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सफलता पाने के लिए तीन उपाय


आदिश्री अरुण :  सफलता पाने के लिए तीन उपाय चीज जरूरी है :
(१) सफलता पाने के लिए सबसे पहले एक लक्ष्य निर्धारित करना जरूरी है। जब लक्ष्य निर्धारित हो गया तब आप केवल उस लक्ष्य की  ओर आगे बढ़िए और उस  लक्ष्य को पाने के लिए आप अपनी पूरी ताकत झोंक दीजिए। यानि कि अपने लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए आपने  जीवन पर पोजिटिव इम्पेक्ट डालें ।
(२) लक्ष्य बनाने के बाद दूसरा स्टेप है लक्ष्य पर फोकस करना, और उसे प्राप्त करने के लिए कड़ी मिहनत करना। उस लक्ष्य को अपना जीवन बना लो, शारीर के हर हिस्से को उस विचार में डूब जाने दो और बाकी सभी विचारों को किनारे रख दो। यही सफल होने का तरीका है। चाहे जितनी भी विनाश (डिस्ट्रक्शन्स) आ जाएं आपको सिर्फ और सिर्फ अपना लक्ष्य प्राप्त करना है और कुछ नहीं । दूसरी चीजें चाहे कितनी भी आकर्षित करने वाली (attractive) क्यों न हों, उसमे कितना ही पैसा क्यों न मिले, कितनी ही शोहरत क्यों न मिले  वे नहीं चाहिए बल्कि  मुझे अपने जीवन  में सिर्फ और सिर्फ एक चीज चाहिए वह है मेरा लक्ष्य और कुछ नहीं, ऐसा आपके अन्दर की  सोच हो। इसके लिए आपको सुबह जल्दी उठना होगा और  रात को देर तक काम करना होगा। आपको अपना हर लम्हा लक्ष्य को पाने में लगाना होगा । आप विश्वास कीजिए  जब आप ऐसा करेंगे तो बड़े से बड़ा लक्ष्य भी आपको प्राप्त हो जाएगा ।
(३) तीसरी आखिरी चीज है जोश  यानि कि उत्साह। जोश का मतलब नाचना या गाना  नहीं है या फिर अपनी भावना को व्यक्त करना नहीं है बल्कि  अन्दर से कार्य करने के लिए हर हमेशा पूर्णरूप से  तैयार रहना है।   इसका मतलब यह है कि अपने लक्ष्य  को लेकर अन्दर से अच्छा महशुश करने से है, अपने प्रयास  को लेकर उत्साहित रहने से है और जब आदमी जोश में काम कर रहा होता है तो वो अत्यधिक प्रयास (extra efforts) करने  के लिए तैयार रहता है। अपने लक्ष्य को पाने के लिए अनदेखे रास्तों पर चलने को तैयार रहता है, वो सिर्फ पारंपरिक ज्ञान पर नही चलता बल्कि नए अभिनव तरीकों को अपनाने के लिए भी तैयार रहता है । उसका दिमाग यह सोचता रहता है कि मैं कैसे अपने उद्देश्य ( mission ) को पूरा  कर  सकता हूँ ? मैं कैसे अपने सपने  को वास्तविकता में  में बदल  सकता हूँ ? ना चाहते हुए भी परिस्थितियां  आपका एनर्जी लेवल, आपका मोराल डाउन कर सकते हैं । ये सबके साथ होता है। बस ज़रूरत यह  है कि आप फिर से उसी उत्साह, उसी एनर्जी  को वापस पा लें और ऐसा करना तब थोड़ा आसान होगा जब आप अपना लक्ष्य यह  देखकर नहीं बनाएं कि और लोग आपसे क्या चाहते हैं बल्कि ये सोचकर बनाएं कि आप खुद से अपने लिए क्या चाहते हैं?
इसके अलावा अपना उत्साह बरकरार रखने के लिए आप प्रेरित करने वाला पुस्तक , विडिओ और व्लॉग  का सहारा भी ले सकते हैं। आप जो भी करें, जैसे भी करें पर अपना जोश  बनाये रखें। जब आप  ऐसा करेंगे  तो बिना थके आपको आपके लक्ष्य के करीब पहुंचा देगा। 
अंत में एक और चीज जो मैं लक्ष्य  के बारे में कहना चाहता हूँ, वो यह है  कि अकसर लक्ष्य को समय में बॉंधने  की सलाह दी जाती है, अर्थात एक निश्चित समय में लक्ष्य को प्राप्त करना है,  एक निश्चित दिनों  में लक्ष्य को प्राप्त करना है । लेकिन आपका उद्देश्य  लक्ष्य को समय से बाँधना नहीं है बल्कि उनका रिश्ता आपके उत्साह के साथ होना चाहिए।


यह  महत्व  नहीं रखता की लक्ष्य का पीछा करते हुए 1 साल बीता या दो साल बीता या दस साल बीता। अगर उत्साह ज़िंदा है तो लक्ष्य को पाने की मेरी लड़ाई भी ज़िंदा है और जब तक मेरी लड़ाई ज़िंदा है तब तक मैं जीत सकता हूँ ।
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