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Tuesday, 26 April 2016

दिलीप जी का प्रश्न और आदि श्री जी का जबाब

दिलीप :
5:21 P.M. 26/4/2016
आदि श्री जी चरणों में कोटि -कोटि प्रणाम l ईश्वर हमारी कैसे सुनेंगे ? कृपया बताने की कृपा करें क्योंकि मैं बहुत पडेशानी में हूँ और मनुष्य के हाथ में मेरे समस्या का समाधान नहीं है l
आदि श्री अरुण : लोगों ने ईश्वर के साथ जो वाचा बाँधी थी (जो एग्रीर्मेंट किया था ) उसको तोड़ दिया। इसके कारण मनुष्य के जीवन और आराधना में लापरवाही और विकृति आगयी। लोग ईश्वर के शिक्षाओं के अनुकूल न जीकर ईश्वर को धोखा दे रहे हैं । याजक और जन साधरण दोनों ही परमेश्वर को यथोचित दान न देकर परमेश्वर को धोखा दे रहे हैं। इसलिए परमेश्वर अपने लोगों का न्याय करने के लिए एक दिन निश्चित किया जिसको न्याय का दिन कहते हैं। न्याय का वह दिन प्रकट होने से पहले लोग अपने आप में सुधार कर  ले  l अभी भी वक्त है कि मनुष्य अपने आप को बदल ले अन्यथा ईश्वर के न्याय उपस्थित होने पर दण्ड  पाने और रोने के सिवा कुछ भी हाथ आएगा। यह याद रखें कि न्याय के दिन न्याय के लिए ईश्वर के हाथों पकड़ा जाना बहुत ही कष्टप्रद होगा।   
परमेश्वर चाहते हैं कि आपके जीवन में जिस चीज की कमी हो मैं उसको पूरा कर दूँ। परमेश्वर चाहते हैं कि जैसे आपको उन्नति करना चाहिए वैसा आप उन्नति करो और भला चंगा रहो । परमेश्वर चाहते हैं कि जब मैं आपको पुकारूं तब आप अपना कान मेरी और लगा।परमेश्वर चाहते हैं कि आप हर समय अपने परमेश्वर पर भरोसा रखो और अपने मन की बातें खोलकर परमेश्वर से कहो तो आपके लिए हर मन्नतें पूरी की जायेगी।
परमेश्वर ने लोगों से प्रतिज्ञा किया कि  मैं तुमको कभी छोड़ूंगा और कभी त्यागूँगा इसके वावजूद भी लोगों ने परमेश्वर को छोड़ दिया और उनपर भरोसा नहीं किया। लोगों ने अपने लिए ३३ करोड़  देवी - देवता रुपी टूटे - फूटे टैंक बना लिया।  इसमें यदि ईश्वर कुछ दें तो भी
वह नहीं रहेगा।  मैं तुम से सच कहता हूँ कि  विश्वास के बिना परमेश्वर को प्रसन्न करना असम्भव है। जब आप ईश्वर को प्रसन्न ही नहीं  कर सकते तो आपकी परमेश्वर सुनेंगे कैसे ?
जो परमेश्वर राजाओं के राजा हैं, देवोँ के देव हैं वह परमेश्वर यह चाहते हैं कि मनुष्य  विश्राम और चैन के साथ सारी  भक्ति  और प्रेम के साथ प्रार्थना अर्पण किया करे और वह अच्छी तरह से जीवन बिताये। परमेश्वर ने प्रेम के उपर विशेष बल देते हुए कहा  कि जैसा प्रेम मैंने तुमे किया कि तुम मेरे सन्तान कहलाए ठीक वैसा ही प्रेम तुम दूसरे के साथ बनाए रखो।










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