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क्रोध ही आपका शत्रु है



कामना ही क्रोध है यह रजोगुण के बढ़ने से उतपन्न होता है यह बहुत खाने वाला अर्थात भोगों से कभी अघाने वाला और बड़ा पापी है इसको ही तू बैरी (शत्रु ) जान क्रोध  उत्पन्न होने की प्रक्रिया हैविषयों का चिंतन करना। विषयों के चिंतन करने वाले व्यक्ति की उन विषयों में आसक्ति हो जाती है, आसक्ति से उन विषयों की कामना उत्पन्न  होती है और कामना में विघ्न पड़ने से क्रोध उत्पन्न है। क्रोध उत्पन्न होने से अत्यंत मूढ़ भाव उत्पन्न हो जता है, मूढ़ भाव से स्मृति में भ्रम हो जाता है, स्मृति में भ्रम हो जाने से बुद्धि अर्थात ज्ञान शक्ति का नाश हो जता है और  बुद्धि का नाश हो जाने से वह  व्यक्ति अपनी स्थिति से गिर जाता है वर्तमान युग में लगभग - लगभग  सभी व्यक्ति को कभी कभी गुस्सा आता ही है। और जब गुस्सा आता है तो क्या होता हैउस समय आपका  स्वंय पर नियंत्रण नहीं रहता और आपको  यह भी नहीं पता चलता है कि आप  क्या कर रहे हैं ? जब आपको  क्रोध आता है तो  सबसे बड़ी हानि यह होती है कि आप  उस वक्त कुछ भी उल्टा सीधा बोल देते हैं  और बाद में पछताते हैं   जीवन का सबसे पहला नियम ही यही है कि आपका  स्वंय पर नियंत्रण होना चाहिए सफल व्यक्तियों की सबसे बड़ी विशेषता ही यही होती है कि उनका स्वंय पर नियंत्रण होता है और असफल व्यक्तियों का जीवन कोई और ही नियंत्रित करता रहता है इसलिए आप अपने जीवन में सबसे पहले बातचीत करने का तरीका सिख लें फिर किसी से वार्तालाप करें   वार्तालाप का पहला नियम ही यही है कि अगर आप  हमेशा मीठा और सकारात्मक ही बोलेंगे तो शायद आपको  कभी भी यह नहीं सोचना पड़ेगा कि हम क्या बोल रहे हैं ? अगर आपको गुस्सा आता है तो सबसे अच्छा  यही होगा कि उस वक्त आप  कुछ भी नहीं  बोलें क्योंकि उस वक्त आपकी  वाणी को आप  नहीं बल्कि आपका  क्रोध नियंत्रित करता है - आदिश्री  अरुण
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