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Wednesday, 8 June 2016

क्या सच्चे बोल, बोल सकता हूँ ?


आदि श्री अरुण : अच्छे कपड़े पहनने से अथवा पश्चिमी सभ्यता वाले कपड़े पहनने से अथवा अर्धनग्न रहने से लोग न तो सुन्दर दिखते हैं  और ना  ही उन वस्त्रों को पहनने से उनकी सुन्दरता झलकती है ।










सुन्दर तो अच्छे  विचारों से होते हैं और सुन्दरता उसके अच्छे चरित्र, अच्छे सोच और मीठे वचन से झलकती है।









यह सब खूबियाँ भारतीय सभ्यता, भारतीय पोशाक,  भारतीय रहन - सहन एवं  भारतीय परम्परा में मौजूद है जो लोगों की सुन्दरता में निखार लाता  है और समाज में प्रतिष्ठा कायम करता है।







इसलिए जरुरत है भारतीय सभ्यता, भारतीय पोशाक,  भारतीय रहन - सहन एवं  भारतीय परम्परा को सम्मान देने  की  ही नहीं बल्कि उसका अनुसरण करने की।













क्या  इसके लिए आप मानसिक रूप से  तैयार हैं? यदि तैयार हैं तो आप भी  LIKE कीजिये। 
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