Latest Post

Thursday, 11 August 2016

प्रेम की राह मुस्कान से शान्ति तक

अथाह प्रेम किसी डर  की वजह से नहीं होता है प्रेम  किसी  बाधा  को  नहीं  जानता   यह  अपनी  मंजिल तक  पहुँचने  के  लिए  बाधाएं  लांघ   जाता  है, बाड़े  फांद   जाता  है  और  दीवारें  बेध  देता  है अगर  आपके  अन्दर  बस  एक  मुस्कान  बची  है  तो  उसे  उन्हें  दीजिये  जिनसे  आप  प्रेम  करते  हैं  क्योंकि  मुस्कान  से शांति की शुरुआत होती है। केवल वो लोग जो कुछ भी नहीं बनने के लिए तैयार हैं वो प्रेम कर सकते हैं। आप उस तरह चलिए जिस तरह प्रेम आपको चलाये।आप उस तरह मत चलिए जिस तरह डर आपको चलाये आप जितने लोगों को चाहें उतने लोगों से प्रेम कर सकते हैं  इसका ये मतलब नहीं है कि आप एक दिन दिवालिया हो जायेंगे, और कहेंगे  - ” अब मेरे पास प्रेम नहीं है जहाँ तक प्रेम का सवाल है आप दिवालिया नहीं हो सकते।  प्रेम तो वह सर्वोच्च रूप है जहाँ कुछ भी नहीं माँगा जाता - आदिश्री अरुण   

Post a Comment