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Wednesday, 3 January 2018

मन्नत सभा उत्सव / Mannat Sabha

मन्नत सभा उत्सव 

आदिश्री अरुण 

मन्नत सभा उत्सव / Mannat Sabha
1 जनवरी 2018 को मन्नत सभा उत्सव के साथ - साथ नव वर्ष एवं आदिश्री का जन्म दिवस बड़े उत्साह के साथ मनाया गया जिसमें आदिश्री ने लोगों को "संसार में बिखरे हुए लोगों " से सम्बोधित किया और कहा कि लोगों ने खुद से अपने आत्मा पर अनगिनत और ऐसा पक्का  दाग लगा लिया कि अब आत्मा का रंग ही बदल गया । अब इस पर कितने भी साबुन रगड़ दो दाग छूटने वाला नहीं है ।



शुरू में आत्मा का रंग सफेद था जिसमें 100 % पवित्रता थी, 100 % ईमानदारी थी, 100 % दयालुता था,100 % प्यार था, 100 % सेवा भाव था किन्तु आज आत्मा का रंग साफ बदल गया है। 100 % पवित्रता की जगह 100 % अपवित्रता आगया है, 100 % ईमानदारी की जगह 100 % बेईमानी आगया है, 100 % दयालुता की जगह 100 % कठोरता आगई है, 100 % प्यार की जगह  100 % बेरुखापन और झगड़ा आगया है, 100 % सेवा भाव की जगह 100 % लूट  - खसोट वाली भावना आगई है। यानि कि आत्मा का जो रंग था जो उसमें गुण था,  जो उसमें क्वालिटी थी उसका समीकरण ही साफ उलटा हो गया है । इसलिए सुख - शांति और आनन्द की  जगह लोगों के अन्दर  दुःख, अशांति, बेचैनी और पीड़ा उत्पन्न होगया है जिसका किसी के पास कोई इलाज नहीं है - न तो किसी डाक्टर के पास, न तो प्रधान मंत्री के पास, न तो किसी President के पास,  न तो किसी  संत - महात्माओं के पास और न किसी विद्वानों के पास । ऐसी हालत में मैं आदिश्री अरुण अपने पिता की  गोद से उतर कर धरती पर इसलिए आया ताकि आत्मा के इस बदले हुए समीकरण को सीधा कर दूँ और इसलिए आज मैं  आप लोगों से कहता हूँ कि - आप सभी लोग अपना - अपना  संस्कार ही बदल लो तथा पूर्वत स्थिति में वापस आओ "Come Back to Origin". यदि आज आप ऐसा करोगे तो यह  कलियुगी दुनिया सच मुच सत्ययुगी  दुनियां में बदल जाएगी  


अब प्रश्न यह उठता है कि यदि आप अपना संस्कार बदलना चाहते हैं तो बदलेंगे कैसे ?
आज आप जिस संस्कार में जी रहे हैं चाहे वह कलियुगी संस्कार हो चाहे गुस्से वाला संस्कार हो चाहे कोई और संस्कार हो । अगर आपको वर्तमान संस्कार पसन्द नहीं है और आप अपना संस्कार सच मुच  बदलना चाहते हैं तो आप मेरे सुझाव पर ध्यान दीजिए और निम्न लिखित तरीके से उसका अमल कीजिए  :  


आपके पास जो संस्कार हैं उसके बारे में अभी से आप न तो सोचेंगे और न बोलेंगे । मतलब आप उस File को Touch नहीं करेंगे । आपको जिस File को खोलना है केवल उसी के ही बारे में सोचेंगे और केवल उसी के बारे में बोलेंगे । इस 15 दिनों के अन्दर बहुत सारा भाई - बहन मुझसे मिले और बोले मेरे पास भी गुस्सा वाला संस्कार है, मैं भी गुस्सा करता हूँ , मैंने गुस्सा को अपने जीवन से Dilit करने का बहुत प्रयास किया पर ऐसा नहीं कर सका। आपसे मैं यह कहता हूँ कि  आपके ये एक - एक सोच, आपके ये एक - एक Thought किस File को खोलेंगे ? जरा सोचो।



जो Past में हुआ उसको नहीं सोचना है, जो होता है उसको अभी Create नहीं करना है, जो Reality है जो वास्तविकता है उसको अभी Create नहीं करना है, उसी को Create करना है जिसको आज आप Reality  में चाहते हैं । अब प्रश्न यह उठता है कि आप Create कैसे करेंगे ? जबाब बड़ा छोटा है - संकल्प से; क्योंकि संकल्प से ही Creation  होता है । आप ध्यान कैसे करते हैं ? पहले आप संकल्प करते हैं और साथ ही साथ दूसरे File को बंद कर देते हैं और इसके बाद मन्त्र का उच्चारण या जप करते हैं । कैसा मन्त्र ? जो चाहिए  । तो फिर वैसा हो जाता है  । आप हवन कैसे करते हैं ? पहले संकल्प करते हैं, फिर जो चाहिए उसके लिए मन्त्र का उच्चारण करते हैं  और फिर अग्नि में आहुति डालते हैं  ।  ठीक उसी प्रकार जैसा संस्कार आप चाहते हैं उसके लिए आप मन में संकल्प कीजिए बाद बाकी मन के अन्दर के File को बन्द कर दीजिए, उसको नहीं खोलिए ।  क्योंकि यह File तो अन्दर बैठी हुई है Reality है  । यदि आपने भूल से Thought भी Create किया तो गुस्से वाली File खुल कर आपके अन्दर प्रभाव डालने लगेगी । आपको एक मन्त्र की  ही तरह बात करना है । I am  a  peaceful  Soul ..... 5  times.



मंत्र का अर्थ क्या होता है ? जो हम सिद्धि चाहते हैं उसका  मंत्र जप करते जाओ । जो हम चाहते हैं कि ऐसा हो तो उसका Thought  Create  करते जाओ, Practical में लाते जाओ , कभी मत सोचो कि मैं करने में असमर्थ हूँ । I  am  not   able  to  do  that . I can not .. मैं नहीं कर सकता , या फिर We  are weak. हम कमजोर हैं - इत्यादि - इत्यादि । यदि आप ऐसा सोचेंगे तो आपकी यह सोच आपको और कमजोर कर देगी ।  आपको क्या सोचना है ? I  am a pure Soul. यह अहंकार नहीं है बल्कि यह सच्चाई है ।  अब प्रश्न यह उठता है कि Pure Soul क्या है ? Pure Soul का अर्थ होता है जो किसी के लिए गलत सोच ही नहीं सकता इतना साफ है वह आत्मा । तो अब अपने आपको स्वयं ब्लेसिंग देना शुरू कीजिए । क्या आप जानते हैं कि अपने आप से स्वयं  को ब्लेसिंग कैसे देंगे ? आपको इस प्रकार सोचना कि मैं एक दिव्य आत्मा हूँ । Divine Soul. मेरे हर सोच, शब्द और व्यवहार सबको सुख देता है  । मैं हर एक को जैसा वे हैं वैसे ही स्वीकार करता हूँ । जो बहनें हैं वो सोचेगी - "मैं हर एक को वो जैसे हैं वैसे ही स्वीकार करती हूँ । मैं हर एक को उनके संस्कारों के साथ स्वीकार करती हूँ। मेरा शरीर मेरा सेहत बिल्कुल परफेक्ट है । सर्व शक्तिमान प्रकाश सागर रूप ईश्वर हर पल मेरे साथ हैं । मैं  प्रकाश सागर रूप ईश्वर का अंश हूँ । उन प्रकाश सागर रूप ईश्वर की किरणें मुझ पर पर रही है । मैं  प्रकाश सागर रूप ईश्वर का फरिश्ता हूँ  ।  ईश्वर  का फरिश्ता क्या करता है ईश्वर  का फरिश्ता आकर सुख देता है और चला जाता है । ईश्वर  का फरिश्ता आकर सहयोग देता है और चला जाता है । आज कल लोग फ़रिश्ते ढूंढते रहे हैं, Angel ढूंढ रहे हैं ।  भगवान कल्कि जी ने कहा कि आप लोगों को फरिश्ता नहीं ढूंढना है, आप लोगों को Angel नहीं ढूंढना है बल्कि आपको स्वयं ही फरिश्ता बन  जाना है, आपको स्वयं ही Angel बन जाना है । आप ऐसा सोचो कि आज जो कुछ भी मेरे द्वारा हर एक प्राणी को मिलेगा वह है ईश्वर का प्यार और ईश्वर की शक्ति क्योंकि मैं ईश्वर का फरिश्ता हूँ, क्योंकि मैं ईश्वर का Angel हूँ । यह दुनिया बहुत ही सुन्दर और सत्ययुगी दुनिया है । अब File को उल्टो । अब Thoughts के एक - एक लाइन को देखते हैं कि वह कैसा work कर रहा है ? मैं दिव्य आत्मा हूँ । जैसे ही आपने यह Thought create किया कि  मैं दिव्य आत्मा हूँ वैसे ही आपके ब्रेन में कौन सा Vibration create हुआ ? Divinity का । Mind और Body को कौन सा मैसेज गया ? Divinity का । मेरा शरीर बिल्कुल स्वस्थ और परफेक्ट है । शरीर को कौन सा Vibration गया ? मेरा शरीर बिल्कुल स्वस्थ और परफेक्ट है । पहले आप शरीर को कौन सा Vibration भेजते थे ? मैं विमार हूँ ।  दोनों में से जो choice आपका होगा, वही हो जाएगा । यदि आप सोचोगे कि मैं विमार हूँ तो आपकी  विमार बढ़ती जाएगी   ।  जो रिश्ता ख़राब है, जिस रिश्ते में गाँठ पर गई है उसको हर रोज सबेरे उठ कर Powerful Vibration दीजिए कि यह रिश्ता बहुत अच्छा Beautiful और बहुत ही प्यारा रिश्ता है । संकल्प से सृष्टि बनती है अर्थात Thoughts से  Creation होता है । जो - जो आपने मुझसे सुना उसको रोज सवेरे 5 बार और रात में सोने से पहले 5 बार दुहराएँ ।  सवेरे उठ कर किसी से भी बातें न करना और न मोबाईल चलाना और न जीवन का कोई दूसरा File खोलना बल्कि सवेरे उठ कर सबसे पहले Powerful Vibration  देना। Equation क्या है ? जो हम चाहते ऐसा हो केवल वही बात सोचना ।


दूसरा सन्देश देते हुए लोगों से कहा कि - सरकार नियम बनाता है तो आप लोग उसका पालन करते हैंदीवार पर बोर्ड लगाते हो कि "यहाँ  धूम्र पान निषेध है" तो आप उस स्थान पर धूम्र पान नहीं करते हो, डाक्टर के चेम्बर के बाहर बोर्ड लगाते हो कि "कृपया मोबाईल Silent mod पर रखे " तो आप लोग उसका पालन करते हैं, सिनेमा  हॉल के टिकट काउंटर पर बोर्ड लगा देता है कि "कृपया लाइन में आइये " तो आप लाइन में लग कर टिकट लेते हैं । जब आप इतने सारे लोगों के लिए नियम बनाते हैं तो आप अपने घर के लिए नियम क्यों नहीं बनाते हैं ? "No angar Zone" यहाँ गुस्सा करना वर्जित है । यदि आप घर में सुख - शांति चाहते हैं, यदि आप अपने घरों में ख़ुशी और आनन्द चाहते हैं तो आज आप अपने - अपने घरों में बोर्ड लगाइये कि  " यहाँ गुस्सा करना वर्जित है " No Angar Zone और इस नियम का  पालन कीजिये तो आपके घरों में सुख - शांति तुरत आएगी, आपके घर के आँगन में खुशियां नाचेगी।


अब मैं आपकी सोई चेतना को जगाना चाहता हूँ कि यदि आपको  दिन में एक बार भी गुस्सा आगया तो आप मन को, शरीर को, रिश्तों को, प्रकृति को तथा पुरे विश्व  को दूषित कर रहे हैं ।  यदि आप एक बार भी क्रोध को त्याग कर शांति को धारण किया तो आप केवल सिर्फ अपने मन को ही सुकून नहीं दिया, केवल रिश्तों में ही प्यार नहीं दिया, केवल प्रकृति को ही प्रदुषण से मुक्त नहीं किया, बल्कि आप पुरे विश्व को सुन्दर बनाने के लिए सेवा किये ।  तो क्या आप सेवा करने के लिए तैयार हैं ? अब आप हमें यह बताइये कि कौन - कौन आदमी अपने मन को, अपने घर को, अपने परिवार को और पुरे विश्व को सुन्दर बनाने के लिए तैयार हैं ?
आपने सुना होगा कि जो त्याग करता है वह पूज्यनीय है ।  तो आप अपने क्रोध का त्याग कर दीजिये । क्रोध तो कोई अच्छी चीज है नहीं जिसके लिए आप सोच - विचार करें ।  गीता 16 :21  में  तो क्रोध को नर्क का द्वार कहा गया है । तो क्रोध की बुलेट ट्रेन पर बैठ  कर  आप  नर्क क्यों जाना चाहते हैं ? गीता 2 : 63 में ईश्वर ने कहा कि  क्रोध से अत्यन्त मूढ़भाव उत्पन्न हो जाता है । तो फिर आपको क्रोध क्यों अच्छा क्यों लगता है ?


क्रोध  का त्याग, ईर्ष्या का त्याग, अहंकार का त्याग, शांति देना, सुख देना, प्यार देना तो सर्व श्रेष्ट सेवा है  । मेरा मानना है कि  यह सेवा कलियुग को सत्य युग बना देगा  ।   
 


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