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Saturday, 18 June 2016

खुश रहने के लिए आदिश्री अरुण का उपदेश

खुश  रहने के लिए आदिश्रीअरुण का निम्नलिखित सात उपदेश है:
(1) दूसरों में अच्छाई को खोजो बुराई  को नहीं:
सभी मनुष्यों  का सामान्य स्वभाव ही है - दूसरे लोगों  में  कमी ढूंढना। वे  निगेटिविटी  को  जल्दी  अनुसरण  करते  हैं अधिकतर  लोग  दूसरों  में  जो कमी  होती  है  उसे  जल्दी देख  लेते  हैं  और  अच्छाई  की  तरफ  उतना  ध्यान  नहीं  देते   परन्तु   खुश  रहने  वाले  लोगों के लिए यह परम आवश्यक  है कि वे  हर एक चीज  में , हर एक  परिस्थिति  में  अच्छाई  खोजें आपको  सिर्फ अच्छाई    ही लोगों  में  नहीं  खोजना  है , बल्कि  हर एक  परिस्थिति  में  आपको  पोजिटिव रहना  है  और  उसमें  यह देखना  है कि क्या  अच्छा  हैउदहारण के लिए, अगर  आप  किसी नौकरी के  इंटरव्यू   में  सेलेक्ट  नहीं  हुए  तो  आपको  यह  सोचना  चाहिए है कि  शायद  भागवान  ने मेरे  लिए  उससे  भी  अच्छी  नौकरी  रखी  है जो मुझको  देर-सबेर  मिलेगी।  लोग मानते  हैं  कि  जो  होता  है  अच्छा  होता  है फिर भी  जल्द ही वह असंतुष्ट हो जाता है और किसी  भी  व्यक्ति  में  अच्छाई  देखना  बहुत  आसान काम नहीं  है। दूसरों में अच्छाई ढूंढने के लिए आपको  खुद  से  एक  प्रश्न  करना  है  कि - “ आखिर यह  व्यक्ति  क्यों  अच्छा  है ?” और  यकीन  मानिये  कि आपका  मस्तिष्क  आपको  ऐसी  कई  अनुभव और  बातें  गिना  देगा कि आपको   उस  व्यक्ति  में  अच्छाई  दिखने  लगेगी।
(2) जो लोग खुश  रहना चाहते हैं उनको माफ  करने की आदत डालनी  पड़ेगी और  माफी माँगना  पड़ेगा  :
माफ  करना  और  माफ़ी  माँगना  आपके  दिमाग  को  हल्का  करता  है, वह आपको  बेकार   की  उलझन  और  परेशान  करने  वाली विचारों  ( thoughts ) से  बचाता  है और  इसका नतीजा यह होता है कि  आप  खुश  रहते  हैं । हर  किसी  आदमी का  अपना - अपना एक ईगो ( ego ) होता  है, जो  जाने -अनजाने में  औरों  के द्वारा हार्ट ( hurt ) हो  सकता  है। परन्तु जो   खुश  रहने  वाले लोग होते है वे  छोटी -मोती  बातों को  दिल  से  नहीं  लगाते बल्कि  वो   माफ  करना  जानते  हैं। वे  सिर्फ  दूसरों  को ही माफ  नहीं करते बल्कि  खुद  को  भी माफ  करते हैं ईगोऔर यदि  ऐसे  लोगों  से  कोई  गलती  हो  जाती  है  तो  वो  माफी  मांगने  से  भी  नहीं  कतराते हैं। वे  जानते  हैं  कि  व्यर्थ  का ईगो ( ego ) उनके   जीवन  को  असंतुलित  बना देगा  इसलिए  वो सॉरी (Sorry) बोलने  में  कभी  कंजूसी  नहीं  करते
(3) जो लोग खुश  रहना चाहते हैं उनके लिए यह परम आवश्यक है कि वे   अपने  चारो  तरफ  एक  strong support system develop करें  :
Strong   support system दो  pillars पर   टिका  होता  है - परिवार  (फैमिली) और दूसरा दोस्त (Friends)।   ज़िन्दगी  में  खुश  रहने  के  लिए  परिवार  (फैमिली) और दूसरा दोस्त (Friends) का  बहुत  ही बड़ा  योगदान  है । आपके  पास भले ही  दुनिया  भर  की  दौलत  हो, शोहरत  हो  लेकिन  अगर  परिवार  (फैमिली) और दूसरा दोस्त (Friends) नहीं  है  तो  आप  ज्यादा  समय  तक  खुश  नहीं  रह  पायेंगे । इसलिए जितना  हो  सके  आप अपने  रिश्तों  को  बेहतर  बनाएं, छोटी -छोटी  चीजें  जैसे  कि जन्म दिन परबधाई  देना  (Birthday wish करना), बधाई  देना, सच्ची  प्रशंशा  करना, मुस्कुराते  हुए  मिलना, गर्मजोशी  से  हाथ  मिलाना , गले  लगना  आपके  संबंधों  को  मजबूत  बनता  है ।   जब  आप  ऐसा  करेंगे  तो  बदले  में  आपको  भी  वही  मिलगा और  आपकी  जीन्दगी  को  खुशहाल  बना देगा ।
(4) जो खुश  रहना चाहते हैं उनके लिए यह परम आवश्यक हैं कि  वे अपने मन का काम करें और जो  भी काम वे करें उसमे  मन लगाकर करें :

यदि  आप  अपने मन के अनुसार ( interest का) काम करेंगे तो निश्चित ही वह आपके ख़ुशी को  बढ़ाएगा   लेकिन  ज्यादातर  लोग  इतने भागयशाली  नहीं  होते है कि उन्हें  ऐसी नौकरी  या  व्यापार  मिल जाय जिसके लिए वे इंटरेस्टेड हैं। उन्हें उस काम  में  लगना   पड़ता  है  जो  उनके  interest के  हिसाब  से  नहीं  होतीं पर  खुश  रहने  वाले  लोग  जो  काम  करते  हैं  उसी  में  अपना  मन  लगा  लेते  हैं चाहे वह  भले  ही  उसके पसंद का काम नहीं हो वे उसी काम को मन लगा कर करते  हैं  जिससे उनको भरपूर खुशियाँ  मिलती है  
(5) आप  उस  बात  पर  यकीन  नहीं  करें   जो  आपके   दिमाग  में  आती  हैं :
एक साधारण मनुष्य का मस्तिस्क  हर  रोज  60,000 विचार उतपन्न  करता  है, और  अपवाद को छोड़ कर हरएक  आम  आदमी   के  अधिकतर विचार नकारात्मक होते हैं  (thoughts negative होती  हैं) अगर  आप  प्रति दिन  अपने मस्तिस्क को  हज़ारों  नकारात्मक विचारों से भरेंगे (negative thoughts से  feed करेंगेतो  खुश  रहना  तो  मुश्किल ही नहीं बल्कि बहुत  मुश्किल होगा इसलिए  खुश  रहने  वाले  व्यक्ति  को चाहिए कि वे   दिमाग  में    रहे     बुरे  विचारों  को  अधिक  देर  तक  पनपने  नहीं  दें    खुश  रहने  वाले  व्यक्ति  को यह चाहिए कि  हो  सकता  है  जो  वो  सोच  रहे  हैं  वो  गलत  हो  और  जिसे  वो  बुरा  समझ  रहे  हैं  वो  अच्छा  हो ऐसा सोच बना करके  आराम से खुशहाल रह सकते हैं। वास्तव में   हमारी  सोच  के  हिसाब  से  मस्तिस्क  में  से ऐसे  रसायन निकलते हैं (chemical release होते  हैंजो  हमारे  मूड  को  खुश  या  दुखी  करते  हैं जब  आप  नकारात्मक  विचारों  को  सच  मान  लेते  हैं  तो  आपका  ब्लड प्रेसर  (Blood Pressure) बढ़ने  लगता  है  और  आप  असंतुलित  हो  जाते  हैं   वहीँ  दूसरी  तरफ  जब  आप  उस  पर से अपना ध्यान हटा   लेते  हैं  तो  आप  अनजाने  में  ही  मस्तिस्क को  रिलैक्स्ड रहने  का  सिग्नल   दे  देते  हैं ऐसा करने से आपको आराम मिलता है और आप खुश हो जाते हैं
(6) खुश  रहने  वाले  व्यक्ति  को चाहिए कि वे अपने  जीवन  या  काम  को  किसी  बड़े  उद्देश्य  से जोड़ कर देखेँ     :
एक  बार  एक  बूढी  औरत  कहीं  से   रही  थी  कि  तभी  उसने  तीन  मजदूरों  को  कोई  ईमारत बनाते  देखा उसने  पहले  मजदूर  से  पूछा - ” तुम  क्या  कर  रहे  हो  ?” उसने  जवाब  दिया - "देखती  नहीं  मैं  ईंटे  ढो   रहा  हूँ ”  फिर  वो  दुसरे  मजदूर  के  पास  गयी  और उससे  भी  वही  प्रश्न किया  - ” तुम  क्या  कर  रहे  हो ?” उसने  जवाब  दिया - ” मैं  अपने  परिवार  का  पेट  पालने  के  लिए  मेहनतमजदूरी  कर  रहा  हूँ ”  फिर वह  तीसरे  मजदूर  के  पास  गयी  और  पुनः  वही  प्रश्न   किया - ” तुम  क्या  कर  रहे  हो ?" उस  व्यक्ति  ने  उत्साह  के  साथ  उत्तर  दिया -  “ मैं  इस  शहर  का  सबसे  भव्य   मंदिर  बना  रहा  हूँ आप अंदाजा लगा सकते हैं कि इन तीनों में से कौन  सबसे अधिक खुश होगा ?
(7) खुश  रहने  वाले व्यक्ति को चाहिए कि अपने  जीवन  में  होने  वाली  चीजों  के लिए खुद को जिम्मेदार मानें  :

खुश  रहने वाले व्यक्ति रिस्पांसिबिलिट लेना  जानते  हैं अगर  उनके  साथ  कुछ  बुरा  होता  है  तो  वो  इसका  दोष  दूसरों  पर  नहीं  लगाते, बल्कि  खुद  को  इसके  लिए  जिम्मेदार  मानते  हैं उदाहरणार्थ, अगर  वो  ऑफिस  के  लिए  लेट  होते  हैं  तो  ट्रैफिक  जाम  को  नहीं  कोसते  बल्कि  ये  सोचते  हैं  कि  थोडा  पहले  निकलना  चाहिए  था अपनी  सफलता  का  क्रेडिट दूसरों  को  भले  दे  दें  लेकिन  अपनी  असफलता  के लिए खुद को ही जिम्मेदार मानें जब  आप  अपने  साथ  होने  वाली  बुरी  चीजों  के  लिए  दूसरों  को  दोष  देते  हैं  तो  आपके  अन्दर  क्रोध  आता  है, पर  जब  आप  खुद  को  जिम्मेदार  मान  लेते  हैं  तो  आप  थोडा  निराश  होते  हैं  और  फिर चीजों  को  सही करने के प्रयास में जुट जाते हैं। ऐसा  करने  से  मेरी  एनर्जी  दूसरों  में  कमी  खोजने  की  जगह  खुद  को  इम्प्रूव  करने  में  लगती  है , और अंत में वह खुशियों को  बढाती  है 

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