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Tuesday, 13 September 2016

परमेश्वर की मुख्य आज्ञा

मैं निश्चित जानता हूं, कि न मृत्यु, न जीवन, न स्‍वर्गदूत, न प्रधानताएं, न वर्तमान, न भविष्य, न सामर्थ, न ऊंचाई, न गहिराई और न कोई और सृष्‍टि, हमें परमेश्वर के प्रेम से अलग कर सकेगी। परमेश्वर ने आदेश देते हुए कहा है कि - मैं तुम्हें एक नई आज्ञा देता हूं, कि तुम एक दूसरे से प्रेम रखो, जैसा मैं ने तुम से प्रेम रखा है, वैसा ही तुम भी एक दुसरे से प्रेम रखो। यदि तुम मुझ से प्रेम रखते हो, तो मेरी आज्ञाओं को मानोगे। यह जान लो कि विश्वास, आशा, प्रेम ये तीनों स्थाई हैं, पर इन में सब से बड़ा प्रेम है। उस ने यह भी कहा कि  तू  अपने परमेश्वर से अपने सम्पूर्ण  मन से, अपने सारे प्राण और अपनी सारी बुद्धि के साथ प्रेम रख। सबसे बड़ी और मुख्य आज्ञा तो यही है। यदि किसी को किसी पर दोष देने का  कोई कारण हो, तो एक दूसरे की सह लो, और एक दूसरे के अपराध को क्षमा करो, जैसे प्रभु ने तुम्हारे अपराध क्षमा किए, वैसे ही तुम भी क्षमा करो। और इन सब के ऊपर प्रेम को जो सिद्धता का कटिबन्‍ध है बान्‍ध लो। परमेश्वर ने कहा कि - जिस के पास मेरी आज्ञा है, और वह उन्‍हें मानता है, वही मुझ से प्रेम रखता है, और जो मुझ से प्रेम रखता है, उस से मेरा पिता प्रेम रखेगा, और मैं उस से प्रेम रखूंगा, और अपने आप को उस पर प्रगट करूंगा। आदेश देने के क्रम में परमेश्वर ने सबसे कहा कि - अपनी संपत्ति के द्वारा और अपनी भूमि की पहिली उपज दे देकर परमेश्वर  की प्रतिष्ठा करना... ऐसा करने से  तेरा भंडार भरे रहेंगे। आगे उन्होंने यह भी कहा कि सारे दशमांश मेरे भण्डार में ले आओ ताकि मेरे भवन में भोजनवस्तु रहे, और तुम्हारा परमेश्वर यह कहता है कि ऐसा करके मुझे परखो कि मैं आकाश के झरोखे तुम्हारे लिये खोलकर तुम्हारे ऊपर अपरम्पार आशीष की वर्षा करता हूं कि नहीं। परन्‍तु जब तू दान करे, तो जो तेरा दाहिना हाथ करता है, उसे तेरा बांया हाथ भी न जानने पाए। हे धरती पर रहने वाले लोगों ! परमेश्वर के कारण आनन्दित हो; और जिस पवित्र नाम से उसका स्मरण होता है, उसी नाम से उनका धन्यवाद करो । हर बात में परमेश्वर को धन्यवाद करो; क्‍योंकि तुम्हारे लिये परमेश्वर की योजना  में परमेश्वर की यही इच्‍छा है - ईश्वर  पुत्र अरुण  ईश्वर पुत्र अरुण  
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