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Prophacy of Kalki Naam /कल्कि नाम की महिमा के बारे में क्या है भविष्यवाणी ?

कल्कि नाम की महिमा के बारे में क्या है भविष्यवाणी ?


आदिश्री अरुण 

Prophacy of Kalki Naam


श्री तुलसी दास जी ने रामचरित मानस में यह भविष्यवाणी किया है कि कलियुग में केवल नाम ही आधार है । मनुष्य केवल नाम सुमिरन करके ही भव से पार हो जाएँगे।
  
रामचरित मानस में यह भी भविष्यवाणी किया गया है कि कलियुग में न तो योग और यज्ञ है और न ज्ञान ही है । कलियुग में श्री राम जी का जो नाम होगा केवल  उसी  नाम का गुणगान ही एक मात्र आधार है। जो प्रेम सहित उनके गुण समूह नाम को गाता है वह भव सागर से तर जाता है । कलियुग में नाम की एक महिमा  है कि मानसिक पूण्य तो होते हैं पर मानसिक पाप नहीं होते।       
रामचरित मानस में यह भी भविष्यवाणी किया गया है कि "जैसे स्वामी के पीछे - पीछे सेवक चलता है, उसी प्रकार नाम के पीछे - पीछे नामी चलता है।" (रामचरित मानस, बालकांड 20:1) रूप नाम के आधीन  है परन्तु नाम के बिना रूप का ज्ञान नहीं हो सकता है । (रामचरित मानस, बालकांड 20:2)  बिना नाम जाने हथेली पर रखा हुआ कोई सा विशेष रूप पहचा नहीं जा सकता और रूप को बिना देखे नम जप विशेष प्रेम के साथ किया जाय तो वह रूप हदय में आ जाता है । (रामचरित मानस, बालकांड 20:3)  
महर्षि वेद व्यास जी ने श्रीमद्भागवतम महा पुराण में यह भविष्यवाणी किया है कि जो फल सत्य युग में धयान करने से, त्रेता में यज्ञ करने से और द्वापर में विधि पूर्वक पूजा करने से मिलता है वह फल कलियुग में केवल श्री हरि के नाम के संकीर्तन से ही मिल जाता है । (श्रीमद्भागवतम महा पुराण 12;3:52)
पद्मपुराण, पातालखंड, शीर्षक "नाम कीर्तन की महिमा ,भगवान के चरण चिन्हों  का परिचय तथा प्रत्येक मास में भगवान की विशेष आराधना का वर्णन" पेज नंबर 565 में भविष्यवाणी किया गया है कि "कलियुग में केवल हरि नाम ही संसार समुद्र से पार लगाने वाला है ।"     
श्री नरसिंह पुराण अध्याय  54 पेज नंबर 239 में भविष्यवाणी किया गया है कि "सत्य युग में ध्यान, त्रेता में यज्ञों के द्वारा यजन और द्वापर में पूजन करने से जो फल मिलता है,उसे ही कलियुग में केवल भगवान का कीर्तन करने से मनुष्य प्राप्त कर लेता है ।"            
श्रीविष्णु पुराण, षष्ठ अंश, अधयाय 2, श्लोक 17 पेज नंबर 428 में भविष्यवाणी किया गया है कि जो फल  सत्य युग में धयान, त्रेता में यज्ञ  और द्वापर में देवार्चन करने से मिलता है वही  फल कलियुग में श्री कृष्ण चंद्र जी का जो नाम होगा उस  नाम के केवल संकीर्तन करने से ही मिल जाता है ।  
श्री नरसिंह पुराण अध्याय  54, शीर्षक "कल्कि-चरित्र और कलि-धर्म " पेज नंबर 239 में भविष्यवाणी किया गया है कि  "सत्य युग में दस वर्षों तक तप करे से जो  फल मिलता है, वही त्रेता में एक  ही वर्ष के प्रयत्न से सिद्ध होता है,  द्वापर में एक  ही मास की साधना से सुलभ होता है और कलियुग में केवल यक दिन - रात  प्रयत्न करने से प्राप्त हो  जाता है ।"
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