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आपका दुःख आनंद में बदल जायेगा

आइए ! आज आप परमेश्वर के सन्देश को सुनिए। यदि आप इस सन्देश को सुन कर अनुसरण करेंगे तो आपका दुःख आनन्द में बदल जायेगा। आपके सोच बदल जायेंगे और ह्रदय अद्भुत प्रेम एवं आनन्द से भर जाएगा। कुछ दिन पहले राधिका नाम की एक औरत अपने पति के साथ मुझसे मिलाने आई थी। वह  बहुत ही उदास थी। वह वीमार थी। वह पड़ेशानियों में घिरी थी। उन दोनों ने प्रार्थना किया  " गुरु  ब्रह्मा, गुरु विष्णु गुरु देवो महेश्वरः । गुरु साक्षात् पार ब्रह्म तस्मै श्री गुरुवे नमः " और  मुझसे बड़ी  नम्रता से बिनती करके सरलता से पूछा   क्या हमें  स्वस्थ, आनन्दमय एवं आरामदेह जीवन  मिल सकता है ?  मैंने कहा कि हाँ, लेकिन तुम मेरे बातों का अनुसरण करोगी नहीं। उन दोनों ने  मुझसे बड़ी सरलता से कहा की हम दोनों आपके आदेश का पालन करेंगे ; आप कह कर तो देखिए । मैंने उन दोनों से कहा - 
(1) तुम दोनों परमेश्वर के आश्रय में रह कर सम्पूर्ण कर्म करो, (2) गुरुदेव एवं परमेश्वर का आज्ञाकारी बनो क्योंकि तुमने कहा - "गुरु   साक्षात् परम ब्रह्म " (3) प्रातः चार से छः वजे के बीच गुरु देव का वन्दना करके परमेश्वर का नाम जप एवं ध्यान करो (4) जो भी खाते हो, पीते  हो, जो भी कर्म करते हो, जो दान देते हो, जो  यज्ञ करते हो, जो हवन  करते हो - सब केवल इसी परमेश्वर में अर्पित करो (5) परमेश्वर के भवन में ईमानदारी से दशमांश दो तथा (6) नियत समय पर परमेश्वर के द्वारा दिया गया पर्व मनाओ। यदि ऐसा करोगे तो परमेश्वर तुम्हें बिछावन पर उलट कर रोग से चंगा करेंगे, वे तुम्हें आनन्दमय एवं आरामदेह जीवन देंगे। उन दोनों ने कहा कि  हम लोग आपके आदेश का पालन करेंगे और वे अपने घर चले गए।
दूसरे दिन सात बजे उठाने वाला व्यक्ति प्रातः साढ़े चार बजे सो कर उठा। फ्रेश होते - होते पांच बज गए। जब वह गुरु देव का वन्दना करता ही ठीक उसी समय उसके रिस्तेदार का फोन आगया। राधिका का पति अपने रिस्तेदार से बात करने लगा। साढ़े पांच बजने ही वाला था लेकिन उसका बात ख़तम ही नहीं हो रहा था। उसका पति खूब हँस - हँस कर बातें   कर रहा था। राधिका उठी और जोड़ से मोबाईल अपने पति के हाथ से छिनकर बिस्तर पर पटक दी। उसका पति देखते ही रह गया क्योंकि राधिका ऐसा व्यवहार अपने पति के साथ कभी नहीं की थी। फिर वह अपने पति देव से बोली - जब मैं दुःख में थी तब उस समय तुम्हारे रिस्तेदार का फोन प्रातः पांच  बजे आता था ? फिर गुरु देव की आज्ञा को भूल कर और परमेश्वर की पूजा को छोड़ कर रिस्तेदार को खुस करने लग गए ? इस प्रकार दोनों गुरु देव के आज्ञानुसार जीवन बिताने लगे। इस तरह उन दोनों का  दिल अपने गुरुदेव और परमेश्वर के लिए पूरी तरह भर चूका  है - यह कह कर रोती रही - रोती रही। जब परमेश्वर का प्रेम दिल में उड़ेला जता है तो दिल का सारा दुःख दूर हो जाता है और दुःख आनंद में बदल जाता है। आपसे मैं यही कहूंगा कि "मुझे इस बात का भरोसा है कि जिसने तुममें अच्छा काम आरम्भ किया है वही निज धाम जाने दिन तक तुम्हें रास्ता दिखलायेगा" - ईश्वर पुत्र अरुण               

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