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रेवती जी का प्रश्न और आदि श्री का जबाब


रेवती : आदि श्री के चरणों में मेरा प्रणाम स्वीकार हो । मैं 18 मई 2016 को कल्कि जयन्ती मनाना चाहती हूँ ।  कल्कि जयन्ती मानाने के लिए क्या - क्या करना चाहिए हमें बताने की कृपा करें ।

आदि श्री अरुण :  कल्कि जयन्ती मानाने से पहले कुछ आवश्यक बातों पर अमल  करना अतयन्त ही आवश्यक  है, जो निम्न प्रकार वर्णित है:
(1) तुम परमेश्वर  की प्राप्ति तब कर सकते हो जब तुम उसकी तलाश में रहो, और ये तलाश बिल्कुल वैसी ही होनी चाहिए, जैसे कि  बालों में आग लगे हुए  व्यक्ति को तालाब की तलाश होती  है।
(2) जिस प्रकार किरायेदार घर का  उपयोग करने के लिए उसका किराया देता हैं, ठीक  उसी प्रकार आत्मा शरीर को प्राप्त करने के लिए रोग के रूप में, किराया देती हैं।
(3) भगवान को  अनेक तरीकों  से प्राप्त किया जा सकता हैं, आप उसको किस नाम से पुकारते हैं और किस             तरह से उनकी पूजा करते हैं इस बात पर निर्भर  नहीं करता है बल्कि महत्वपूर्ण बात  यह हैं कि आप उसको       अपने अन्दर कितना महसूस करते हैं।
(4) भगवान की तरफ अनन्य  प्रेम बेहद जरूरी बात है और बाकी सब असत्य और काल्पनिक है।ज्ञान और प्रेम        से जिस लक्ष्य को हासिल किया जा सकता हैं वो एक ही हैं  लेकिन इसमें  प्रेम वाला रास्ता ज्यादा आसान है।
(5) जिस व्यक्ति में ये तीनो चीजे हैं - लज्जा, घृणा और भय, वो कभी भी भगवान को प्राप्त नहीं कर सकता  है         अर्थात  उस पर भगवान की दृष्टि  कभी भी नहीं पड़ सकती है ।
(6) नाव जल में रहे, लेकिन जल नाव में नहीं रहना चाहिए। इसी प्रकार साधक जग में रहे, लेकिन साधक के मन       में जग नहीं रहना चाहिए।
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