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परमेश्वर की प्रार्थना क्यों करें ?

परमेश्वर की प्रार्थना इसलिए करने की आवश्यकता है क्‍योंकि जो कोई मांगता है, उसे मिलता है, जो ढूंढ़ता है, वह पाता है और जो खटखटाता है, उसके लिये खोला जाएगा।परमेश्वर ने कहा कि मुझ से प्रार्थना कर और मैं तेरी सुनकर तुझे बड़ी -बड़ी और कठिन बातें बताऊंगा जिन्हें तू अभी नहीं समझता। इसलिए मैं चाहता हूं, कि हर जगह व्यक्ति  बिना क्रोध और  बिना विवाद के पवित्र हाथों को उठाकर प्रार्यना किया करो । इसलिये मैं तुम से सच कहता हूं, कि जो कुछ तुम प्रार्थना करके मांगते हो  तो विश्वास कर लो कि तुम्हें मिल गया, और वह तुम्हारे लिये हो जाएगा। तुम सांझ को, भोर को और  दोपहर को, तीनों पहर परमेश्वर को धन्यवाद दो तब  वह परमेश्वर तेरा शब्द सुन लेंगे । तुम्हारे  पुकारने से पहिले ही वे  तुमको   उत्तर देंगे , और तुम्हारे  मांगते ही वे तुम्हारी  सुन लेंगे । परन्‍तु जब तू प्रार्थना करो , तो अपनी कोठरी में जाओ  और द्वार बन्‍द कर के अपने परमेश्वर से जो गुप्‍त में है प्रार्थना कर और तब तेरा परमेश्वर जो गुप्‍त में देखता है, तुझे प्रतिफल देंगे । प्रार्थना करते समय अन्यजातियों की नाई बक बक न करो क्‍योंकि वे समझते हैं कि उनके बहुत बोलने से उन की सुनी जाएगी। परमेश्वर ने कहा कि यदि तुम मुझ में बने रहो, और मेरी बातें तुम में बनी रहें तो जो चाहो मांगो और वह तुम्हारे लिये हो जाएगा। मैं तुम से सच कहता हूं कि मांगो, तो तुम्हें दिया जाएगा; ढूंढ़ों तो तुम पाओगे; खटखटाओ, तो तुम्हारे लिये खोला जाएगा। क्‍योंकि जो कोई मांगता है, उसे मिलता है; जो ढूंढ़ता है, वह पाता है; और जो खटखटाता है, उसके लिये खोला जाएगा। पर विश्वास से मांगो , और कुछ सन्‍देह न करो । क्‍योंकि सन्‍देह करने वाला समुद्र की उस लहर के समान है जो हवा से बहती और उछलती है। ऐसा मनुष्य यह न समझे, कि मुझे परमेश्वर  से कुछ मिलेगा। हे लोगों ! हर समय उन  पर भरोसा रखो, उनसे अपने मन की बातें खोलकर कहो क्योंकि  परमेश्वर तुम्हारा  शरणस्थान है। तुमने हमारी नहीं सुना तौभी मैं तुमसे कहता हूँ कि तुम अभी भी सुनो, उपवास के साथ रोते-पीटते अपने पूरे मन से फिरकर परमेश्वर के  पास आओ - ईश्वर पुत्र अरुण 
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