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Wednesday, 12 October 2016

ईश्वर पुत्र के वचन

मेरे वचन तुम्हें ज्ञान और प्रकाश की आत्मा देंगे तब तुम्हारे मन की आँखें ज्योर्तिमय हो जाएगा और तुम जान लोगे कि तुम्हारे परम पिता जब तुम्हें बुला रहे हों तब कैसी आशा होती होती है और तुम्हारे मन में उनके पास जाने की कैसी तमन्ना होती है। उस समय एक पुत्र को अपने पिता के पास जाने की इस तरह तड़प होती है  - काश ! मेरे पंख होते, तो मैं उड़के चला जाता। 
एक बात मैं तुम्हें याद दिलाना  चाहता हूँ कि परमेश्वर पर विश्वास करना तुमने स्वयं सिखा  है मैंने नहीं सिखाया और परमेश्वर से प्रेम करना भी तुमने स्वयं ही  सिखा, मैंने तुम्हें सिखाया नहीं। विश्वास से भटक कर और परमेश्वर से प्रेम करना छोड़कर ही तुमने खुद को दुःख और विपत्ति  की दरिया में डाल दिए हो। बहुत सारे  लोगों ने ब्रह्म विद्या को सुना  और स्वीकार किया किन्तु कुछ लोग सांसारिक लोगों के संपर्क में आकर विश्वास से भटक गए। उस परमेश्वर से अलग हो गए जो सुख के लिए आपको सब कुछ देता है। ऐसे लोगों में से कुछ को तो  काल ने निगल लिया और कुछ दुःख की भट्ठी में पड़े चिल्ला रहे हैं - ईश्वर पुत्र अरुण        
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