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कल्कि पुराण

कल्कि पुराण

Kalki Puran - कल्कि पुराण 


(ईश्वर पुत्र अरुण)

kalki puran

Kalki Puran - कल्कि पुराण 

कलियुग के प्रथम चरण में लोगों का आधार शराब, माँस, मूल, फल जीवन का आधार हुआ । लोग भगवान कृष्ण की निन्दा करने वाले हो गए । कलि के दूसरे चरण में  लोग भगवान (श्री कृष्ण) का नाम तक नहीं लेते, तीसरे चरण में वर्णसंकर संतानों की उत्पत्ति हुई और चौथे चरण में सभी वर्ण समाप्त हो कर लोग एक ही वर्ण के रह गए। जाती-पाति  ही कुछ न रही, लोग सत्कर्म और ईश्वर की आराधना को भूल गए। स्वाध्याय, स्वधा, स्वाहा, वषट, ॐकारादि के लुप्त हो जाने पर सभी निराहार देवतागण ब्रह्मा जी के शरण में गए । देवतागण क्षीण, दीन, चिन्ताशील पृथ्वी को आगे करके ब्रह्म लोक में गए । उन्होंने ब्रह्म लोक को  वेद ध्वनि से गूंजता हुआ पाया । यज्ञ के धुंएँ से भरे, मुनिश्रेष्ठों से सेवित, सोने की बनी वेदी में प्रज्वलित दक्षिणाग्नि, यज्ञ के खम्भों से सजे, वन के फूलों और फलों से परिपूर्ण उद्यान, जहाँ सरोवर में वायु के झकोरों से चंचल वेलों के बीच फूलों पर बैठे सारस और हंसों द्वारा मधुर स्वर से मानो प्रणाम, आह्वान, सत्कार से पथिकों का स्वागत किया जा रहा  है।
शोकाकुल देवतागण अपने स्वामी इन्द्र के साथ ब्रह्मा जी की आज्ञा से अपने कार्य यानि कलि द्वारा पैदा किए गए अपने दुखों को बताने के लिए (निवेदन करने के लिए) ब्रह्म सदन में अन्दर गए। (कल्कि पुराण प्रथम अंश, प्रथम अध्याय, श्लोक 37 से 44) 
देवतागण ब्रह्मा जी के कहने पर कलि के दोष से होने वाले धर्म की हानि का समाचार आदर पूर्वक ब्रह्मा जी को बताया । दुखित देवताओं के वचन सुन कर ब्रह्मा जी ने उनसे कहा कि भगवान् विष्णु को प्रसन्न करके  हम तुम्हारी मनोकामना पूरी करेंगे। यह कहकर देवताओं को साथ लेकर ब्रह्मा जी गोलोकवासी श्री विष्णु भगवान के पास गए । वहाँ स्तुति कर देवताओं के मन की कामना उन श्री विष्णु भगवान से निवेदित की । कमल जैसे नेत्र वाले भगवान विष्णु देवताओं के दुःख की कथा सुन कर, ब्रह्मा जी से इस प्रकार बोले - हे विभो ! आपके कहने के अनुसार शम्भल ग्राम नमक स्थान में विष्णुयश के यहाँ सुमति नाम की उनकी पत्नी के गर्भ से मैं जन्म लूंगा । (सुमति मेरी माता होगी) हे देव ! हम चारो भाई मिलकर कलि का नाश करेंगे। हमारे भाई बंधू के रूप में आप देवतागण भी अपने अंश से अवतार लेंगे। हमारी यह प्रिय लक्ष्मी जी सिंहल देश में राजा वृह्द्र्थ की पत्नी कौमुदी के गर्भ से पद्मा नाम से जन्म लेगी । मरू और देवापि नामक दो राजाओं को भी मैं पृथ्वी पर स्थापित करूँगा । हे देवतागण, तुम अपने - अपने अंश से पृथ्वी पर जाकर अवतार लो । हे ब्रह्मा जी , मैं फिर सतयुग को लाकर और पहले की तरह धर्म की स्थापना करके, कलिरूपी सर्प का नाश कर अपने लोक यानि वैकुण्ठ को वापस जाऊंगा ।  (कल्कि पुराण/Kalki Puran, प्रथम   अंश, द्वितीय अध्याय, श्लोक 1 से 8) 
हे ऋषिगण, अपनी महिमा से महिमान्वित भगवान विष्णु इस प्रकार स्वयं अवतार लेने को उद्द्यत शम्भल ग्राम में गए । वहाँ गृह, नक्षत्र, राशि आदि सब विष्णुयश के द्वारा उनकी पत्नी सुमति के गर्भ में भ्रूण रूप में आये ।

भगवान कल्कि जी का अवतार कब हुआ ?

वैशाख मास की शुक्ल पक्ष की द्वादशी तिथि को भगवान विष्णु ने पृथ्वी पर अवतार लिया । माता - पिता ने पुलकित होकर इस पुत्र को पैदा होते देखा ।  (कल्कि पुराण/Kalki Puran, प्रथम   अंश, द्वितीय अध्याय, श्लोक 10 - 11, 15) Kalki Comes in 1985 पुस्तक में यह भविष्यवाणी किया गया है कि वैशाख मास की शुक्ल पक्ष की द्वादशी तिथि को सन 1985 में  भगवान विष्णु ने शम्भल ग्राम में अवतार लिया ।

वैशाख मास के शुक्ल पक्ष की द्वादशी तिथि को भगवान कल्किभारत के पूण्य भूमि पर अवतार लिए । (कल्कि पुराण/Kalki Puran 1 ;  2 :15 तथा कल्कि कम्स  नाइनटीन  एट्टी फाइव पुस्तक, अध्याय  - 3 )  कल्कि कम्स  नाइनटीन एट्टी फाइव पुस्तक, अध्याय  - 3  के अनुसार सन 1985  में वैशाख मास के शुक्ल पक्ष की द्वादशी तिथि को  उत्तर भारत के शम्भल ग्राम में, विष्णु यश के घर भगवान कल्कि / Lord Kalki जी ने अवतार ग्रहण किया । सन 1985  में वैशाख मास के शुक्ल पक्ष की द्वादशी  तिथि 2  मई  को पड़ता है (अर्थात 2 May 1985) , इस कारण भगवान कल्कि  2 May 1985 को भारत के पूण्य भूमि  शम्भल ग्राम में अवतार ग्रहण किए ।

भगवान कल्कि जी का अवतार कहाँ  हुआ ?

धर्मग्रन्थ के  अनुसार भगवान कल्कि उत्तर भारत के शम्भल ग्राम में श्रेष्ठ ब्राह्मण (Group of  Brahman) विष्णुयश के  घर अवतार लेंगे । उत्तर भारत में दो शम्भल ग्राम है - एक मुरादाबाद में तथा दूसरा मथुरा और वृन्दावन के बोर्डर पर (गौड़ी मठ के पास) । मुरादाबाद शम्भल में 98 % मुस्लिम हैं तथा 2 % में अन्य जातियाँ निवास करती है तथा यहाँ बहुत कम ही ब्रह्मण परिवार हैं। यहाँ के अधिकतर लोग इस्लाम धर्म को मानने वाले हैं और भगवान कृष्ण  पूजा करने वाले लोग नहीं के बराबर हैं । अतः इस शम्भल में Group of  Brahman की कल्पना ही नहीं किया जासकता है । मथुरा और वृन्दावन के बोर्डर पर (गौड़ी मठ के पास) जो शम्भल है वहाँ पार  ब्रह्मणों की संख्या बहुत ही अधिक  लोग हैं तथा यहाँ के अधिकतर लोग भगवान कृष्ण की पूजा करने  वाले हैं । अतः यही शम्भल भगवान कल्कि जी का अवतार स्थान है। संक्षिप्त भविष्यपुराण 4;5:27-28 ; प्रतिसर्ग पर्व, चुतुर्थ खंड पेज नो 331 के अनुसार भगवान श्री विष्णु ने कहा कि  मैं देवताओं के हित और दैत्यों  के विनाश के लिए कलियुग में अवतार लूंगा और कलियुग में भूतल पर स्थित सूक्ष्म रमणीय दिव्य वृन्दावन में रहस्यमय एकांत - क्रीड़ा करूँगा। घोर कलियुग में सभी श्रुतियाँ गोपी के रूप में आकर रासमंडल में मेरे साथ रासक्रीड़ा करेगी। कलियुग के अंत में राधा जी के प्रार्थना को स्वीकार करके मैं रहस्यमयी क्रीड़ा  को समाप्त कर के कल्कि के रूप में अवतीर्ण होऊंगा  । धर्मशास्त्र के अनुसार भगवान कल्कि / Lord Kalki 2 May 1985 को भारत के पूण्य भूमि पर  मथुरा और वृन्दावन के बोर्डर पर (गौड़ी मठ के पास) जो शम्भल है वहाँ  पर अवतार लिए । 



कृष्णा  अवतार  की तरह  इस बार  भी  कल्कि जी चार भुजा में अवतार लिए, लेकिन ब्रह्माजी उसी समय वायु देव को भेज कर कल्कि भगवान को यह संदेश भिजावाए कि उन्हें  साधारण मनुष्य रूप में रहना है। ब्रह्माजी का संदेश पाकर कल्कि भगवान मनुष्य रूप में प्रकट हो  गए ।  यह लीला जब उनके माता-पिता देखे तो वो हैरान हो गए । उन्हें ऐसा लगा कि किसी भ्रमवश उन्होंने अपने पुत्र को चार भुजा में देखा था।

भगवान कल्कि जी का माता - पिता कौन  ?

भगवान कल्कि / Lord Kalki  के माता  का नाम सुमति और पिता का नाम विष्णुयश है (Kalki Puran / कल्कि पुराण 1 ;2 :4 ) श्रीमदभागवतम महा पुराण 12 ;2 : 18, श्रीमद्देवी भागवत, स्कन्ध- 1 पेज न ० 660, श्री विष्णु पुराण, चतुर्थ अंश, पेज न ० 301, मत्स्य पुराण,अध्याय - 47, महाभारत, वन पर्व, शीर्षक "काली धर्म और कल्कि अवतार"  पेज न ० 311, ब्रह्मवैवर्त पुराण, प्रकृति खण्ड, पेज न ० 115 में भगवान कल्कि जी के पिता के नाम की भविष्यवाणी है। केवल कल्कि पुराण ;2 :4 में ही भगवान कल्कि जी के माता - पिता के नाम की भविष्यवाणी किया गया  है।          

विष्णुयश कौन ?

धर्मग्रन्थों में भगवान कल्कि जी के पिता जिस विष्णुयश के बारे में भविष्यवाणी की गई है वे वास्तव में स्वयम्भू मनु के अवतार हैं । पद्म पुराण 1 ; 40 :46 ,  उत्तरखंड,  शीर्षक " रामावतार की कथा -  जन्म का प्रसंग" पेज नंबर - 949 के अनुसार नैमिषारण्य में  गोमती  किनारे तप करके भगवन विष्णु जी को प्रसन्न किए और यह वरदान मांगे कि आप तीन जन्मों तक  मेरे पुत्र के रूप में जन्म लीजिए  ।  इसलिए स्वयम्भू मनु के तीन जन्मों तक भगवान विष्णु उनके पुत्र के रूप में अवतार लिए।   उनका पहला जन्म हुआ  -  राजा दशरथ के रूप में और भगवान  विष्णु राम नाम से उनके पुत्र के रूप में जन्म लिए ।  उनका दूसरा  जन्म हुआ  - वासुदेव जी के रूप में और भगवान  विष्णु  कृष्ण  नाम से उनके पुत्र के रूप में जन्म लिए । उनका तीसरा   जन्म हुआ  - विष्णुयश  जी के रूप में और भगवान  विष्णु  कल्कि   नाम से उनके पुत्र के रूप में जन्म लिए। 

भगवान कल्कि जी का गुरुदेव कौन ?


Lord Kalki / भगवान कल्कि जी जन्म लेते ही वामन अवतार की तरह ही जल्दी - जल्दी बड़ा होने लगे  । उनके पिता पढने योग्य देख कर कल्कि जी का उपनयन संस्कार किए और महेन्द्र पर्वत निवासी परशुराम जी कल्कि जी को विद्याध्ययन  लिए  वाल्यावस्था में ही महेन्द्र पर्वत पर ले गए। शशिध्वज की पुत्री रमा से शादी करने के बाद कल्कि जी 9 (नौ) गुरु बनाए जिनका नाम निम्नलिखित है (कल्कि पुराण / Kalki Puran 3,6:8 - 9)   :- 
1. कृपाचार्य, 2. परशुराम,  3. वशिष्ट, 4. वेद व्यास, 5. धौम्य, 6. अकृतव्रण,  7. अश्वत्थामा, 8.  मधुछन्द और 9. मन्दपाल।  

भगवान कल्कि किन से अस्त्र - शस्त्र प्राप्त किए ?


भगवान कल्कि जी भगवान शंकर जी को संतुष्ट किए, जिनकी बेलपत्र और जल से पूजा होती है; और भगवान शंकर जी खुश होकर कल्कि जी को रत्नसरु नामक तलवार, बहुरूप धारी गरुड़-अश्व और सब कुछ जानने वाला तोता दिया । महेन्द्र पर्वत पर ही कल्कि जी दुर्गा जी की पूजा करके संतुष्ट किए और दुर्गा जी खुश होकर उन्हें करवाल दी । इसके बाद परशुराम जी से आज्ञा लेकर भगवान कल्कि शम्भल ग्राम  के लिए प्रस्थान किए । भगवान कल्कि जिस समय शम्भल ग्राम के लिए प्रस्थान किए उसी समय 26 दिसम्बर 2004 में वे समुद्र में दिव्यास्त्र का पहली बार प्रयोग किए और समुद्र में सुनामी लाकर पूरी दुनिया को चेतावनी दिए । पहली बार उन्होंने जल के द्वारा कुछ निश्चित लोगों का न्याय किए । समुद्र का जल समुद्र से बहार निकल कर पृथ्वी पर आया  और बहुत बड़ी  संख्या में लोगों को न्याय के लिए समुद्र में ले गया । न्याय करने के बाद उनके मृतक शरीर को संसार में वापस कर दिया । इस तरह भगवान कल्कि जी युवा रूप में सबसे पहले न्याय करके अपना कार्य शुरू किए । जिन - जिन देशों में 26 दिसम्बर 2004  में न्याय करने के लिए समुद्र में सुनामी आया था उन देशों के नाम निम्नलिखित हैं :-   बांग्लादेश, इंडिया, मलेशिया, थाईलैंड, सिंगापुर , मालदीप, इंडोनेशिया, अंडमान  एंड  निकोबार  इसलैंड्स, श्रीलंका, सोमालिया,  म्यांमार   (बर्मा) , तंज़ानिया, सेचेल्स,  साउथ  अफ्रीका, यमन,   केन्या, मेडागास्कर  इत्यादि । 



भगवान कल्कि NEWHEAVEN / नारायणा-गृह / अभय धाम कब आए ?


विद्द्याध्ययन समाप्त करके सबसे पहले भगवान कल्कि दिनांक  29th नवम्बर  2005 को न्यू हैवन में आए । उस समय में वे ज्योति रूप में थे । वे हम लोगों के साथ पूरी रात न्यू हैवन (नारायणा-गृह / अभय धाम) में रहे । जैसे ही वे न्यू हैवन (नारायणा-गृह / अभय धाम) में प्रवेश किए वैसे ही ॐध्वनि और शंख की आवाज न्यू हैवन (नारायणा-गृह / अभय धाम) में गूंजने लगी और यह आवाज पूरी रात गूंजती रही । सुबह होते ही यह आवाज बंद हो गई । 



भगवान कल्कि विद्द्याध्ययन समाप्त करके शम्भल कब लौटे ?




भगवान कल्कि शम्भल ग्राम पहुँच कर विधिपूर्वक पिता, माता तथा भाइयों को नमस्कार कर परशुराम जी के द्वारा कही गई उन सब बातों का वर्णन किया । आगे शंकर जी के वरदान की बात भी कह कर शुभ कथा कहने लगे । गर्ग्य, भर्ग्य तथा विशाल आदि इस वृतान्त को सुनकर बहुत प्रसन्न हुए और शम्भल ग्राम निवासियों में एक दूसरे से कह कर इस कथा का प्रचार हुआ । शम्भल ग्राम निवासियों के मुख से यह संवाद सुन कर विशाखयूप (Political Leader) समझ गए की कलि को समाप्त करने के लिए हरि भगवान ने पृथ्वी पर अवतार ले लिया है । लोगों को प्रिय लगने वाले  विशाखयूपराज (Political Leader) शम्भल ग्राम में विष्णु जी के अंश से आविर्भूत कल्कि जी का अवतार रूप देखने के लिए चल पड़े । राजा विशाखयूप ने नगर से बहार निकल कर देखा कि भगवान कल्कि पधार रहे हैं, उनके अंग अंग से कान्ति छिटक रही है, कवी, प्राज्ञ और सुमन्त उनके आगे आगे चल रहे हैं , गर्ग्य, भर्ग्य तथा बहुत बड़ी संख्या में बन्धु बान्धव उनको चारों ओर से घेरे हुए हैं । वे इस प्रकार लग रहे हैं मानो तारों के बीच में चन्द्रमा । (कल्कि पुराण/Kalki Puran  1;3:21-33 और  36-39)

भगवान कल्कि जी की शादी कब और किसके साथ ?

लक्ष्मी जी सिंहल देश में राजा बृहद्रथ की पत्नी कौमुदी के गर्भ से पद्मा नाम से जन्म ली। (कल्कि पुराण / Kalki Puran 1 ;2 : 6) परशुराम जी से दक्षिणा में किए गए वादा  के अनुसार वे श्रीलंका के कारूमति शहर, जो अरनी नदी के पास है, वहाँ गए और दिनांक 4 अप्रैल 2006 को पद्मावती से शादी कर उसी दिन अपनी माता सुमति से आशीर्वाद लेने गुजरात आए । उनकी माता सुमति 14 वर्ष से मौन व्रत धारण किए हुए थी । 4 अप्रैल 2006 को ही माता सुमति अपना मौन व्रत खोली । माता सुमति 2006 को ही एक बहुत बड़ा सभा का आयोजन  की और उस सभा में संत, प्रतिष्टित लोग एवं सामान्य लोगों को भी आमंत्रित की । उस सभा में वे भगवन कल्कि के बारे में घोषणा  की लेकिन तुरंत बाद ही वे इसे छिपा ली क्योंकि उस समय भगवान कल्कि अपने गुरुदेव परशुराम जी को दक्षिणा नहीं चुकाए थे । भगवान कल्कि जी को छिपकर रहने का यही  कारण था । इसलिए 4th अप्रैल ’ 2006 का दिन भगवान के भक्तों  के लिए ख़ुशी का दिन माना जाता है।  इसके बाद पद्मावती को हनुमान जी के संरक्षण में रख कर वे विनाश कार्य करने हेतु प्रस्थान  किए । 
               

भगवान कल्कि जी का अंतिम युद्ध कहाँ और किसके साथ ?

भगवन कल्कि जी सबसे अंत में भल्लाट नगर, गंडकी नदी के पास उत्तरी नेपाल में शशिध्वज के साथ युद्ध करेंगे ।  (कल्कि पुराण / Kalki Puran 3 ;8 :1) शशिध्वज बुद्धिमान, लंबे - चौड़े, महातेजवान, कृष्ण भक्त, महाबलवान राजा होंगे। (कल्कि पुराण/ Kalki Puran 3 ; 8 :3) शशिध्वज की पत्नी सुशान्ता  भगवान् विष्णु का व्रत रखने वाली होगी। (कल्कि पुराण/ Kalki Puran 3 ; 8 :4) इस  युद्ध में दिव्यास्त्र Misile का भी  प्रयोग होगा। जैसे ब्रह्मास्त्र, पर्वतास्त्र, मेघास्त्र, वायव्यास्त्र, अग्नेयास्त्र, गरुड़ास्त्र, पन्नगास्त्र इत्यादि। इस कारण इस  युद्ध में बहुत से लोग मारे जाएँगे।   

रमा के साथ भगवान कल्कि जी की शादी कब ?

           
भगवन कल्कि जी सबसे अंत में भल्लाट नगर, गंडकी नदी के पास उत्तरी नेपाल में शशिध्वज के साथ युद्ध करेंगे ।इस युद्ध में भगवान् कल्कि जी मूर्च्छहो जाएँगे और शशिध्वज उन्हें उठाकर अपने साथ घर ले जाएँगे (कल्कि पुराण Kalki Puran 3; 9 :15, 17) सुशान्ता भगवान् कल्कि जी से कहेंगे कि आपसे मेरा कोई शत्रु भाव नहीं है।  यदि शत्रुभाव रहता तो क्या आपको अपने साथ अपने स्थान में लेसकता था ? हे प्रभु ! जगत जिसका सेवक और मित्र रूप है, जिसके दर्शन से किसकी के प्रति शत्रुता नहीं रह जाती, उसका काया साक्षात् सबन्ध से कहीं कोई शत्रुता हो सकता है ?  पृथ्वी पर रहने वाले, स्वर्ग में रहने वाले और रसातल में रहने वाले - मनुष्य, सुर, असुर और नागों में भला ऐसा कौन है जो नारायण कल्कि जी की सेवा नहीं करता ?  (कल्कि पुराण / Kalki Puran 3 ;10 :17 - 19) शशिध्वज भगवान् कल्कि जी से कहेंगे कि "मैंने युद्ध करके आपके शरीर पर प्रहार किया है।  आप हमारी आत्मा हैं।  मैंने काम क्रोधादि रोग के वशीभूत होकर आपसे दुश्मनी की है इसलिए मुझे दंड दीजिये। भगवान् कल्कि जी जबाब देंगे की आपने ने तो मुझे जीत लिया है। इसके उपरांत राजा शाशिध्वज लड़ाई के मैदान से बुला कर कल्कि जी की शादी रमा के साथ कर सुचारुरुपसे कर  देंगे। (कल्कि पुराण / Kalki Puram 3 ; 10 : 24  - 34)  
शेष भाग कल .........      
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