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भगवान कल्कि की मिनीस्ट्री - ईश्वर पुत्र "आदिश्री अरुण "


(1) अपनी शक्ति के अनुसार बोझ लेकर  क्योंकि जो मनुष्य अपनी शक्ति के अनुसार बोझ लेकर चलता है वह किसी भी स्थान पर गिरता नहीं है और दुर्गम रास्तों में नष्ट ही होता है।
(2) प्रत्येक चीज के लिए व्यवस्था बनाओ क्योंकि  व्यवस्था मस्तिष्क की पवित्रता है, शरीर  का स्वास्थ्य है, समाज  की शान्ति है और  स्वयं की सुरक्षा है। यह सत्य जान लो कि  अच्छी व्यवस्था ही सभी महान कार्यों की आधारशिला है।
(3) व्यवस्था बनाने के लिए सभ्य होना जरूरी है सभ्य बनने  के लिए उपदेश जरूरी  है ।सभ्यता सुव्यस्था को  जन्मती है, वह  स्वतन्त्रता के साथ बडी होती है और अव्यवस्था के साथ मर जाती है।
(4) सुव्यवस्था ही स्वर्ग का पहला नियम है। अगर जीवन स्वर्गमय बनाना है तो  सुव्यस्था को  जन्म दो
(5) परिवर्तन के बीच व्यवस्था और व्यवस्था के बीच परिवर्तन को बनाये रखना ही प्रगति की कला है।

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