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Friday, 29 July 2016

संकट ही शक्ति के जन्म का कारण है


आप से मेरा एक प्रश्न है - क्या समय के साथ प्रत्येक मार्ग बदल नहीं जाते ? क्या समय हमेशा ही नई चुनौतियों को लेकर नहीं आता ? तो फिर बीते हुए समय के अनुभव नई पीढ़ी को किस प्रकार लाभ दे सकते हैं ? संकट ही शक्ति के जन्म का कारण है। आप अपने बीते हुए समय को  स्मरण करो, इतिहास को देखो तो  आपको  तुरन्त ही यह पता चल जाएगा कि जब-जब संकट आता है तब-तब उसका निवारण करने वाली शक्ति भी जन्म लेती है । मनुष्य के जीवन का चालक है भय (डर) । मनुष्य सदा ही भय का कारण ढूंढ लेता है। जीवन में आप जिन मार्गों  का चुनाव करते हैं, वो चुनाव भी आप  भय के कारण ही करते  हैं। किन्तु क्या यह भय वास्तविक  होता है? भय का अर्थ है आने वाले समय में  विपत्ति की कल्पना करना। किन्तु क्या आप जानते हैं कि समय का स्वामी कौन है ? न आप  समय के स्वामी हैं और न आपके  शत्रु। समय तो केवल ईश्वर के अधीन चलता है। तो क्या कोई यदि आपको हानि पहुँचाने के लिए केवल योजना बनाये  तो क्या वे  आपको वास्तव में  हानि पहुँचा सकता है ? नहीं । यह परम सत्य है कि भय से भरा हुआ ह्दय आपको अधिक हानि पहुँचा सकता है ।

विपत्ति के समय भयभीत ह्दय अयोग्य निर्णय करता है और विपत्ति को अधिक पीड़ादायक बनाता है। किन्तु विश्वास से भरा ह्दय विपत्ति के समय को भी सरलता से पार कर जाता है। अर्थात जिस कारण से मनुष्य ह्दय में भय को स्थान देता है भय ठीक उसके विपरीत कार्य करता है । जब मनुष्य को अपने ही बल पर विश्वास नहीं रहता है तो उस समय जीवन में आने वाले संघर्षो के लिए मनुष्य स्वंय को योग्य नहीं मानता।  इसका नतीजा यह होता है कि वो सदगुणों को त्याग कर दुर्गुणों को अपनाता है। वास्तव में  मनुष्य के जीवन में  दुर्गुनता जन्म ही तब लेती है जब उसके जीवन में आत्मविश्वास नहीं होता है । सच्चाई यह है कि आत्मविश्वास ही अच्छाई को धारण करता है। आत्मविश्वास और कुछ भी नहीं है बल्कि यह सिर्फ मन की स्थिति है, जीवन को देखने का एक दृष्टिकोण मात्र है और जीवन का दृष्टिकोण मनुष्य के अपने वश में  होता है - आदिश्री अरुण
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