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Saturday, 24 June 2017

Live in HEAVEN | Want to live in HEAVEN?

Live  in Heaven | स्वर्ग में रहिये 


धर्मशास्त्र यह कहता है कि  ईश्वर ने स्वर्ग में अपना सिंहासन स्थापित किया और उसके  राज्य का  शाषण पूरी सृष्टि पर  है  मैंने माना कि आस्तिक और  नास्तिक दोनों के विचार  मेल  नहीं खाते और दोनों के विचारों में  बहुत विभिन्नताएँ हैं।  पुरानी आस्था या पुरानी परम्परा के अनुसार मरने के बाद  लोग स्वर्ग में अवश्य ही जाना चाहता है स्वर्ग में जाने के लिए मनुष्य  के मरने के बाद उसका बेटा गौ दान करता है ताकि उसके पिता को स्वर्ग मिले इतिहास यह बताता है कि जीते - जीते इसी शरीर में कई  आदमी स्वर्ग गए थे - अर्जुन पाश्वास्त्र लेकर दिव्यास्त्र लाने  हेतु, स्वर्ग में होने वाले युद्ध में देवताओं के तरफ से युद्ध लड़ने राजा दशरथ जी गए थे और साथ में सारथि के रूप में उसकी पत्नी कैकेई गई थी, स्वर्ग सशरीर युद्धिष्ठिर जी गये थे और त्रिशंकु भी गया था; लेकिन त्रिशंकु को स्वर्ग से धकेल दिया गया था स्वर्ग है तो बड़ा मजेदार चीज तभी तो लोग स्वर्ग जाना चाहते हैं  स्वर्ग में आज एक हजार सीट खाली है यदि आपको  जीते - जीते इसी  शरीर में कुछ देर के लिए स्वर्ग घूमने ले चलूँ तो कौन - कौन लोग चलेंगे ज़रा  हाथ ऊपर उठाइये ?

आपको पता है कि सब आदमी स्वर्ग में प्रवेश नहीं कर सकते पांडव द्रोपदी के साथ स्वर्ग जारहे थे तो केवल युधिष्ठिर ही स्वर्ग में प्रवेश किये थे बाद बाकी  अयोग्य होने के कारण नहीं जा सके   त्रिशंकु स्वर्ग में गया तो था लेकिन उसको स्वर्ग से धकेल दिया गया था यानि कि स्वर्ग में जाने के लिए क्वालिटी चाहिए या फिर अर्जुन की तरह भगवान शिव आप सबको भी पाश्वास्त्र दे दें।  इसके लिए तो शिव जी से पूछना पड़ेगा कि स्वर्ग जाने के लिए वे किसको - किसको पाश्वास्त्र देंगे   

संसार में दो चीजें बनी है - स्वर और नर्क   अच्छा ये बताओ कि, बिना मरे नर्क में जाने का  कौन से द्वार  हैं ? मालूम है किसी कोनहीं
तीन द्वार हैं - काम (कामना), क्रोध तथा लोभ (गीता 16:21) अगर यदि ये तीन द्वार - काम (कामना), क्रोध तथा लोभ छोड़ दें तो कहाँ पहुंच जायेंगे स्वर्ग में तो थोड़ा देर के लिए चलें स्वर्ग में ? बोलो, बोलो, तो चलें स्वर्ग में

जो लोग स्वर्ग में जाने की क्वालिटी नहीं रखते हों वो तो स्वर्ग में नहीं जा सकेंगे     जो स्वर्ग में नहीं जा सकेँगे तो उनके लिए आज तो बहुत ही ख़राब समय है  अगर उनको यहीं छोड़ कर चला गया तो उन्हें बहुत ही ख़राब लगेगा  अच्छा, खराब समय को टालने के लिए क्या करें ? ऑडियेन्स का राय लेते हैं - हवन करें, दान करें, व्रत करें स्टोन पहनें, वास्तु दोष को ठीक करें   

ऑडियेन्स का उपाय अर्थात 5  सलाह  है   मैं आप से यह कहता हूँ कि  कल्ह शीशपाल जी ने , फौजी जी से कुछ गलत तरीके से बात किया    छोटा सा कर्म है, बहुत बड़ा कर्म नहीं है शीशपाल जी ने थोड़ा जोड़ से चिल्लाया, गाली भी दिया, झूठ भी बोला, दोषारोपण भी किया तो अब फौजी जी का मुड थोड़ा सा डाउन है आज यदि  फौजी जी शीशपाल जी से मिलेंगे तो फौजी जी का व्यवहार थोड़ा सा बदला हुआ होगा  ये है  शीशपाल जी के कर्म का फल जो शीशपाल जी के सामने आने वाला है आज यदि शीशपाल जी फौजी जी से फिर  बात करेंग तो उस कर्म फल को बदलने के लिए शीशपाल जी क्या करेंगे  ? वे हवन करेंगे तो क्या फौजी जी का मुड ठीक हो जायेगा ? धन का दान करें तो क्या फौजी जी का मुड ठीक हो जायेगा ? व्रत करें तो क्या फौजी जी का मुड ठीक हो जायेगा ? स्टोन पहनें तो क्या फौजी जी का मुड ठीक हो जायेगा ? वास्तु दोष को ठीक करें तो क्या फौजी जी का मुड ठीक हो जायेगा ? शीशपाल जी यदि खाना नहीं खाएँ तो क्या फौजी जी का मुड ठीक हो जायेगा ? मैं तो यह कहता हूँ कि यदि शीशपाल जी खाना नहीं खाएंगे तो और भी चिडचिड़े हो जायेंगे और इस अवस्था में उन्हें फौजी जी से बात करना पड़े  तो लड़ाई पक्की - पक्की हो जानी है  

यदि शीशपाल जी दूसरे कमरे में बैठ कर पूजा - हवन करें तो क्या  फौजी जी का मुड ठीक हो जायेगाफौजी जी का मुड ठीक नहीं होगा इसका मतलब फौजी जी का रुखा व्यवहार शीशपाल जी के सामने आना ही है क्योंकि कल्ह शीशपाल जी गुस्से से बात किए थे ; इसलिए वो फल शीशपाल  जी के सामने आना ही आना है अब शीशपाल जी क्या करेंगे ? अब शीशपाल जी को ध्यान रखना होगा  कि आज जब फौजी जी  सामने आएंगे तो उनसे कैसे बात करने हैं ? फौजी जी से प्यार से बात करना है  इसका मतलब फौजी जी से मिलाने से  पहले शीशपाल जी को व्रत करना होगा कैसा व्रत ? कि आज गुस्सा करना मना है क्योंकि इस व्रत में गुस्सा करने पर व्रत टूट जाता है इसलिए आज चाहे कुछ भी हो जाय - वर्ती होने के कारण  आज तो गुस्सा करना बनता ही नहीं है 

किसी के मुड को ठीक करने वाले  व्रत का फल प्राप्त  करने वाले को गुस्सा करने की  अनुमति नहीं है । हवन करना है तो शीशपाल जी को किस सामग्री की आहुति डालनी पड़ेगी ? जो कल्ह गलती हुआ, जो कल्ह गलती किया, जो कल्ह गलत व्यवहार किया, वे संस्कार और बीती हुई बात जो दिमाग ने पकड़ रखा है - इन सब सामग्री को हवन कुंड की अग्नि में आहुति डाल कर फिर फौजी जी से मिलाना होगा  पूजा करनी है - मतलब पूजा करके अपनी सोच को बदलना है ताकि आज जब फौजी जी सामने आएंगे तो आज उनके प्रति सोच और  व्यवहार कैसा होगा ? वो सोच और व्यवहार बदला हुआ होगा तो पूजा करना है , दान देना है , व्रत करना  है - ये सब कुछ करना है लेकिन कहाँ करना है ? दिमाग के अंदर करना है   हवन की   आहुति डालने का काम कहाँ करना है ?  - दिमाग के अन्दर  हवन कुंड में अग्नि प्रज्वलित करके आहुति डालना  है 

आज आप क्या कर रहे हैं ? सिर्फ भोजन त्यागने का व्रत करते  हैं, धन का दान देते हैं, कपडे का दान देते हैं कोई कहता है कि इस दिन नमक नहीं खाना, कोई कहता है कि उस मन्दिर  में  तेल चढ़ाना है, कोई कहता है कि उस मन्दिर में नारियल जरूर फोड़ना है  - ये सब करना तो है लेकिन इस शरीर वाला मन्दिर मेंदिमाग के अन्दर करना है जब तक मन में नहीं किया तब तक परिवर्तन  नहीं आएगा। आज यदि आप ऐसा नहीं करेंगे तो फौजी जी से फिर गलत व्यवहार करेंगे और कार्मिक एकाउन्ट बढ़ता ही चला जाएगा इसलिए फौजी जी से मिलने से पहले शीशपाल जी को बदलना पड़ेगा


आज आप हवन करेंगे तो आहुति में क्या डालेंगे ? जो सामग्री थाली में पड़ी है मन क्या कह रहा है ? आगया फौजी जी, जरा हवन ख़तम होने दो फिर निपटता हूँ उनसे आहुति डाल रहे  हैं अग्नि में और मन के अन्दर क्या हो रहा है ? शुद्धिकरण किसका हो रहा हैशुद्धिकरण किसका हो रहा है ? बोलो - बोलो

शीशपाल जी को विधि पूर्वक पूजा करना आता नहीं है इसलिए शीशपाल जी हवन करने के लिए पंडित जी को बुलाए और कहे - पंडित जी हवन आप ही कर दो यदि पंडित जी पूजा करेंगे तो भाग्य किसका बदलेगापंडित जी का पंडित जी का बिजनेस बढ़ेगा, पंडित जी को दक्षिणा मिलेगा, पंडित जी को कम्बल मिलेगा, पंडित जी को कपडे मिलेंगे , आपको क्या मिलेगा ? जो पूजा करेगा, जो हवन करेगा  उसी का तो भाग्य बदलेगा मेरा कहना यह है कि पंडित जी को बुलवाना अच्छी बात है, पूजा करवाना अच्छी बात है लेकिन पूजा कौन करेगा ? पंडित जी जो बात बोल रहे हैं उस  हरेक  बात  को मन में स्वीकार करके अपने सोच को बदलना है । यदि आप  ने सिर्फ मंत्र बोल दिया तो आपका भाग्य नहीं बदलेगा     

अब प्रश्न यह उठता है कि हवन भी कितनी बार करेंगे ? पंडित जी को बुला कर पूजा भी कितनी बार करेंगे ? वास्तव में शीशपाल जी को और आप सभी लोगों को प्रति दिन हवन करना है  प्रत्येक दिन उन बातों की आहुति देनी  है जो आपके दिमाग ने पकड़ रखा है थाल में  पड़े सामग्री की  नहीं बल्कि आपके दिमाग के अन्दर पड़ी गलत सोच की  सामग्री को अग्नि में आहुति देनी  है  

किस - किस के मन ने पुरानी बातों को पकड़ रखा है ? जरा हाथ ऊपर उठाओ ? अब केवल भाई और बुजुर्ग आप अपना हाथ ऊपर उठाओ ? अब केवल माता और बहनें आप अपना हाथ ऊपर उठाओ ? बात वह भी हो सकता है जो  कल्ह या महीना दिन पहले या एक साल पहले या किसी के जन्म दिन पर या किसी के पापा के जन्म दिन पर या आप अपने पत्नी के पापा के मैरेज एनवर्सरी पर गए हों और अपनी पत्नी को साथ ले कर उसी दिन बिना केक काटे वहां से चल दिए हों आज उस सभी को हवन कुंड में डालें ? तो आज हवन करें ? क्या कहते हैं आप ? तो आज हवन करें ? और शुद्धिकरण के लिए मन में पड़ी सामग्री को हवन कुंड में आहुति  दे दें ? याद रखें कि घर का  शुद्धिकरण  नहीं करना है बल्कि मन का शुद्धिकरण करना है।  किसी ने कहा कि वास्तु दोष के कारण घर में पड़ेशानी है वास्तु - शास्त्र वाला कहता है कि  वास्तु दोष दूर करने के लिए घर के कुछ सामान को बहार निकाल दो, टूटी खटिया को  बहार निकाल दो, टूटी शिशा को  बहार फेंक दो, पलंग का डायरेक्शन चेंज कर दो, रसोई तथा बाथरूम का डायरेक्शन चेंज कर दो और कोई कहता है कि मकान चेंज कर दो   आप फ़टाफ़ट उसकी बात मान लेते हो।  कोई कहता है कमरा बदल लो, कोई कहता है घर बदल लो, कोई कहता  है  बाथरूम का डायरेक्शन चेंज कर लो, कोई कहता है नाम बदल लो    जल्दी - जल्दी कर लो, बस कर ही लो   मैं पूछता हूँ कि क्या सब कुछ ठीक हो गया ?



एक सज्जन मिला   उसने पहली पत्नी को छोड़ दिया और दूसरी लड़की से शादी किया   उससे बच्चे नहीं हुए तो उसको भी छोड़ दिया और फिर उसने तीसरी लड़की से शादी कर ली। लेकिन इससे भी बच्चा नहीं हुआ।  तो फिर उसने क्या किया ? इस पत्नी को भी छोड़ दिया और बच्चे के चलते सबसे पहली वाली पत्नी को फिर से घर ले आया   तो मेरा कहना  यह है कि कमरा बदलने से, देश बदलने से, मकान बदलने से , बेड का डायरेक्शन बदलने से क्या झगड़ा बन्द हो गया ? हमारे पेरेंट्स ने घर बनाने से पहले किसी वास्तु वाले से नहीं पूछा   क्या उस वक्त घर में झगड़े होते थे ? नहीं, घर में लोग बड़े प्यार से रहते थे, सब में प्रेम था, सब में मिल्लत था, सब के एक मन थे, सबका  एक भगवान था  और आज ? शुभ दिन देख कर घर बनाते हैं, वास्तु के अनुसार घर बनाते हैं, पूजा करके गृह प्रवेश करते हैं फिर भी घर में रोज दिन झगड़े होते हैं  

आज के समय में शादी से पहले सभी लोग कुण्डली अवश्य ही  मिलाते हैं, शुभ दिन का चुनाव करते हैं, शुभ मुहूर्त में शादी करते हैं, सब कुछ चेक करके शादी करते हैं, सब कुछ मैच करके शादी करते हैं  फिर भी घर में झगड़े होते हैं और डिभोर्स होता है।  दिन पर दिन डिभोर्स रेट बढ़ ही रहा है मैं कहता हूँ कि पावर अपने हाथ में उठालो  कि हम अपने आप को चेंज करेंगे, अपने मन के निगेटिभ सोच को हवन में आहुति देंगे,  बाहर  किसी से भी हम पूछने नहीं जायेंगे, जिस बातों को मन ने पकड़ रखा है उसको हवन की प्रज्वाली अग्नि में आहुति रोज दिन दिया करेंगे और इसके लिए हम रोज दिन हवन करेंगे   यदि आप ऐसा करेंगे तो आप जीते - जीते, इसी शरीर में स्वर्ग में प्रवेश कर जायेंगे  

तथास्तु अर्थात ऐसा ही हो !   


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