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Lord Vishnu / भगवान विष्णु

Who is Lord Vishnu? / भगवान विष्णु 

(ईश्वर पुत्र अरुण)

Lord Vishnu

Lord Vishnu / भगवान विष्णु 

सृष्टि रचना के उद्देश्य से पूर्ण ब्रह्म अपने आपको तीन  विष्णु में विभाजित किए - (1) महा विष्णु (2) गर्वोदकासयी विष्णु (3) क्षीरदकोसयी विष्णु 

महा विष्णु से जड़ प्रकृति उत्पन्न हुआ जिसको Lower Energy  कहते हैं । इससे रचने का काम किया जाता है ।  
गर्वोदकासयी विष्णु से चेतन प्रकृति उत्पन्न हुआ जिसको Higher  Energy  कहते हैं। इससे रचना फंक्शन करती है । 
क्षीरदकोसयी विष्णु Super Soul परमात्मा/पहिलौठा/ईश्वर पुत्र/ईश्वर के सदृश उत्पन्न हुआ जो जर्रे - जर्रे में समाया । इसी  क्षीरदकोसयी विष्णु / परमात्मा/पहिलौठा/ईश्वर पुत्र/ ने जड़ प्रकृति और चेतन प्रकृति से पूरा संसार बनाया । यही क्षीरदकोसयी विष्णु सम्पूर्ण जगत का मूल करण हैं । (गीता 7 :4-6) 
गीता अध्याय 4  के श्लोक 6 में ईश्वर  ने कहा कि - तू ऐसा समझ कि सम्पूर्ण भूत इन दोनों प्रकृतियों से उत्पन्न होने वाले हैं और मैं सम्पूर्ण जगत का प्रभव तथा प्रलय हूँ ।  
क्षीरदकोसयी विष्णु जी को ही नारायण कहते हैं और ये अवतारों का अक्षय (कोष) भण्डार हैं । इन्हीं से सारे अवतार प्रकट होते हैं । (श्रीमद्भागवतम महा पुराण 1 ;3 :5) आज तक जितने भी अवतार हुए हैं सब इन्हीं के अंश से प्रकट हुए हैं । अब तक क्षीरदकोसयी विष्णु के जितने भी अवतार हुए हैं उसमें कुल 24  अवतर प्रसिद्ध हैं  ।
श्रीमदभागवतम महापुराण  1 ;3 :6 -25 में 22 अवतारों की गणना  की गई है, भगवान के के दो अवतारों के नाम की चर्चा नहीं की गयी है । श्रीमदभागवतम महापुराण में दो अवतारों के नाम गुप्त हैं। Kalki Puran / कल्कि पुराण 1 ; 2 :7 के अनुसार उन दो अवतारों  के नामों का साफ़ - साफ़ उल्लेख है। उन दोनों के नाम  हैं - मरू और देवापि। 

क्षीरदकोसयी विष्णु  के 24 अवतारों के नाम निम्नलिखित हैं - 

(1) सनक, सनन्दन, सनातन और सनत्कुमार चार ब्रह्मण 
(2) सूकर  अवतार 
(3) नारद 
(4)  नर-नारायण 
(5) कपिल 
(6) दत्तात्रेय 
(7) यज्ञ 
(8) ऋषभदेव 
(9)  पृथु 
(10)  मत्स्य अवतार 
(11)  कच्छप  अवतार 
(12) धन्वंतरि 
(13) मोहिनी अवतार 
(14) नरसिंह अवतार 
(15)  वामन अवतार 
(16) परशुराम अवतार 
(17) परासर  
(18)  रामावतार 
(19) बलराम
(20) कृष्णावतार 
(21)  बुद्धा अवतार 
(22) देवापि 
(23) मरू 

कल्कि अवतार:-
कल्कि अवतार 64 कलाओं से युक्त हैं । महा पुराणों के अनुसार उत्तरप्रदेश के मथुरा-वृन्दावन  के बोर्डर (गौरिया मठ के पास) संभल नामक स्थान पर विष्णुयश नामक श्रष्ठ ब्राह्मण के घर माता सुमति के गर्भ से भगवान कल्कि, पुत्र रूप में जन्म लिए । कल्कि जी देवताओं के द्वारा दिए गए शीघ्रगामी घोड़े पर सवार होकर हाथ में रत्नसरु तलवार लेकर  संसार से पापियों का विनाश करेंगे और धर्म की पुन:स्थापना करेंगे।
ईश्वर के अवतार लेने का समय और ईश्वर के अवतार लेने का जो उद्देश्य  होता है वह गीता 4 : 8 में भगवान श्रीकृष्ण जी ने साफ़ - साफ़ शब्दों में वर्णन किया है। साधु पुरुषों का उद्धार करने के लिए, पापकर्म करने वालों का विनाश करने के लिए और धर्म की अच्छी तरह से स्थापना करने के लिए भगवान्  अवतार लेते हैं।  

श्रीमदभागवतम महापुराण 12;2:19-21  में भगवान्  कल्कि जी के अवतार लेने के उद्देश्य के बारे में भविष्वाणी किया गया है कि भगवान कल्कि जी ही जगत के रक्षक और स्वामी हैं। वे देवदत्त नामक घोड़े पर सवार होकर दुष्टों को तलवार के घाट उतारकर ठीक करेंगे। उनके रोम - रोम से अतुलनीय तेज की किरणें   छिटकती होगी।  वे अपने शीघ्रगामी घोड़े से सब जगह (सर्वत्र) घूमेंगे (विचरण करेंगे) और राजा के वेश में छिप कर रहने वाले कोटि - कोटि डाकुयों का संहार करेंगे। तब नगर की और  देश की सारी प्रजा का ह्रदय पवित्रता से भर जाएगा; क्योंकि भगवान् कल्कि के शरीर में लगे हुए अंगराज का स्पर्श पाकर अत्यन्त पवित्र हुई वायु उनका स्पर्श करेगी और इस प्रकार वे भगवान के श्रीविग्रह की दिव्य गंध प्राप्त कर सकेंगे। 


भगवान कल्कि ने किस प्रकार और कहाँ ले लिया अवतार और इस समय क्या है उनका उम्र, कहाँ अब कब हुआ उनकी शादी ?


इतिहास और पौराणिक कथा को देखिए ।  भगवान राम और भगवान कृष्ण के आने के बारे में कोई नहीं जाना। यहाँ तक कि भगवान कृष्ण सात साल की उम्र में सात दिनों तक गोवर्धन पर्वत को कँगूलिया अँगुली से उठाये रहे फिर भी न तो मथुरा के राजा कंस ने जाना और न मथुरा के लोग ही जान पाए कि कृष्णावतार होगया। भगवान बुद्ध के बारे में कोई भी नहीं जाना कि ये भगवान विष्णु के अवतार हैं। ठीक उसी तरह भगवान कल्कि जी भी शम्भल ग्राम में दिनांक 2 मई 1985 को वैशाख मास शुक्ल पक्ष द्वादशी को अवतार लिए लेकिन कल्कि जी  के अवतार लेने के बारे में कोई नहीं जाना। कल्कि पुराण 1;2:15 तथा कल्कि कम्स इन 1985 पुस्तक के तीसरा अध्याय ऊपर लिखे बातों की पुष्टि करता है। 

कल्कि पुराण/Kalki Puran, 1 ; 2 : 15 के अनुसार - वैशाख मास की शुक्ल पक्ष की द्वादशी तिथि को भगवान विष्णु ने पृथ्वी पर अवतार लिया । माता - पिता ने पुलकित होकर इस पुत्र को पैदा होते देखा ।  

Kalki Comes in 1985 पुस्तक के तृतीय अद्ध्याय में यह भविष्यवाणी किया गया है कि वैशाख मास की शुक्ल पक्ष की द्वादशी तिथि को सन 1985 में  भगवान विष्णु ने उत्तर भारत के मथुरा के शम्भल ग्राम में अवतार लिया ।

धर्मग्रन्थ के  अनुसार भगवान कल्कि  उत्तर भारत के शम्भल ग्राम में श्रेष्ठ ब्राह्मण (Group of Brahman) विष्णुयश के  घर अवतार लेंगे । उत्तर भारत में दो शम्भल ग्राम है - एक मुरादाबाद में तथा दूसरा मथुरा और वृन्दावन के बोर्डर पर (गौड़ी मठ के पास) । मुरादाबाद शम्भल में 98 % मुस्लिम हैं तथा 2 % में अन्य जातियाँ निवास करती है तथा यहाँ बहुत कम ही ब्रह्मण परिवार हैं। यहाँ के अधिकतर लोग इस्लाम धर्म को मानने वाले हैं और भगवान कृष्ण  पूजा करने वाले लोग नहीं के बराबर हैं । अतः इस शम्भल में Group of  Brahman की कल्पना ही नहीं किया जासकता है । मथुरा और वृन्दावन के बोर्डर पर (गौड़ी मठ के पास) जो शम्भल है वहाँ पार  ब्रह्मणों की संख्या बहुत ही अधिक  लोग हैं तथा यहाँ के अधिकतर लोग भगवान कृष्ण की पूजा करने  वाले हैं । अतः यही शम्भल भगवान कल्कि जी का अवतार स्थान है। संक्षिप्त भविष्यपुराण 4;5:27-28 ; प्रतिसर्ग पर्व, चुतुर्थ खंड पेज नो 331 के अनुसार भगवान श्री विष्णु ने कहा कि  मैं देवताओं के हित और दैत्यों  के विनाश के लिए कलियुग में अवतार लूंगा और कलियुग में भूतल पर स्थित सूक्ष्म रमणीय दिव्य वृन्दावन में रहस्यमय एकांत - क्रीड़ा करूँगा। घोर कलियुग में सभी श्रुतियाँ गोपी के रूप में आकर रासमंडल में मेरे साथ रासक्रीड़ा करेगी। कलियुग के अंत में राधा जी के प्रार्थना को स्वीकार करके मैं रहस्यमयी क्रीड़ा  को समाप्त कर के कल्कि के रूप में अवतीर्ण होऊंगा  ।
कृष्णा  अवतार  की तरह  इस बार  भी  कल्कि जी चार भुजा में अवतार लिए, लेकिन ब्रह्माजी उसी समय वायु देव को भेज कर कल्कि भगवान को यह संदेश भिजावाए कि उन्हें  साधारण मनुष्य रूप में रहना है। ब्रह्माजी का संदेश पाकर कल्कि भगवान मनुष्य रूप में प्रकट हो  गए ।  यह लीला जब उनके माता-पिता देखे तो वो हैरान हो गए । उन्हें ऐसा लगा कि किसी भ्रमवश उन्होंने अपने पुत्र को चार भुजा में देखा था।

इस समय (Presently) भगवान कल्कि की आयु 31 साल है तथा इनकी शादी पद्म जी के साथ 4 अप्रैल 2006 को श्रीलंका में हुई  

भगवान कल्कि जी का माता - पिता कौन  ?
भगवान कल्कि / Lord Kalki  के माता  का नाम सुमति और पिता का नाम विष्णुयश है (Kalki Puran / कल्कि पुराण 1 ;2 :4 ) श्रीमदभागवतम महा पुराण 12 ;2 : 18, श्रीमद्देवी भागवत, स्कन्ध- 1 पेज न ० 660, श्री विष्णु पुराण, चतुर्थ अंश, पेज न ० 301, मत्स्य पुराण,अध्याय - 47, महाभारत, वन पर्व, शीर्षक "काली धर्म और कल्कि अवतार"  पेज न ० 311, ब्रह्मवैवर्त पुराण, प्रकृति खण्ड, पेज न ० 115 में भगवान कल्कि जी के पिता के नाम की भविष्यवाणी है। केवल कल्कि पुराण ;2 :4 में ही भगवान कल्कि जी के माता - पिता के नाम की भविष्यवाणी किया गया  है।          

कौन हैं विष्णुयश  ?

धर्मग्रन्थों में भगवान कल्कि जी के पिता जिस विष्णुयश के बारे में भविष्यवाणी की गई है वे वास्तव में स्वयम्भू मनु के अवतार हैं । पद्म पुराण 1 ; 40 :46 ,  उत्तरखंड,  शीर्षक " रामावतार की कथा -  जन्म का प्रसंग" पेज नंबर - 949 के अनुसार नैमिषारण्य में  गोमती  किनारे तप करके भगवन विष्णु जी को प्रसन्न किए और यह वरदान मांगे कि आप तीन जन्मों तक  मेरे पुत्र के रूप में जन्म लीजिए  ।  इसलिए स्वयम्भू मनु के तीन जन्मों तक भगवान विष्णु उनके पुत्र के रूप में अवतार लिए।   उनका पहला जन्म हुआ  -  राजा दशरथ के रूप में और भगवान  विष्णु राम नाम से उनके पुत्र के रूप में जन्म लिए ।  उनका दूसरा  जन्म हुआ  - वासुदेव जी के रूप में और भगवान  विष्णु  कृष्ण  नाम से उनके पुत्र के रूप में जन्म लिए । उनका तीसरा   जन्म हुआ  - विष्णुयश  जी के रूप में और भगवान  विष्णु  कल्कि   नाम से उनके पुत्र के रूप में जन्म लिए। 

कौन हैं भगवान कल्कि जी का गुरुदेव  ?


Lord Kalki / भगवान कल्कि जी जन्म लेते ही वामन अवतार की तरह ही जल्दी - जल्दी बड़ा होने लगे  । उनके पिता पढने योग्य देख कर कल्कि जी का उपनयन संस्कार किए और महेन्द्र पर्वत निवासी परशुराम जी कल्कि जी को विद्याध्ययन  लिए  वाल्यावस्था में ही महेन्द्र पर्वत पर ले गए। शशिध्वज की पुत्री रमा से शादी करने के बाद कल्कि जी 9 (नौ) गुरु बनाए जिनका नाम निम्नलिखित है (कल्कि पुराण / Kalki Puran 3,6:8 - 9)   :- 
1. कृपाचार्य, 2. परशुराम,  3. वशिष्ट, 4. वेद व्यास, 5. धौम्य, 6. अकृतव्रण,  7. अश्वत्थामा, 8.  मधुछन्द और 9. मन्दपाल।  
क्या है भगवान कल्कि जी का मुख्य 5 मिशन ? 

भगवान कल्कि जी का मुख्य 5 मिशन निम्नलिखित हैं :-
(1) श्रीलंका में जाकर पद्मावती से शादी करना
(2) पापी, दुष्ट, म्लेच्छ, बर्बर इत्यादि का संहार करना 
(4) राजा के वेश में छिपकर रहने वाले कोटि - कोटि डाकुओं का संहार करना  
(4) धर्म की अच्छी तरह से स्थापना करना
(5) संसार में मरू और देवापि का साम्राज्य स्थापित करना

क्या है कल्कि जी का मुख्य दो विश्वस्तरीय मिशन His global mission ?

कल्कि जी का मुख्य दो विश्वस्तरीय मिशन His global mission निम्नलिखित हैं :-
(1) फिर से आध्यात्मिक ज्ञान को पृथ्वी पर स्थापित करना, सच्चे धार्मिक परंपराओं को स्थापित करना तथा मानव जाति के उत्थान के लिए प्रामाणिक ग्रंथों को पुनर्जीवित करना
(2) राजा के वेश में छिप कर रहने वाले कोटि - कोटि डाकुओं का संहार करना, पापी, दुष्ट, म्लेच्छ, बर्बर इत्यादि का समूल विनाश करना तथा सत्य युग को लेकर पहले की तरह धर्म की स्थापना करना 

संसार का नाश करने से पहले क्या होंगे कल्कि जी की पाँच 5 निशानियाँ ?

(1)  लोग मांस, मदिरा का सेवन करेंगे, स्त्री करवा बोलेगी (मिर्ची की तरह बोलेगी) ।  स्त्री नकारात्मक स्वाभाव (extremely negative nature) वाली होगी।  वे अपने पति  का कहना नहीं मानेगी । बिना अमावश्या का सूर्य ग्रहण होगा । व्यभिचार बढ़ जाएगा ।

(2)  लोगों की सामान्यतः आयु 16 वर्ष की हो जाएगी । लड़कियाँ  7 - 8 वर्ष में बच्चा जनने लगेगी । पति - पत्नी आपस के सम्बन्ध से खुस नहीं रहेंगे । लोग  मंदिरों में श्रद्धा नहीं रखेंगे  । तारों की चमक बहुत कम हो जाएगी । पृथ्वी पर गर्मी बहुत बढ़ जाएगा ।

(3) उत्तर प्रदेश के मथुरा-वृन्दावन के बोर्डर पर (गौरी मठ के पास) स्थित शम्भल ग्राम में भगवान
 कल्कि अवतार लेंगे । वे दुष्ट  एवं पापियों का विनाश करने के लिए भूमंडल पर सर्वत्र घूमेंगे । यह समय सत्य युग के प्रारम्भ का समय होगा ।

(4) भगवान कल्कि अपने माता - पिता का चौथा पुत्र होंगे । उनके पिता का नाम विष्णुयश तथा माता का नाम सुमति होगा ।

(5) भगवान कल्कि निर्मल एवं दिव्य स्वाभाव वाले होंगे । वे अष्ट सिद्धियों से संपन्न होंगे  । वे सफ़ेद घोड़े पर सर्वत्र विचरण करेंगे । क्रोध के कारण उनके शरीर का रंग काला होगा । वे लाल वस्त्र पहनना पसंद करेंगे । युद्ध के समय उनके हाथ में तलवार होगा ।

क्या है कल्कि जी के आने के सम्बन्ध में मुख्य 7 भविष्यवाणियाँ ?

(1) ईश्वर ने कहा कि मैं अवतार लेकर कब आऊँगा कोई भी मनुष्य सही - सही भविष्यवाणी नहीं कर सकेगा क्योंकि कलियुग में मैं छिप कर रहूँगा।
(2) कल्कि आवतार के आने के उस घड़ी के विषय में कोई नहीं जानता, न स्वर्ग के दूत और न पुत्र परन्तु केवल पिता जनता है। देखो, जागते रहो और प्रार्थना करते रहो, क्योंकि तुम नहीं जानते कि वह समय कब आएगा ?
   
(3) यह घटना  इस तरह  तुरत घट जाएगी जिसकी तुम उम्मीद भी नहीं कर सकते हो । इसलिए तुम भी तैयार रहो, क्योंकि जिस घड़ी के विषय में  तुम सोचते भी नहीं होगे, उसी घड़ी कल्कि अवतार आजाएगा ।   

(4) इतिहास और पौराणिक कथा को देखो, भगवान राम और भगवान कृष्ण के आने के बारे में कोई नहीं जाना। भगवान बुद्ध के बारे में कोई भी नहीं जाना कि ये भगवान विष्णु के अवतार हैं। उसी तरह भगवान कल्कि अवतार के अवतार लेने के बारे में कोई नहीं जान सकता।  
   
(5) तुम या कोई भी मनुष्य  भगवान कल्कि को सत्यापित (Verify) नहीं कर सकता। भगवान कल्कि भविष्यवाणी को मिटाने अथवा झुठलाने नहीं आए हैं । 

(6) कल्कि अवतार को आने का अर्थ है म्लेच्छ, दुष्ट, और पापियों का समूल विनाश और फिर से सतयुग की रचना। 

(7)  जब संसार काफी गन्दा और अधर्मियों से भर जाएगा तब भगवान् कल्कि जी म्लेच्छ, दुष्ट, और पापियों का समूल विनाश करने और धर्म की  स्थापना करने के लिए धरती पर आएँगे और धर्मी लोगों को बचाकर फिर से सतयुग को  लाएँगे। 

क्या कल्कि अवतार चुप चाप (छिप के) आरहे हैं ?

श्रीमदभागवतम  महा पुराण में महर्षि वेद व्यास जी ने कहा कि भगवन कल्कि कलियुग में छिप कर रहेंगे । धर्मशास्त्र यह भविष्यवाणी करता है कि कल्कि आवतार के आने के घड़ी के विषय में कोई नहीं जानता, न स्वर्ग के दूत और न पुत्र परन्तु केवल पिता जनता है। देखो, जागते रहो और प्रार्थना करते रहो, क्योंकि तुम नहीं जानते कि वह समय कब आएगा ? कल्कि अवतार कब आजायेंगे इसके बारे में तुम उम्मीद भी नहीं कर सकते हो । इसलिए तुम भी तैयार रहो, क्योंकि जिस घड़ी के विषय में  तुम सोचते भी नहीं होगे, उसी घड़ी कल्कि अवतार आ जायेंगे ।
इतिहास और पौराणिक कथा को देखो, भगवान राम और भगवान कृष्ण के आने के बारे में कोई नहीं जाना। भगवान बुद्ध के बारे में कोई भी नहीं जाना कि ये भगवान विष्णु के अवतार हैं। उसी तरह भगवान कल्कि अवतार के अवतार लेने के बारे में कोई नहीं जान सकता। धर्मशास्त्र में ईइश्वर ने कहा कि "देखो, मैं चोर कि तरह आऊँगा ।" धर्मशास्त्र साफ़ - साफ़ शब्दों में भविष्यवाणी करता है कि भगवान कल्कि का आविर्भाव गुप्त रूप से होगा । 

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