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3 Ways to Follow God’s Will / क्या है ईश्वर के इच्छाओं को अनुसरण करने का 3 साधन ?



 क्या है ईश्वर के इच्छाओं को अनुसरण करने का 3 साधन ? 

3 Ways to Follow God’s Will

आपसे सम्बंधित जो भी चिन्ता की चीज है ईश्वर उसका ख्याल रखते हैं साथ ही साथ छोटे - बड़े उन चीजों का भी ख्याल रखते हैं जिसके सम्बन्ध में आप निर्णय लेते हैं । सम्पूर्ण सृष्टि के पिता उन सभी को  विस्तार से जानते हैं और उसके बारे चिंतित हैं जिसकी आपको जरुरत है। वे जानते हैं कि आपके दैनिक जीवन में किन - किन चीजों की जरुरत है । उनकी इच्छा रहती है कि आपके हर जरूरतों को पूरा करें । वे आपके  प्रत्येक ख्वाइस का ख्याल रखते हैं जो आपके मन में उपजती  हैं       



तुम अपने जीवन में ईश्वर की इच्छाओं का पालन निम्नलिखित 3 प्रकार से कर सकते हो :

1. ईश्वर के पास केवल ईश्वर पुत्र के द्वारा ही पहुँच सकते हैं : आज बहुत सारे लोग हैं जो विभिन्न प्रकार के रीती रिवाज और परम्परा में विश्वासों के द्वारा अच्छाई के खोजी हैं, ज्ञान के खोजी हैं, आशा और दिशा  निर्देश के खोजी हैं । परन्तु ईश्वर पुत्र के सम्बन्ध में गोगों की एक अलग धारणा  है । लोग ईश्वर पुत्र  को एक पवित्र शिक्षक के रूप में देखते हैं । ईश्वर पुत्र ने यह घोषणा किया कि "द्वार, सत्य और जीवन मैं ही हूँ, मेरे बिना कोई भी व्यक्ति अपने पिता तक नहीं पहुँच सकता आपके जीवन के लिए ईश्वर की एक योजना है और उन्होंने धरती पर आपके लिए एक पवित्र आत्मा को भेजा है ताकि वे आपको ईश्वर की इच्छा क्या है इस बात को बताये जब वह पवित्र की आत्मा आएगा तो सत्य के बारे में बताएगा और आपको दिशा निर्देश करेगा तब आपका कर्तव्य होगा कि आप उनके बताए गए दिव्य मार्ग पर चलें
        
2. ईश्वर की  इच्छाओं को जान कर अपने आपको ईश्वर के चरणों में समर्पित करो : ईश्वर के चरणों में समर्पित करना ही ईश्वर की सच्ची सेवा है । धर्मशास्त्र यह घोषणा करता है कि यदि आप अपने शरीर को ईश्वर में समर्पित करते हो और एक पवित्र  जीवन जीते हो तो आप ईश्वर के द्वारा स्वीकार किये जायेंगे । याद रखिये  कि "पवित्र" और "स्वीकार योग्य" एक साथ जाते हैं । कोई भी  अपवित्र चीज ईश्वर कभी भी स्वीकार नहीं करते हैं


3. आपका  मन आत्मिक रूप से नया होना चाहिए : मन को आत्मिक रूप से नया बनाना परम आवश्यक है ताकि बदला हुआ आपका मन यह सिद्ध कर दे कि अच्छा, स्वीकार योग्य, सही और ईश्वर की इच्छा यह ईश्वर की योजना के अनुरूप है । जिस प्रकार एक पिल्लू  तितली में बदल जाता है, ठीक उसी प्रकार आपको भी शारीरिक और मानसिक रूप से बदलना है ताकि आप  ईश्वर के साथ रह सकें । तब वे आपको आत्मिक देह से स्वभाविक देह में बदल देंगे ताकि आपकी  मृत्यु हो और आपको हर तरह का कमफोर्ट  मिले जिस तरह अदन बाटिका में आदम को मिलता था 


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