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19/07/2016 को, गुरु पूर्णिमा के पर्व के शुभ अवसर पर आदिश्री ने दिया लोगों को सन्देश

हे मेरे भाई ! यह  जीवन आपका है।  इसे इतना भी गंभीर मत बनाओ  कि आपका जीवन मानसिक तनाव में  जकड़ जाए । मन में सोचे हुए कार्य को किसी के सामने प्रकट न करो  बल्कि मनन पूर्वक उसकी सुरक्षा करते हुए उसे कार्य में परिणत कर दो। सब जानते हैं कि  हम सब इस दुनिया में कुछ पलों के मेहमान हैं परन्तु वे ऐसे जी रहे हैं कि वे कभी मरेंगे ही नहीं । सोच कर आप घबराइए नहीं, बस याद रखिये कि " हम सब इस दुनिया में कुछ पलों के मेहमान हैं " । मेरा परामर्श है कि जीवन का आंनद लीजिये उसे ज्यादा गंभीरता से नहीं लीजिए । जीवन को इतना भी कठिन मत बनाइये कि खुशियाँ आपसे दूर हो जाय । आपका लक्ष्य होना चाहिए कि एक संतुलित और सफल जिंदगी जिया जाय । संतुलित जीवन का मतलब है आपका स्वास्थ्य, लोगों से अच्छे सम्बन्ध और मन की शान्ति; सब कुछ अच्छा होना चाहिए  साथ ही साथ  शब्द सूरत योग को अपना कर ईश्वर से नजदीकियाँ बढानी चाहिए।

दुनिया में करोड़ो लोग मेहनत करते हैं फिर भी सबको भिन्न-भिन्न परिणाम प्राप्त होते हैं। इस सब के लिए मेहनत करने का तरीका जिम्मेदार है। इसलिए आपको मेहनत करने के तरीके में सुधार करना चाहिए । पेड़ काटने के पूर्व कुल्हाड़ी की धार देखने की आवश्यकता होती है । इसलिए जब आपको आठ घंटे में पेड़ काटना हो तो छः घंटे कुल्हाड़ी की धार तेज करने में लगा दो। ऐसा करने से  सफलता प्राप्त होने के अवसर बढ़ जाते हैं। यह जान लो कि लोहे को कोई नष्ट नहीं कर सकता, लेकिन उसकी खुद की जंग ही उसे नष्ट कर देती है। ठीक  उसी तरह इंसान को कोई नष्ट नहीं कर सकता बल्कि उसे  की खुद की मानसिकता और सोच ही नष्ट करती है। अगर आप तेजी से चलना चाहते हैं तो अकेले चलिए। ऐसे लोगों से बचिए  जो आपके मुँह  पर तो मीठी बातें करते हैं, लेकिन आपके पीठ पीछे आपको बर्बाद करने की योजना बनाते हैं। ऐसा करने वाले तो उस विष के घड़े के समान है जिसकी उपरी सतह दूध से भरी है। एक बुरे मित्र पर तो कभी विश्वास नहीं करें । एक अच्छे मित्र पर भी विश्वास नहीं करें । क्यूंकि यदि ऐसे लोग आपसे रुष्ट होते हैँ तो आप के सभी राज से पर्दा खोल देंगे। मेरा सुझाव सिर्फ आपके लिए है। आप इसका अनुसरण कीजिये और आनंदमय जीवन बिताइए  - आदिश्री अरुण  
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