Header Ads

Top News
recent

परमेश्वेर की मनसा क्या है ? - ईश्वर पुत्र अरुण

परमेश्वेर की मनसा  यह है कि जो लोग अन्त तक धीरज धरे रहेंगे उसी का उद्धार होगा। परमेश्वर जानते हैं कि अधर्म के बढ़ने से बहुत लोगों  का प्रेम ठंढा हो जाएगा। इसलिए उन्होंने साफ - साफ लब्जों में कहा कि - "अधर्म के बढ़ने से प्रेम ठंढा हो जाएगा।परन्तु जो धीरज धरे रहेगा उसी का उद्धार होगा।" (धर्मशास्त्र, मत्ती २४ :१३-१४)
                             परमेश्वऱ ने यह भी कहा कि "मेरे नाम के कारण सब लोग तुमसे बैर करेंगे पर जो अंत तक धीरज धरे रहेगा उसी का उद्धार होगा।" (धर्मशास्त्र, मत्ती १०:२२) मैं तुमसे सच कहता हूँ कि संसार और उसकी अभिलाषाएँ दोनों मिट मिटजाएँगे पर जो परमेश्वेर की इच्छा पर चलेगा , वह सर्वदा बना रहेगा। (धर्मशास्त्र,
१ यूहन्ना २:१७) उसमें से किसी का भी नाश नहीं होगा।यदि कोई मर भी जाये तो भी वह जीवित रहेगा। परमेश्वर ने कहा की "मैं  जीवित हूँ, तुम भी जीवित रहोगे। "(धर्मशास्त्र, यूहन्ना १४ :१९) इसलिए हे संसार में रहने वाले लोगों ! तुम लोगों से कहो कि - संसार के ही न होलें, क्योंकि इस संसार की रीती बदले जाते हैं। (धर्मशास्त्र, १ कुरिन्थियों ७:३१) परमेश्वर के नाम को जानने वाले परमेश्वर पर भरोसा  रखेंगे क्योंकि परमेश्वर ने  अपने खोजियों को त्याग नहीं दिया। (धर्मशास्त्र, भजन संहिता ९:१०) सब कुछ बदल जाएंगे परन्तु परमेश्वर नहीं बदलेंगे। पापी मिट जाएंगे, दुष्ट लोग आगे न रहेंगे परन्तु परमेश्वर की करुणा हमेशा आप लोगों पर बनी रहेगी। आपलोगों में से चुन कर जितने परमेश्वर के समीप आएँगे, वह सब परमेश्वर के अंगने में निवास करेंगे और उनकी मन्नतें पूरी की जाएगी। पौ फटते ही परमेश्वर उनकी सहायता करेंगे। मैं तुसे सच कहता हूँ कि तुम व्याकुल न हो, परमेश्वर पर भरोसा रखो , वे तेरे मुख पर चमक बनाए रखेंगे। हे धरती पर रहने वाले लोगों !अपनी चाल - चलन में यु चौकसी रख ताकि तेरे जीभ से पाप न हो, तुम अपने मुंह पर लगाम लगाए रह क्योंकि जिसके हृदय में परमेश्वर की व्यवस्था बनी रहती है उसके पैड़ नहीं फिसलते। धर्मियों की मुक्ति परमेश्वर की ओर से होती है, संकट के समय वह उनका दृढ गढ़ है।  परमेश्वर उनकी सहायता करके उनको बचाता है। वह उनको दुष्टों से छुड़ाकर उनका उद्धार करता है। (धर्मशास्त्र, भजन संहिता ३७:३९-४०) इसलिए प्रत्येक व्यक्तियों को चाहिए कि वह परमेश्वर की प्रार्थना ऐसे समय में करे जिस समय वह मिल सकता है। क्या आप जानते हैं हैं कि प्रार्थना सुनने के लिए परमेश्वर किस समय मिलेंगे ? ब्रह्म मुहूर्त में। अर्थात ४ बजे से ६ वजे के बीच। जब तुम दुःख में होगे, परमेश्वर तुमको दुःख से बहार निकालेंगे। जब तुम असहाय होगे, परमेश्वर तुम्हारी मदद करेंगे । जब तुम वीमार होगे, परमेश्वर पुरे बिवठौने को उलट कर तुमको ठीक करेंगे। जब तुम कमजोड़ हो जाओगे, परमेश्वर तुमको बल देंगे । जब तुम मदद के लिए पुकारोगे, परमेश्वर मदद करने के लिए तुम्हारे नजदीक आएंगे । जब तुम मुँह खोलोगे, तब तुमको दिया जाएगा। जब तुम पुकारोगे, तब उससे पहले तुमको उत्तर देंगे।                   
Post a Comment
Powered by Blogger.