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Who Is Aadishri Arun and Seven Pillars of AADISHRI Philosophy ?


आदिश्री अरुण कौन हैं ? और क्या हैं 7 विचारधारा ?
        
Who Is Aadishri Arun and Seven Pillars of AADISHRI Philosophy ?
"आदिश्री" शब्द का अर्थ होता है - ऊँचा गरिमा या कोई प्रशिद्ध या कोई विशिष्ट । "आदिश्री" शब्द का अर्थ यह भी होता है - जो सबसे पहले जन्म लिया हो या जो सबसे पहले प्रकट हुआ हो या आदि पुरुष और "आदिश्री" शब्द ईश्वरपुत्र को भी संबोधित करता है।
दूसरी ओर "अरुण" शब्द का अर्थ होता है - प्रकाश, सूर्य। इसलिए "आदिश्री " + "अरुण" (COMBINATION OF AADISHRI ARUN) का अर्थ होता है प्रकाश से भरा ऊँचा गणमान्य या विशिष्ट व्यक्ति "ईश्वरपुत्र "

Length of name (AADISHRI) – 8 letters ( 8 अक्षर )
Birth Star – Sun (सूर्य )
Rashi – Mesh (मेष)
Zodiac Sign – Aries (मेष)
Nakshtra – Krithika (कृतिका)







आदिश्री ही वह पहिलौठा (FIRST BORN) अथवा आदि पुरुष है जिसने प्रकाश रूप में आकार धारण किया और फिर बाद में अरुण नाम से शारीर धारण किया। आदिश्री अरुण जी का विचारधारा (दर्शन) और उनकी शिक्षाएँ निराकार ईश्वर - अनामी की प्रवृति (based on the Anaami - the formless nature of God) पर आधारित है जिसने अपने पहिलौठा (FIRST BORN) होने के स्तित्व से संपूर्ण ब्रह्मांड को रचा । इनकी विचारधारा किसी व्यक्ति विशेष में भेद - भाव उत्पन्न नहीं करता है और न एक आत्मा होने के कारण मानव के एक जाति, एक पंथ, एक धर्म के होने में अर्चन पैदा करता है और न लिंग और लुप्तप्राय जातियों में भेद - भाव उतपन्न करने वाली भावनाओं का समर्थन करता है।


आदिश्री अरुण के विचार धारा का 7 स्तम्भ (Seven Pillars of AADISHRI Philosophy) हैं :


7 स्तम्भ ही आदिश्री अरुण की शिक्षाओं का मुख्य केन्द्र है। इन 7 सत्यों को समझ पाना बेहद आसान है। यह मानव जीवन से जुड़े बेहद आम बातें हैं जिनके पीछे छुपे गूढ़ रहस्यों को आप कभी समझ नहीं पाते। यह 7 सत्य निम्नलिखित हैं:


(1) दुख :- जीवन का अर्थ ही दुख है। जन्म लेने से लेकर मृत्यु तक मनुष्य को कई चरणों में दुख भोगना पड़ता है।

(2) चाहत :- दुख का कारण चाहत है। मनुष्य के सभी दुखों का कारण उसका कार्य, मोह या व्यक्ति के प्रति लगाव ही है।

(3) दुखों का अंत संभव है :- कई बार मनुष्य अपने दुखों से काफी परेशान हो जाता है । मनुष्य को यह समझना चाहिए कि उसके दुखों का अंत संभव है।

(4) दुखों के निवारण का मार्ग :- सूरत शब्द योग ही मनुष्य के समस्त दुखों के निवारण का मार्ग है।

(5) जीते - जीते, इसी शरीर में, बिना मरे, Without Death मोक्ष की प्राप्ति हो सकती है ।

(6) ईश्वर का आशीष प्राप्त कर आनंदमय जीवन प्राप्त करना संभव है ।

(7) आप तो नहीं मरेंगे पर हवा में बदल जायेंगे ताकि आप ईश्वर से मिल सकें और मुक्ति को प्राप्त करें ।  
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