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Thursday, 26 May 2016

वचन की शक्ति

ईश्वर पुत्र अरुण ने कहा  कि  तुम वचन और परमेश्वर की सामर्थ्य को नहीं जानते हो  इस कारण तुम धूल में पड़े  हो ।   (धर्मशास्त्र, मत्ती 22:29) वचन से ही हमें जीवन मिलता है । (धर्मशास्त्र, यूहन्ना 20:31) वचन हमें पवित्र करता है (धर्मशास्त्र, यूहन्ना 17:17) वचन हमारी उन्नति कर सकता है । (धर्मशास्त्र, प्रेरितों के काम 20:32) वचन दिल को खुश करता है । (धर्मशास्त्र, भजनसंहिता 19:8) वचन पाप से दूर करता है (धर्मशास्त्र, भजनसंहिता 119:11) वचन दिलों को आत्मिक गीतों से भरता है । (धर्मशास्त्र, कुलुस्सियों 3:16) वचन भविष्य के लिए चेतावनी देता है । (धर्मशास्त्र, 1कुरिन्थियों 10:11-12) वचन से ही दुष्ट पर जय पाई जा सकती है । (धर्मशास्त्र, 1यूहन्ना 2:14) वचन ही चँगाई देता है (धर्मशास्त्र,  मत्ती 8:16) वचन उद्धार प्राप्त करने के लिए बुद्धिमान बनाता है । (धर्मशास्त्र, 1तीमुथियुस 3:15) वचन प्रभावशाली है (धर्मशास्त्र, 1थिस्सलुनीकियों 2:13) वचन हमारे प्राणों का उद्धार करता है । (धर्मशास्त्र, याकूब 1:21) वचन अनन्त जीवन के लिए पक्का विश्वास दिलाता है (धर्मशास्त्र, 1यूहन्ना 5:13) वचन कभी भी टलता नहीं (धर्मशास्त्र, मत्ती 24:35) वचन को खुदा ने अपने बड़े  नाम से भी अधिक महत्व दिया  धर्मशास्त्र, (भजनसंहिता 138:2)
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