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परमेश्वर ने आपको क्यों छोड़ दिया ?

तुमने बहुत पूजा किया। तुमने बहुत भजन गाया। तुम्हारे भजन में बहुत दर्द भरे हुए थे। तुम्हारा भजन मुझको बहुत अच्छा लगा।  लेकिन सबाल यह उठता है कि क्या भगवान  ने तुम्हारी सुनी या नहीं ? बहुत सारे भजन हमारे और आपके सामने है जिसको लोगों ने बड़ा प्रेम से गाया और समाज के बहुत  लोगों ने उसे पसंद किया। अधिकतर भजन में ईश्वर के सामने लोगों ने  प्रस्ताव  रखा कि आप हमको भूल गए हैं, आप हमारी कब सुनेंगे, आप हमारी लाज बचाओ, बीच भँवर में पड़ा हूँ और कोई बचाने वाला नहीं है, हम मर रहे हैं, हमारी  रक्षा  करने आप कब आओगे इत्यदि - इत्यादि। इसका क्या अर्थ है ? आपका संबन्ध भगवन से टूट चुका है इसलिए तो आप भगवान के आगे इस तरह के भाव को  प्रकट करते हो। लेकिन क्या कभी आपने सोचा कि ऐसा भाव आपके मन में क्यों आया है ? आपने कुछ गलतियाँ अवश्य की है जिसका परिणाम यह  हुआ कि परमेश्वर से आपका वियोग हो गया है। आप परमेश्वर के सामने रोते  हो,  परमेश्वर के  सामने मदद  लिए विनती करते  हो, आप परमेश्वर को दोषी ठहराते  हो  और कहते हो कि हे परमेश्वर,  आप हमको भूल गए हैं; लेकिन आप अपनी गलती को न तो देखना चाहते हैं और न अपनी गलती को सुधारना चाहते हैं। जबकि परमेश्वर ने कहा कि हे कठोर मन वालों !तुम जो धर्म से दूर हो, कान लगा कर मेरी सुनो। मैं  धार्मिकता को समीप ले आने पर हूँ, वह दूर नहीं है और मेरे उद्धार करने में विलम्ब न होगा। (धर्मशास्त्र, यशायाह ४६;१३) मेरी दृष्टि में तू अनमोल और प्रतिष्ठित है, मैं तुमसे प्रेम रखता हूँ। इस कारण मैं तेरे प्राण के बदले राज्य - राज्य के लोगों को दे दूंगा। मत डर क्योंकि मैं तेरे साथ हूँ।  मैं तेरे वंश को पूर्व से ले आऊंगा और पश्चिम से भी इकट्ठा करूंगा। मैं उत्तर से कहूँगा दे दो और दक्षिण से कहूँगा रोक मत रख।  मेरे पुत्रों को दूर से और मेरी पुत्रियों को पृथवी की छोड़ से ले आओ।   (धर्मशास्त्र, यशायाह  ४३ :४ - ६) उन्होंने कहा कि पुकारने से पहले मैं तुमको  उत्तर दूंगा और तुम्हारे  मांगते ही मैं तुम्हारी सुन लूँगा। (धर्मशास्त्र, यशायाह ६५:२४)  इसके बाद भी मनुष्यों ने ईश्वर की बात न मानी। तब  उन्होंने कहा कि सत्यानाश तो पूरे न्याय के साथ ठाना गया है। उन्होंने मनुष्यों  के लिए  ५ बातें  कहा  :
(१) परमेश्वर ने कहा कि जो प्राणी पाप करे वही  मरेगा। (धर्मशास्त्र, यहेजकेल १८:२० )
(२) परमेश्वर ने कहा कि जो प्राणी मेरी सब विधियों का पालन करे वह जीवित ही रहेगा। (धर्मशास्त्र, यहेजकेल १८:१९ )
(३) परमेश्वर ने कहा कि जब मैंने तुम्हें बुलाया तुमने उत्तर  न दिया। जब मैं बोला, तब तुमने मेरी न सुनी। जो मुझे बुरा लगता है  तुमने नित्य वही किया। और जिससे मैं अप्रसन्न होता हूँ, उसी को तुमने अपनाया।(धर्मशास्त्र, यशायाह  ६५ :१२)  तुमने मेरी पूजा करना छोड़ दिया और उनको अपने लिए ईश्वर बना लिया जो अर्ध देव हैं। उनके पास स्वयं की शक्ति भी नहीं है। वह मुझसे ही शक्ति लेकर लोगों का कल्याण करते हैं। लेकिन उसका वह पूजा अविधि पूर्वक है। (गीता ९:२३)
(४) परमेश्वर ने कहा कि मेरी प्रजा ने दो बुराइयां की है। उन्होंने मुझे (बहते जल के सोते को) त्याग दिया है और उन्होंने अपने लिए हौद बना लिए वरन ऐसे हौद जो टूट गए हैं और जिनमें जल नहीं रह सकता। (धर्मशास्त्र, यिर्मयाह २:१३)
(५)  परमेश्वर ने कहा कि मेरे वचन को मानो तब मैं तुम्हारा परमेश्वर हूँगा और तुम मेरी प्रजा ठहरोगे।  जिस मार्ग की मैं तुम्हें आज्ञा दूँ उसी में चलो तब तुम्हारा भला होगा। (धर्मशास्त्र, यिर्मयाह ७ :२३)
ईश्वर चाहते हैं कि मैं आपको स्मरण दिलाऊँ कि परमेश्वर  तुम्हारा  पिता है; और एक पिता का दिल कैसा होता है यह मैं आपको बताऊँ । परमेश्वर आपके बीच रहेंगे, परमेश्वर आपके बीच चला - फिरा करेंगे और आप उनके लोग होंगे। परमेश्वर  ने वचन दिया है कि वे आपके पिता होंगे और आप  उनके बेटे एवं बेटियाँ होंगे। परमेश्वर  बेटे के आने का इन्तजार कर रहे हैं।  आपने अच्छे  बेटे के लौट कर आने का नहीं बल्कि नालायक बेटे के लौट कर आने का। वह नालायक बेटा अपने  हिस्से का धन लेकर विदेश चला गया और वहाँ जाकर सारा धन पाप करने में और एसो - आराम में खर्च कर कंगाल बन  गया।  अब उसके पास खाने के लिए कुछ भी नहीं है। अब वह अपने पिता  के पास नौकरी करने के लिए आ रहा है। उसके पैडों में चप्पल भी नहीं है और उसके कपड़े भी  फटे हैं।  उसका पिता प्रति  दिन उसके लौट कर आने का  इन्तजार कर रहा है। उसका पिता दूर से ही अपने बेटा को लौट कर आते देख बेटे की ओर दौड़ा। वह अपने बेटा को गले से लगा लेता है। वह अपने बेटा को अपने बाहों में ले लेता है। उसने अपने बेटे से कहा कि मैं तो सोचता था कि क्या पता तुम मर गए होगे । तुम अब कभी नहीं आओगे। मैं तुम्हारे लौटकर आने का उम्मीद खो चूका था। वैसे तो इस घर में तुम अपना अधिकार खो चूका  था। पर अब मैं  तुम्हें अधिकार का रिंग देता हूँ। अब इस घर में जो कुछ भी है उसको तुम यूज कर सकते हो।
अधिकार का रिंग क्या है ? तुम  परमेश्वर के नाम से दुष्टात्माओं को बाहर निकलोगे। (धर्मशास्त्र, मरकुस १६:१७)  जब तुम्हें अधिकार का रिंग मिलेगा तब तू दुनिया की जवान नहीं बोलोगे ; तब तुम ईश्वर की जवान बोलोगे। (धर्मशास्त्र, मत्ती २७ :४६ )
    

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