी तो वह आदर का वर्तन कहलाएगी और वह पवित्र ठहरेगी तथा वह अपने ईश्वर के काम आएगी ।


अगर यदि आप अपने आप को उत्तम स्त्री कहते हैं तो आप इतना अवश्य याद रखिये कि उत्तम स्त्री का पहला आभूषण है - "रूप " । दूसरा आभूषण है  - "शील " । तीसरा आभूषण है - "सत्य "। चौथा आभूषण है - " सदाचार "। पाँचवाँ आभूषण है - " धर्म " । छट्ठा आभूषण है - "सतीत्व " । सातवां आभूषण है - "ढृढता" । आठवां आभूषण है - "साहस" (कार्य करने का उत्साह) । नवाँ   है - "मंगल गान " । दसवाँ है - "कार्य कुशलता " । ग्यारवाँ है - "कामभाव का आधिक्य " । और बारहवाँ है - " मीठे वचन बोलना " । पद्मपुराण, भूमिखंड, पेज नंबर 250 ने  कर दी इस कथन की पुष्टि ।   



Post a Comment