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मनोकामनाएं


आदि  श्री अरुण : सबके जीवन में कठिनाइयाँ आती है और लोग घबड़ा जाते हैं, लोग रोने लग जाते हैं। मैं तो कहता हूँ कि तुम्हारे पास कोई भी कठिनाइयाँ  क्यों न आवे, अगर तुम  सचमुच शान्त रहो तो उसका समाधान तुम्हें मिल जाएगा । भगवान वह नहीं है, जो मन की मनोकामनाओं को पूरा करे, बल्कि भगवान वह है, जो मन से मनोकामनाओं का नाश करता है. भगवान ने तुम्हारे  साथ कोई पक्षपात नहीं किया है, बल्कि तुम्हें अमानत के रुप में कुछ विभूतियां दी हैं। इनको  सोचना, विचारना, बोलना, भावनाएं, सिद्धियां-विभूतियां कहते हैं। ये सब अमानतें भगवान ने ही तो तुम्हें दिया है । ये अमानतें मनुष्यों को इसलिए नहीं दी गई हैं कि उनके द्वारा वह सुख-सुविधाएं कमाए और अपने लिए भोग या विलासिता के साधन इकट्ठा करे और अपना अहंकार पूरा करे। ये सारी की सारी चीजें सिर्फ इसलिए मनुष्यों को  दी गयी हैं ताकि इन चीजों के माध्यम से वह भगवान की इस दुनिया को अधिक सुन्दर और व्यवस्थित बनाने के लिए प्रयत्न करे। जब मनुष्य इस बात को अच्छी तरह से समझ ले तो समझो कि उसके अंदर भगवान का उदय हो गया और भगवान की वाणी उदय हो गयी, भगवान की विचारधाराएं उदय हो गयी।      

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