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Friday, 9 September 2016

दिल का दरबाजा खोलो

ईश्वर ने कहा कि तुम ईश्वर के लिए दिल का दरबाजा खोल कर देख, मैं द्वार पर खड़ा हुआ खटखटाता हूँ। यदि कोई मेरा शब्द सुनकर द्वार खोलेगा, तो मैं उसके पास भीतर आकर उसके साथ भोजन करूँगा। (धर्मशास्त्र, प्रकाशितवाक्य 3;20) ईश्वर आपके डायनिंग हॉल में आपके साथ भोजन करने के लिए डायनिंग टेबल पर बैठेंगे और आपको शान्ति प्रदान करेंगे क्योंकि सारा झगड़ा भोजन करने के वक्त ही होता है। पत्नी कहती है कि तुमने कितना कमा कर लाया बता जो मैं तुमको अच्छा - अच्छा भोजन बनाकर दूँ। तुमने ये नहीं किया, तुमने वो नहीं किया, तुम मेरी नहीं सुने, तुमने परिवार के लिए कुछ नहीं सोचा, तुमने  मेरा बात नहीं माना । भोजन के समय ही सब लड़ाई होती है और शान्ति ख़त्म हो जता है। यदि मैं तुम्हारे पास तुम्हारे  डायनिंग टेबल पर भोजन करने के लिए बैठूंगा तो झगड़ा के स्थान पर तुम्हें मैं शान्ति दूंगा। तुम अपने ईश्वर की उपासना करो तब वे  तेरे अन्न जल पर आशीष देंगे और वे तेरे बीच में से सब रोगों को दूर करेंगे। (धर्मशास्त्र, निर्गमन 23:25) ईइश्वर ने कहा कि मैं तेरा इलाज करके तेरे घावों को चंगा करूँगा।  (धर्मशास्त्र, यिर्मयाह 30:17) मैं तुम्हारे शोक को दूर करके तुम्हें आनंदित करूँगा, मैं तुम्हें शान्ति दूंगा और दुःख के बदले आनंद दूंगा। तुम फिर उदास न होगे, उस समय तुम्हारी कुमारियाँ नाचती हुई हर्ष करेगी, जवान और बूढ़े एक साथ आनन्द  करेंगे - ईश्वर पुत्र  (आदिश्री अरुण )    
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