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अध्यात्म जगत की चेतावनी

आज परमेश्वर मनुष्य शरीर धारण कर पृथवी पर कल्कि  नाम से अवतरित हुए हैं। आज परमेश्वर आपके जीवन में प्रकाश बनकर उपस्थित हुए हैं। आज परमेश्वर आपके जीवन में ख़ुशी का फूल खिलाने  आए  हैं। आज परमेश्वर आपके जीवन के पथरीली, झाड़ी एवं चट्टानों से भरी भूमि को हरा - भरा बनाने  आए हैं।  आज परमेश्वर आपको दुःख, पड़ेशानी एवं मृत्यु से बचाने आए हैं। परमेश्वर के  लिए न तो कोई कर्तव्य है और न उन्हें किसी चीजों को  प्राप्त करने की जरूरत ही है। (गीता ३:२२) फिर भी परमेश्वर समय - समय पर अवतार लेकर संसार  का हित करने के लिए सब कार्य  करते हैं।  जिस  युग में जितना कार्य आवश्यक है, परमेश्वर उसी के अनुसार अवतार लेकर उस कार्य को पूरा करते हैं। श्रीमद्भगवतम् महा पुराण १०;३३:३७ में महर्षि वेद व्यास जी ने कहा  कि "जीवों पर कृपा करने के लिए ही परमेश्वर अपने आपको मनुष्य रूप में प्रकट करते हैं और ऐसी - ऐसी लीलाएँ करते हैं जिन्हें सुनकर जीव भगवत्प्रायण हो जाय।" इस प्रकार परमेश्वर के अवतार लेने की दिव्यता को जानने से मनुष्य की परमेश्वर में भक्ति हो जाती है और भक्ति से ही परमेश्वर की प्राप्ति हो जाती है। भक्त के लिए तो परमेश्वर  का  नाम ही छुटकारे का  साधन है और परमेश्वर का नाम ही  भक्त का सौंदर्य है। परमेश्वर का नाम जप  ही शरीर के अन्दर तथा बाहर दोनों को सुन्दरता प्रदान करती  है। लेकिन परमेश्वर  के आराधना में  लोगों ने  लापरवाही की और उसके पूजा पद्धति में विकृति आगई है । याजक और जनसाधारण दोनों ही परमेश्वर के  शिक्षा के अनुकूल जीवन  न जीकर परमेश्वर को धोखा  दे रहे हैं। परमेश्वर के अनुसार मनुष्य न चल कर परमेश्वर के नजर में मुख्य ५ अपराध करते हैं:-
(१) मनुष्य जीवते परमेश्वर को छोड़कर मूर्ती पूजा करने  लगे। 
(२) मनुष्य परमेश्वर को छोड़कर ३३ करोड़ अर्ध देवताओं की पूजा करने लगे जिसके पास स्वयं अपनी कोई शक्ति नहीं है।  वे अर्ध देव  उसी परमेश्वर से शक्ति लेकर मनुष्य का कल्याण  हैं जिसको मनुष्य ने पूजा करना छोड़ दिया है ।   
(३) मनुष्य परमेश्वर के शिक्षा के अनुकूल जीवन न जीकर परमेश्वर को धोखा देते हैं। 
(४) मनुष्य परमेश्वर के नजर में विश्वास योग्य नहीं रहे। 
(५) मनुष्य परमेश्वर के सभी नियमों का पालन  नहीं करते बल्कि उसका सब्सटीच्युट  ढूंढते हैं। 
परमेश्वर की नजर में मनुष्य के द्वारा किया गया अपराध मनुष्य को दुःख, विपत्ति एवं पड़ेशानियों में डाल रहा है। परमेश्वर के इच्छा की कोई शाब्दिक अभिव्यक्ति नहीं है। पूरे विश्व का प्रत्येक कार्य - व्यवहार उसके हुक्म में बंधा है, उससे बाहर कुछ भी नहीं है। मनुष्य अपनी अज्ञानता पर प्रसन्न होता है।  माया - बंधनों में पड़ा जीव अहंकारवश परमेशर के कार्य - व्यापर को अपना किया बताते हैं, तो भी वह परमात्मा उन पर क्रोधित न होकर उनकी नासमझी पर मुस्कुराते  हैं ।
परमेश्वर शांति के धनि हैं, परमेश्वर शांति के राजा  हैं, परमेश्वर के पास शांति रूपी धन है। जब तुम परमेश्वर के पास आओगे तब तुम शान्ति से भर जाओगे। परमेशर तुम्हारे घर में  शांति का बरसात करेंगे। ऊँची - ऊँची बातों को सुनना बहुत ही अच्छा  लगता है  पर कुछ  जमीनी  बातें भी हैं  जिसको व्यवहारिक जीवन में उतारना आवश्यक है।  यह सच है कि परमेश्वर आपके उदासी को हटा कर खुशियाँ देना  चाहते हैं। यह सच है कि परमेश्वर आपके जीवन  के दुःख को मिटा कर आनन्द देना चाहते हैं। परन्तु आप परमेश्वर के पास आना नहीं चाहते हैं और न परमेश्वर के घर में सेट्ल करना चाहते हैं। परमेश्वर ने जो वादा किया है अब वह वादे का दिन उपस्थित होने वाला है। परमेश्वर के उस वादे के दिन को ही क़ियामत का दिन कहते हैं। (कुरान, तर्जुमा, सूरः कमर ५४ का आयत ४६, पेज नम्बर - ८४६) परमेश्वर ने कहा कि जिस समय मैं तुम्हें मिटाने लगूँ उस समय मैं आकाश को ढकूँगा और तारों को धुंधला कर दूँगा। मैं सूर्य को बादल से छिपाऊँगा और चन्द्रमा अपना प्रकाश न देगा। तेरे देश में अंधकार कर दूंगा। (धर्मशास्त्र, यहेजकेल ३२:७-८) परमेश्वर के उस भयानक दिन के आने से पहले सूर्य अँधियारा और चाँद लहू के जैसा लाल हो जायेगा। (धर्मशास्त्र, योएल २:३१  तथा प्रेरितों के काम २ :२०) परमेश्वर ने कहा  कि जिस महीने में यह घटना घटेगी, वह घटना उस महीने के १५ वें दिन घटेगी। उस समय मैं सूर्य को दोपहर के समय अस्त कर दुँगा और इस देश को मैं दिन दुपहरी अँधियारा कर दूंगा । (धर्मशास्त्र, आमोस ८:९)      
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