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Wednesday, 23 December 2015

विश्वास में हम कैसे रहें - ईश्वर पुत्र अरुण

 जब तक कोई व्यक्ति  देह में रहता  हैं तब तक वह परमेश्वर  से अलग है क्योंकि हम रूप को देखकर नहीं परन्तु  विश्वास से चलते हैं। इसलिए आपको धीरज रखना चाहिए और देह से अलग हो कर परमेश्वर  से अलग रहने की व्यव्यवस्था को उत्तम समझना चाहिए।  
"So, then, we are ever without fear, and though conscious that while we are in the body we are away from the Lord,(For we walk by faith, not by sight.) Yet--we are without fear, desiring to be freed from the body, and to be [forever] with the Lord."
१.योजना जानें कि - विश्वास  में उद्धार के लिए  परमेश्वर को जानना  है -  कृपा से, विश्वास के माध्यम से; स्वयं से नहीं अथवा स्वयं के द्वारा किए गए काम से नहीं बल्कि यह परमेश्वर का उपहार है । 

Receive the plan -- knowing God for salvation in faith -- by grace, through faith, not of yourself, not of works, but it is the gift of Father, God.


देखो पिता ने कैसा प्रेम किया है कि हम परमेश्वर की संतान कहलाते हैं और  हम हैं भी, इस कारण संसार हमें नहीं जनता, क्योंकि उसने उसे भी नहीं जाना। 

 "See how great a love the Father has bestowed on us , that we would be called children of God; and such we are. For this reson the world does not know us, because it did not know Him."

२. प्रेम और भले कामों को उसकने के लिए एक दूसरे की चिंता किया करें 
Let us consider how we may spur one another on to relate in love and good deeds; helping one another. 
३. परमेश्वर  में अपने विश्वास को बरकरार रखें  और इसका  दिशा -निर्देश विश्वास  के द्वारा  ही  हो सकता है, देख कर नहीं।  लेकिन विश्वास में ही आप यह दवा कर सकते हैं 
Maintain your hope in relation to God  such that it is guided by faith, not by having to see what you want -- but claim it in faith that you may have it.


आशा के द्वारा हमारा उद्धार हुआ है परन्तु जिस वस्तु की आशा  की 

की जाती है, जब वह देखने में आए तब फिर वह आशा खान रही ?


क्योंकि जिस वस्तु को कोई देख रहा है, उसकी आशा क्या करेगा ? 
 

"For in hope we have been saved, but hope that is seen is not hope; for who hopes for what he already sees?" 
४. प्रार्थना के लिए परमेश्वर  के भवन में अवश्य जाओ , और प्रत्येक सप्ताह  वहां जाने की कोशिशें  करो। एक साथ मिल कर  मीटिंग करना न छोड़ें , क्योंकि कुछ लोग घर पर रहने की ही आदत दाल लेते हैं जो की ठीक नहीं है। 
Do go to house of God, and try to be there every week. Let us never give up relating [meeting] together, as some may get in the habit of staying at home.
एक दूसरे के  साथ इकट्ठा होना  न छोड़ें, जैसे कितनों की रीती है, पर एक 
दूसरे को समझाते रहें और  ज्यों - जटों उस दिन को निकट आते देखो त्यों - 
त्यों और  भी अधिक किया करो। 
 "...Not forsaking the assembling of ourselves together, as the manner of some is; but exhorting [encouraging] one another: and so much the more, as ye see the day approaching [appearing]."
५.धर्मशास्त्र स्वयं पढ़ कर परमेश्वर  के करीब आइए,पर विश्वास कीजिये 
परमेश्वर के भवन में जाकर  भक्तों के साथ सम्बन्ध  स्थापित कीजिये , 
चिंता और प्यार दिखाने का प्रयास कीजिये क्योंकि परमेश्वर ने कहा  कि लोगों को न्याय के समय पूछा जाएगा । 

Get close to God by reading the Holiscriptures for yourself, believing it, going to Lord's house in a fellowship/relationship with believers and showing concern and love because Lord said that people will ask at judgment. 

परमेश्वर  पूछेंगे कि मैंने तुमको कब भूखा, प्यासा, परदेशी, नंगा, बीमार 

या बंदीगृह में देखा  और तुम्हारा खबर नहीं लिया ? मैं तुमसे सच कहता 

हूँ कि तुमने जो इन छोटे से छोटों में से किसी एक के साथ नहीं किया, वह 

मेरे साथ भी नहीं किया।   
" Lord, when did we see You hungry, or thirsty, or a stranger, or naked, or sick, or in prison, and did not take care of You?'... He will reply, 'I tell you the truth, whatever you did not do for one of the least of these, you did not do for me.' 
६ .यदि आप विश्वास में अपने लक्ष्य को प्राप्त कर लिया, तो यह जान लो कि अब तुमको उस लक्ष्य की ओर लगातार आगे बढ़ना है  लेकिन देख कर नहीं। 
If you have reached your goal in faith, know that you can now continue walking -- but not by sight.

हम तो देखी हुई  वस्तुओं को नहीं परन्तु अनदेखी वस्तुओं देखते रहते हैं क्योंकि देखगी हुई वस्तुएँ थोड़े ही दिन की है परन्तु अनदेखी वस्तुएँ सदा बनी रहती है। 
"...we look not at the things which can be seen, but at the things which can not be seen; for the things which may be seen are temporal [temporary and passing away, transitory], but the kind of things which can not be seen [faith, hope, love] are eternal. "

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