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Friday, 22 April 2016

त्रेता युग में रावण का वध कलि युग में भगवान राम की शादी से महत्वपूर्ण सम्बन्ध

त्रेता युग में जब भगवान राम  ने रावण   का वध किया था तब उस समय वेदवती नाम वाली एक कन्या ने लक्ष्मी जी की सहायता की थी। लक्ष्मी जी राजा जनक के यहाँ पृथ्वी से उत्पन्न हो सीता के रूप में निवास करती थी। भगवान राम से विवाह होने के कुछ समय बाद एक दिन सीता जी भगवान राम के साथ वन में गई। तब एक दिन पंचवटी में मारीच नामक राक्षस का वध करने के लिए भगवान राम आश्रम से बाहर गए। सीता जी के कहने पर भगवान राम का छोटा भाई लक्ष्मण भी भगवान राम के पीछे - पीछे  चला गया। तत्पश्चात राक्षसराज रावण सीता हर ले जाने के लिए सीता जी के समीप आया। उस समय सीता जी के अग्निहोत्र गृह में मौजूद अग्नि देव रावण की वैसी चेष्टा जान कर सीता जी को अपने साथ ले पाताल  में चले गए और अपनी पत्नी स्वाहा  की देख - रेख में सीता जी को सौंप कर वापस लौट आए।
पूर्व काल में वेदवती को एक बार उसी राक्षस रावण ने स्पर्श कर लिया था जिससे दुखी हो कर उसने प्रज्वलित अग्नि में अपने शारीर को त्याग दिया। उस समय उसी रावण का संहार करने के उद्देश्य से अग्नि देव ने   वेदवती को सीता के समान रूप वाली बना दिया और पंचवटी आश्रम में सीता जी के स्थान पर उसी वेदवती को लाकर छोड़ दिया। रावण ने उसी वेदवती को अपहरण करके लंका में ले आया। तदन्तर रावण के मारे जाने पर अग्नी परीक्षा के समय उसी वेदवती ने अग्नि में प्रवेश किया। उस समय अग्नि देव ने स्वाहा  के समीप सुरक्षित जनक नन्दनी सीता रुप लक्ष्मी को लाकर पुनः भगवान राम के हाथ में दिया और इस प्रकार कहा - देव ! यह वेदवती सीता का परम प्रिय करने वाली है।  अतः आप इसे वरदान देकर प्रसन्न करें।
अग्नि की यह बात सुन कर सीता जी ने भी भगवान राम जी से कहा  - प्रभो ! यह वेदवती सदा मेरा प्रिय कार्य करने वाली है।  यह उच्च कोटि की भगवद्भक्त है। अतः आप स्वयं  ही इसे अंगीकार करें। तब  भगवान राम ने कहा - देवी ! मैं कलियुग में तुम्हारे कथना-नुसार कार्य करूँगा। तब तक यह देवताओं से पूजित होकर ब्रह्म लोक में निवास करे।
इस प्रकार  भगवान राम ने और लक्ष्मी जी ने जिस वेदवती को वरदान दिए थे, वही वेदवती सिहंल देश (श्री लंका) में राजा बृहद्रथ की पत्नी कौमुदी के गर्भ से पद्मा नाम से जन्म ले चुकी। भगवान विष्णु ही राम नाम से त्रेता युग में अवतार लेकर धरती पर आये थे। वही राम, वही  भगवान विष्णु जी कलियुग में कल्कि नाम से अवतार लेकर धरती पर आये और  4 अप्रैल 2006 में पद्मा जी का विवाह भगवान कल्कि जी के साथ सम्पन्न हुआ। भगवान् कल्कि जी की माता सुमति जो 14 वर्ष तक मौन व्रत पर थी उसी दिन वह अपना मौन व्रत तोड़ दी और उस दिन बहुत बड़ा सभा का आयोजन हुआ था जिसमें बहुत सारे लोग और सन्त भी सामिल हुए थे। यह समाचार T.V. चैनल पर LIVE TELECAST दिखाया गया था।   
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