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Who is in Aadishri faith and what is the remedy of sorrow?


कौन हैं आदिश्री फेथ के अंतर्गत और  क्या है  दुखों के निवारण का उपाय?

Who is in Aadishri faith and what is the remedy of sorrow?


Who is in Aadishri faith and what is the remedy of sorrow?



जो आदिश्री अरुण  के उपदेश में विश्वास रखता है और यह स्वीकार करता है कि (1) पूर्ण ब्रह्म का  केवल एक ही पुत्र है जिनको परमात्मा कहते हैं,  जो सम्पूर्ण  सृष्टि के रचयिता हैं, जो सभी मनुष्य की  आत्मा हैं और जो सभी आध्यात्मिकता एवं धर्मों  के निकलने वाले झरना स्रोत के मुख हैं (उद्गम के स्रोत हैं)  (2) केवल उन्हीं परमात्मा के  पास जीवन देने और जीवन को वापस लेने की शक्ति मौजूद है  (3) केवल उन्हीं परमात्मा से निकल कर मनुष्य जन्मने और मरने वाले शरीर में आया (4) केवल उन्हीं परमात्मा को प्राप्त कर जन्म - मृत्यु के चक्र से छुटकारा पा सकता है (5) केवल उन्हीं परमात्मा के आश्रय में रहकर सम्पूर्ण कर्म करने के बाबजूद भी मनुष्य उद्धार पासकता है और (6) केवल परमात्मा उन्हीं के मार्ग पर चल कर मनुष्य निज धाम वापस लौट सकता है, केवल ऐसा विश्वास करने वाला व्यक्ति ही  आदिश्री फेथ के अंतर्गत  हैं।

दुखों के निवारण का उपाय:

आदिश्री अरुण के अनुसार दुखों के निवारण का मार्ग एक मात्र केवल सूरत शब्द योग ही है जो जो निम्न प्रकार वर्णित हैं। आदिश्री अरुण के मत के अनुसार मनुष्य को इन्हीं मार्गों का अनुसरण करना चाहिए :-
नौ द्वार (Nine gates) से संसार जुड़ा है। इन नौ द्वार के बिना संसार नहीं जुड़ सकता। शब्द के बिना कोई भी आदमी दसम द्वार से नहीं जुड़ सकता। दसवां द्वार से परमेश्वर के घर का मार्ग जुड़ा है। परमेश्वर के घर जाने का मार्ग दसम द्वार से मिलेगा। ज्यों - ज्यों तुम नाम की कमाई करोगे त्यों - त्यों दसम द्वार के करीब पहुंचोगे। इसलिए नाम जप सिख कर सेवा करो। जोड़ मत लगा बल्कि परमेश्वर से प्रेम कर तब दसवां द्वार खुल जायेगा। दसमा द्वार खोलने का प्रेम ही कोड (CODE) है। तुम्हारे अन्दर प्रेम कब जन्म लेगा ? जब तुम "मेरा " और "तेरा " (मेरा राग को कहते हैं और तेरा द्वेष को कहते हैं। जो अच्छा लगे वह मेरा है और जो अच्छा नहीं लगे वह तेरा है) अर्थात राग और द्वेष को छोड़ दोगे। यही "राग और द्वेष " भगवन की प्राप्ति में सबसे बड़ा रुकावट है।

गुरूद्वारे तक पहूँचना और बात है और गुरु का वचन पालन कर परमेश्वर तक पहुँचना और बात है। संसार तक पहुँचने के लिए नौ दरवाजे (Nine gates) हैं परन्तु परमेश्वर तक पहुँचने के लिए केवल एक ही दरवाजा है वह है दसम द्वार और वह भी बन्द है। मनुष्य का जब हजारों जन्म का पूण्य फल एक जगह इकट्ठा होता है तब उसको सच्चा गुरु मिलता है। अर्थात कम से कम एक हजार जन्म के बाद सच्चा गुरु से मुलाकात होने की सम्भावनाएँ होती है और जब मनुष्य गुरु के शरण में जाता है तो वह गुरु कृपा प्राप्त कर लेता है और गुरुदेव उनको   परमेश्वर तक पहुँचने की युक्ति को सिखा देता है। इसी युक्ति को सूरत शब्द योग कहते हैं। वह गुरु जिसको अगम धारा कहते हैं वह पाँच मण्डलों को पार परमेश्वर का घर है वहाँ तक पहुंचने की युक्ति सिखा कर परमेश्वर का पांच नाम दान में दे देता है। उसी पांच नाम का सुमिरन करता हुआ मनुष्य अनामी देश के अथाह प्रकाश सागर रूप  घर तक पहुंच जाता है और तब उसकी चाह मिट जाती है ।
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