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The Time Period Of Kaliyuga Has Finished

The Time Period Of Kaliyuga Has Finished

कलियुग की समय अवधि समाप्त हो गई 

आदिश्री अरुण 


The Time Period Of Kaliyuga Has Finished
हम 7 वें मन्वन्तर में जी रहे हैं और 7 वें मन्वन्तर के कलियुग की समय अवधि समाप्त हो चुकी है । स्कन्द पुराण, माहेश्वर खण्ड-कुमारिका खण्ड, शीर्षक "महाकाल द्वारा करंधम के प्रश्नानुसार, श्राद्ध तथा युग व्यवस्था का वर्णन" पेज नम्बर 129 के अनुसार 27 बार कलियुग बीत चुका है । आप 28 वां कलियुग में जी रहे हैं । प्रथम सत्य युग, अंतिम सत्य युग और 28 वां कलियुग ये अन्य युगों से कुछ विशेष महत्त्व रखते हैं । 28 वां कलियुग में जो होने वाला है वह सुनो:
* कलियुग के 3290 वर्ष बीतने पर इस भूमण्डल में वीरों का अधिपति शूद्रक नाम वाला राजा होगा । 
* तदन्तर कलियुग के 3310 वें वर्ष नन्द वंश का राज्य होगा । चाण्यक नाम वाला ब्राह्मण उन नन्दवंशियों का संहार करेगा ।
* तदन्तर कलियुग के 3020 वर्ष निकल जाने पर इस पृथ्वी पर विक्रमादित्य होंगे।
* तदन्तर कलियुग के 3000 से 100 वर्ष और अधिक बीतने पर शक नामक राजा होगा ।
* उसके बाद कलियुग के 3600 वर्ष बीतने पर मगध देश में हेमसदन से अंजनी के गर्भ से भगवान विष्णु के अंशावतार स्वयं भगवान बुद्ध प्रकट होंगे ।  
* कलियुग के 4400 वर्ष बीतने पर चंद्र वंश में महाराज प्रमिति का प्रादुर्भाव होगा ।
* तत्पश्यात काल के प्रभाव से जब प्रजा अत्यंत पीड़ित होने लगेगी, तब भयंकर अधर्म का आश्रय ले कर शठतापूर्ण व्यवहार करेगी । कोई बंधन न रहने के कारण सब लोग लोभ से व्याप्त हो झुण्ड के झुण्ड निकल कर एक दूसरे को लूटेंगे और मारेंगे । सभी श्रम से पीड़ित हो अत्यंत व्याकुल रहेंगे । उस समय वैदिक धर्म और स्मार्त धर्म नष्ट हो जाने पर एक दूसरे के आघात से नष्ट होंगे (अर्थात टेरेरिस्ट एटैक से लोग नष्ट होंगे) । वे धार्मिक और सामजिक मर्यादा का उल्लंघन करेंगे । सब में करुणा, स्नेह और लज्जा का अत्यंत अभाव हो जाएगा । सभी लोग नाटे कद के होंगे । स्त्रियों का आकर छोटा हो जायेगा । लोगों की आयु 20 - 25 की होगी । लोग अपना घर छोड़ कर नदी या समुद्र के तट पर निवास करेंगे (अर्थात नदी या समुद्र के तट पर स्थित शहर में निवास करेंगे ) ।  
ऐसा समय आजाने पर भगवान विष्णु शम्भल ग्राम में विष्णु यश के घर कल्कि नाम से उनके माता का नाम अवतार ग्रहण करेंगे । महर्षि वेदव्यास जी के श्रीमद्भागवतम महा पुराण  की भविष्यवाणियों का विश्लेषण यह कहता है कि सर्व व्यापक भगवान विष्णु सर्व शक्तिमान हैं । वे सर्व स्वरुप होने पर भी चराचर जगत के सच्चे शिक्षक - सद्गुरु हैं । वे साधु - सज्जन पुरुषों के धर्म की रक्षा के लिए, उनके कर्म का बंधन काटकर उन्हें जन्म मृत्यु के चक्र से छुड़ाने के लिए अवतार ग्रहण करेंगे । उन दिनों शम्भल ग्राम में विष्णु यश नाम के श्रेष्ट ब्राह्मण होंगे, उनका ह्रदय बड़ा उदार एवं भगवत भक्ति से पूर्ण होगा। उन्हीं के घर कल्कि भगवान अवतार ग्रहण करेंगे ।
कल्कि पुराण के भविष्यवाणियों का विश्लेषण यह कहता है कि भगवान कल्कि जी के माता का नाम सुमति, पिता का नाम विष्णु यश तथा दादा का नाम ब्रह्म यश होगा ।
18 महा पुराणों के भविष्यवाणियों का विश्लेषण निम्नलिखित बातों को वयान करता है :
(1) स्कन्द पुराण के अनुसार 27 बार कलियुग जब बीत जाएगा तब 28 वां  कलियुग में कलियुग के 3,600 (तीन हजार छौ सौ)  वर्ष बीतने के बाद मगध देश में हेमसदन से अंजनी के गर्भ से भगवान विष्णु के अंशावतार स्वयं भगवान बुद्ध प्रकट होंगे । तत्पश्चात कलियुग के 4,400  वर्ष बीतने के बाद चंद्रवंश में प्रमिति का प्रादुर्भाव होगा । काल के प्रभाव से जब प्रजा अत्यंत पीड़ित होने लगेगी, भयंकर अधर्म का आश्रय ले कर जब प्रजा शठतापूर्ण बर्ताव करने लगेगी, वैदिक और स्मार्त धर्म नष्ट हो जाएगी, सभी लोग धार्मिक और मर्यादा का उल्लंघन करने लगेंगे, लोग नाटे कद के होने लगेंगे, लोग अपना देश छोड़ कर नदी और समुद्र के तट पर (नदी और समुद्र के तट पर स्थित  शहर में ) निवास करने लगेंगे ।
(2) कलियुग में वेद को जानने वाले कोई नहीं होंगे । धर्म बताने वाला वेद मार्ग नष्ट हो जायेंगे । ब्राह्मण वेद बेचेंगे । पाखंडी लोग अपने नए - नए मत चला कर मनमाने ढंग से वेद का तात्पर्य निकालने लगेंगे । 
(3) कलियुग में पाखंडियों के कारण लोगों का चित्त भटक जाएगा । इस कारण लोग अपने कर्म और भावनाओं के द्वारा ईश्वर की पूजा से विमुख हो जायेंगे ।   
(4) कलियुग में लोग भगवान नारायण की पूजा नहीं करेंगे । 
(5) लोगों का भाग्य तो बहुत मन्द होगा परन्तु मन में कामनाएँ बहुत ही अधिक होगी । 
(6) लोग माता - पिता, भाई - बन्धु और मित्रों को छोड़ कर केवल अपनी साली और सालों की सलाह लेने लगेंगे । जिनसे वैवाहिक सम्बन्ध है उन्हीं को अपना संबंधी माना जाएगा । 
(7) लोग हमेशा रोग ग्रस्त रहेंगे । रोगों से तो उनको छुटकारा मिलेगा ही नहीं । ऐसे - ऐसे रोग फैलेंगे कि उसका इलाज संभव न हो सकेगा । 
(8) लोग नाटे कद के होने लगेंगे । वे नाना प्रकार के कुकर्मों से जीविका चलने लगेंगे ।   स्त्रियों का आकार बहुत ही छोटा हो जायेगा। वह बहुत कठोर वचन बोलने वाली होगी तथा पति को अपने वश में रखेगी । स्त्रियां अपने पति के कहना में नहीं रहेगी । 
(9) गौएँ बकरियों की तरह छोटी - छोटी और कम दूध देने वाली हो जाएगी । जौ, गेहूँ, धान आदि के पौधे छोटे - छोटे होने लगेंगे । 
(10) लोगों की आयु 20  से 30  वर्ष की हो जाएगी।
(11) लोग नकारात्मक सोच वाला हो जायेंगे । वे धर्म का सेवन केवल यश के लिए करेंगे । 
(12) जो लोग घूस देने और धन खर्च करने में असमर्थ होंगे उन्हें अदालत में ठीक - ठीक न्याय नहीं मिलेगा ।
(13) जो जितना अधिक दम्भ पाखंड करेगा वह उतना ही बड़ा पंडित समझा जायेगा । जो जितना ढिठाई से बात करेगा वह उतना ही सच्चा समझा जायेगा । 
(14) सन्यासी धन के लोभी हो जायेंगे । अर्थात वे अर्थ पिचास हो जायेंगे। 
(15) राजे - महाराजे लुटेरों के सामान हो जायेंगे ।
(16) राजा कहलाने वाले लोग प्रजा की सारी कमाई हड़प कर उन्हें चूसने लगेंगे । वे कर - पे - कर लगाते चले जायेंगे जिससे प्रजा का जीवन बड़ा ही कठिन और दुखद हो जाएगा ।  
(17) बिना अमावस्या  के ही सूर्य ग्रहण होगा । चंद्र और तारों की चमक कम हो जाएगी । 
(18) कभी वर्षा होगी तो कभी सूखा पड़ेगी, कभी मोटी धार वाली वर्षा होगी तो कभी बढ़ आजायेगी, कभी कड़ाके की सर्दी पड़ेगी तो कभी पाला पड़ेगा, कभी आंधी चलेगी तो कभी गर्मी पड़ेगी । धरती का तापक्रम काफी बढ़ जाएगा।
(19) लोगों में अराजकता फैल जाएगी।
(20) गृहाथों के घर अतिथि सत्कार या वेद ध्वनि बन्द हो जायेंगे । 
तब सम्पूर्ण जगत के स्वामी साक्षात् भगवान विष्णु शम्भल ग्राम में विष्णुयशा के पुत्र होकर अवतार लेंगे ।
आप सभी जानते हैं कि बुद्धा अवतार हो चुका और हो चुका राजा प्रमिति का प्रादुर्भाव । प्रजा भयंकर अधर्म का आश्रय ले कर जब प्रजा शठतापूर्ण व्यवहार कर रही है, वैदिक और स्मार्त धर्म नष्ट हो चुकी है, सभी लोग धार्मिक मर्यादा का उल्लंघन करने लगे हैं, लोग नाटे कद के होने लगे है , लोगों की आयु 20 वर्ष को तो छोड़ो, लोगों के उम्र की कोई सीमा ही नहीं रही कि वे कब मर जाएँगे , लोग अपना देश छोड़ कर नदी और समुद्र के तट पर ( नदी और समुद्र के तट पर स्थित शहर में ) निवास करने लगे हैं और इस प्रकार मुख्य भावी 20 प्रकार की घटनाओं का प्रभाव बीत चुका है तो ऐसी स्थिति में कल्कि अवतार को धरती पर अवतरित होना अनिवार्य हो गया है । अगर ऐसा नहीं हुआ तो सभी धर्मग्रंथों की भविष्यवाणी झूठे हो जाएँगे ।
श्रीमद्भागवतम महापुराण 12;2:18 में महर्षि वेद व्यास जी ने भविष्यवाणी किया कि -
"शम्भल ग्राम में विष्णु यश नाम के एक श्रेष्ट ब्राह्मण होंगे । उनका ह्रदय बड़ा उदार एवं भगवद्भक्ति  से पूर्ण होगा । उन्हीं के घर भगवान् कल्कि अवतार ग्रहण करेंगे ।"
कल्कि पुराण, प्रथम अंश, द्वितीय अध्याय, श्लोक 15 ने भविष्यवाणी किया कि "वैशाख मास की शुक्ल पक्ष की द्वादशी तिथि को भगवान विष्णु ने पृथ्वी पर अवतार लिया ।"
Kalki Comes in 1985 पुस्तक के तृतीय अध्याय में यह भविष्यवाणी किया गया है कि वैशाख मास की शुक्ल पक्ष की द्वादशी तिथि को सन 1985 में  भगवान विष्णु ने उत्तर भारत के शम्भल ग्राम में अवतार लिया ।
कल्कि कम्स इन  नाइनटीन  एट्टी फाइव पुस्तक, अध्याय  - 3 के अनुसार सन 1985  में वैशाख मास के शुक्ल पक्ष की द्वादशी तिथि को  उत्तर भारत के शम्भल ग्राम में, विष्णु यश के घर भगवान कल्कि जी ने अवतार ग्रहण किया । सन 1985  में वैशाख मास के शुक्ल पक्ष की द्वादशी  तिथि 2  मई  को पड़ता है (अर्थात 2 May 1985) , इस कारण भगवान कल्कि  2 May 1985 को भारत के पूण्य भूमि शम्भल ग्राम में अवतार ग्रहण किए ।
शम्भल ग्राम का अर्थ : शम्भु Shambhu – Brahm (those who knows Brahm / Brahm knowing people) is called Brahman + ल or ले (of) + ग्राम Grama (Community/Village/Group of people living at a certain Place) = शम्भल ग्राम Shambhal Grama (Village / Place / City of Brahman / Group of Brahman ब्रह्मणों का समूह) A place where group of Brahman is living / जहाँ ब्राह्मणों का समूह निवास करता है, उसे शम्भल ग्राम कहते हैं। 
धर्मग्रन्थ के  अनुसार भगवान कल्कि  उत्तर भारत के शम्भल ग्राम में श्रेष्ठ ब्राह्मण (Group of Brahman) विष्णुयश के  घर अवतार लेंगे । उत्तर भारत में दो शम्भल ग्राम है - एक मुरादाबाद में तथा दूसरा मथुरा और वृन्दावन के बोर्डर पर (गौड़ी मठ के पास) । मुरादाबाद शम्भल में 98 % मुस्लिम हैं तथा 2 % में अन्य जातियाँ निवास करती है तथा यहाँ बहुत कम ही ब्रह्मण परिवार हैं । यहाँ के अधिकतर लोग इस्लाम धर्म को मानने वाले हैं और भगवान कृष्ण की पूजा करने वाले लोग नहीं के बराबर हैं । अतः इस शम्भल में Group of  Brahman की कल्पना ही नहीं किया जासकता है । मथुरा और वृन्दावन के बोर्डर पर (गौड़ी मठ के पास) जो शम्भल है वहाँ पर  ब्रह्मणों की संख्या बहुत ही अधिक  है तथा यहाँ के अधिकतर लोग भगवान कृष्ण की पूजा करने  वाले हैं । अतः यही शम्भल भगवान कल्कि जी का अवतार स्थान है । संक्षिप्त भविष्यपुराण 4;5:27-28, प्रतिसर्ग पर्व, चुतुर्थ खंड पेज नम्बर 331 के अनुसार भगवान श्री विष्णु ने कहा कि  मैं देवताओं के हित और दैत्यों  के विनाश के लिए कलियुग में अवतार लूंगा और कलियुग में भूतल पर स्थित सूक्ष्म रमणीय दिव्य वृन्दावन में रहस्यमय एकांत - क्रीड़ा करूँगा । घोर कलियुग में सभी श्रुतियाँ गोपी के रूप में आकर रासमंडल में मेरे साथ रासक्रीड़ा करेगी । कलियुग के अंत में राधा जी के प्रार्थना को स्वीकार करके मैं रहस्यमयी क्रीड़ा  को समाप्त कर के कल्कि के रूप में अवतीर्ण होऊंगा । तो ऐसी स्थिति में भगवान् कल्कि उस शम्भल ग्राम में अवतार लेकर आगए जो मथुरा और वृन्दावन  के बोर्डर पर स्थित है । 
मुरादा बाद के शम्भल ग्राम में भगवान कल्कि कभी अवतार नहीं लेंगे । इसके मुख्य कारण हैं  ब्राह्मणों की जनसंख्या का नगण्य होना या लगभग लगभग शून्य होना । जबकि विष्णुयश जी श्रेष्ट ब्राह्मण होंगे; अर्थात ब्राह्मणों में श्रेष्ट होंगे । लेकिन जहाँ  दो - चार ब्राह्मण परिवार ही हो  वहां  ब्राह्मणों में श्रेष्ट वाली शर्त लागू  ही नहीं होता है । अतः मुरादा बाद के शम्भल ग्राम भगवान कल्कि का अवतार स्थल नहीं हो सकता है। 
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