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Saturday, 4 June 2016

भजन


आदि श्री :
लाज मेरी तू रखना,  लाज मेरी तू रखना
कल्कि प्रभु मेरा मन व्याकुल है,
 द्वार खुला तू  रखना, मैं तेरा हूँ  अपना
मेरे लिए बंद हैं सब दरबाजे,
लाज मेरी तू रखना,  लाज मेरी तू रखना
संकट अब तूफान बनी है, लड़ता मैं -घबराया
कोई न संगी कोई न साथी, नहीं कोई है अपना
जीवन भर मैं दुःख ही सहा हूँ , भूल गया मैं हंसना, लाज मेरी तू रखना
कल्कि प्रभु मेरा मन ........
बचपन बिता रूठा जवानी, बुढ़ापा ने मुझे थामा
दुःख और बीमारी पगडण्डी मेरी , जिस पर डला है कांटा
दर्द बड़े सहे हम तो प्रभु जी,   द्वार खुला तू  रखना, मैं तेरा हूँ  अपना
मेरे लिए बंद हैं सब दरबाजे, लाज मेरी तू रखना,  लाज मेरी तू रखना
कल्कि प्रभु मेरा मन ........
अंतिम क्षण में तू ही दिखो प्रभु , देर नहीं तुम करना
तुम्हीं में साँस समाए मेरा, इतना कृपा तू करना
लाज मेरी तू रखना,  लाज मेरी तू रखना
कल्कि प्रभु मेरा मन .......
लाज मेरी तू रखना,  लाज मेरी तू रखना
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