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Sunday, 15 May 2016

निशा के प्रश्न और आदि श्री का जबाब

निशा : आदि श्री के चरणों में मेरा प्रणाम स्वीकार हो। मेरा जीवन शुरू से  ही दुःख एवं पड़ेशनियों में  गुजरी है । प्रति दिन नई - नई समस्याएँ आती रहती है। मैं बहुत पड़ेशान हो चुकी हूँ। आदि श्री जी मुझे मार्ग दर्शन कीजिए।

आदि श्री अरुण : सबसे महान जिंदगी वही होती है  जो देना जानती है। जिस रास्ते पर चलने से समस्या नहीं आए वह चला हुआ रास्ता गलत है।   वह कितना महान है  जो किनारे तोडकर बह जाती है और उदासी और तकलीफ से बेहाल इस दुनिया को खुशी और सुकून से भर देती है।
अगर व्यक्ति से कोई गलती हो जाती है तो कोशिश करें कि उस गलती को नहीं दोहराऐं और न उसमें आनन्द ढूँढने की कोशिश करें। क्योंकि बुराई में डूबे रहना दुःख को न्योता देता है।

तुम  किसी भी बात की चिंता नहींकरो परन्तु हर एक बात में तुम्हारा  निवेदन, प्रार्थना एवं  बिनती धन्यवाद 

के साथ उपस्थित किए जाए। तब ईश्वर तुम्हारी प्रार्थना को सुनेंगे और तुम्हारी  हर मनोकामनाएं  पूरी  होगी । 

ईश्वर ने जो कहा है  कि तू डर  मत ; तू मगन हो और आनन्द कर उस पर भरोसा करो क्योंकि ईश्वर ने 

बड़े - बड़े काम किए हैं। (धर्मशास्त्र,  योएल २ : २१ ईश्वर ने साफ - साफ लब्जों में कहा कि मैं तेरा परमेश्वर, 

तेरा दाहिना हाथ पकड़कर कहता हूँ कि मत डर, मैं तेरी सहायता करूँगा।(धर्मशास्त्र, यशायाह ४१ :१३ ईश्वर 

जो आशा का दाता है, तुम्हें उनके उपर विश्वास करने पर ही वे तुम्हें सब प्रकार के आनन्द और शान्ति से पूर्ण 

करेंगे । (धर्मशास्त्र, रोमियों १५:१३) तुम बस एक मात्र परमेश्वर की ही शरण में आ जा, वे तुम्हें सम्पूर्ण दुःख 

एवं सम्पूर्ण पापों से मुक्त कर देंगे।  
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