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Monday, 30 May 2016

परिवर्तन ! परिवर्तन ! परिवर्तन ! क्योंकि यह धरती बहुत पुरानी हो गई है


सभी चीजों में परिवर्तन मधुर होता है
केवल परिवर्तन ही अनंत,सतत और अमर है
हे ईश्वर ! मुझे उन चीजों को स्वीकार करने की स्थिरता दीजिये जिन्हें मैं बदल नहीं सकता  उन चीजों को बदलने का साहस दीजिये जिन्हें मैं बदल सकता हूँ  और दोनों में अंतर करने का ज्ञान दीजिये।
अगर हम किसी और व्यक्ति या समय का इंतज़ार करेंगे तो बदलाव नहीं आएगा  । स्वयं हम ही वह  हैं जो इसकी प्रतीक्षा कर रहे हैं  स्वयं हम ही  वह बदलाव हैं जो हम चाहते हैं।
खुद वो बदलाव बनिए जिसको  आप दुनिया में  देखना चाहते हैं।
कोई भी परिवर्तन, यहाँ तक कि पहले से अच्छा  के लिए होने वाला परिवर्तन भी तकलीफ और असुविधाओं के साथ होता है।
विचारशील लोगों का एक छोटा सा समूह दुनिया को बदल सकता है। वास्तव में दुनिया जब भी बदली है इन्ही लोगों के द्वारा बदली है।
यदि आप दिशा नहीं बदलते हैं तो संभवतः आप वहीँ पहुँच जायेंगे जहाँ आप जा रहे हैं।
यदि आप चीजों को देखने का तरीका बदल दें तो जिस  चीज को आप देखते हैं बदल जाएँगी।
परिवर्तन का अर्थ है कि जो पहले था वो सही नहीं था ।लोग चाहते हैं कि  चीजें  पहले से अच्छा हो ।
परिवर्तन के अलावा  कुछ भी स्थायी नहीं है।
जो प्रसन्नता और विवेक में स्थिर होना चाहते हैं उन्हें अक्सर बदलना होगा
वास्तविक परिवर्तन कल्पना में ही होता है।  
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