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Saturday, 29 August 2015

परमेश्वर के इच्छाओं के अनुसार क्यों चलो ?


जो मनुष्य परमेश्वर के इच्छाओं के अनुसार चलता है वह हमेशा जीवित रहता है। आज  मैं आपको इस भूली हुई बातों को याद दिलाने आया हूँ। संसार से जो सुख आपको मिलता है वह टेम्प्रोरी सुख है। इस सत्य को याद रखना और दैनिक जीवन में इसको उतारना दोनों आवश्यक है। जो व्यक्ति सुनता तो है परन्तु  दैनिक  जीवन में इसको नहीं उतारता है उस सत्य को जानने से कोई  लाभ  नहीं होता है  । यदि कोई मनुष्य सांसारिक सुख को त्याग कर परमेश्वर की इच्छाओं को पूरा करता है तो वह निश्चित ही अनंत जीवन के सुख को भोग पाएगा।
आप देखते होंगे कि बहुत सारे परिवार हैं जो वर्वाद हो गए क्योंकि वे परमेश्वर के इच्छाओं के अनुसार नहीं  चले  और अपने घर का निर्माण सांसारिक नीव पर खड़ा किये थे।  थोड़ा सा प्रेसर पड़ा और वह गिर कर धारासाई हो गया। लेकिन जो व्यक्ति अपना घर परमेश्वर के नाम रूपी चट्टान पर बनाते हैं उनका घर हमेशा स्थिर और सुरक्षित रहता है। क्योंकि जो परमेश्वर आकाश और पृथ्वी का कर्ता हैं  उनसे  प्रत्येक मनुष्य सहायता पाता है। परमेश्वर प्रत्येक मनुष्य को सहायता निःस्वार्थ करते हैं। बदले में वे मनुष्य से कुछ भी नहीं मांगते हैं।  इसलिए मनुष्य पर उनकी यह कृपा हमेशा बरसती रहती है। मनुष्य दूसरे को जो सहायता करता  है उसके पीछे कोई न कोई स्वार्थ अवश्य छिपा होता है। बिना स्वार्थ का मनुष्य किसी की भी मदद नहीं करता है। जब उसका अपना स्वार्थ पूरा जाता है तब वह उस मनुष्य को भूल जाता है।  अर्थात संसार के मनुष्य से जो सहायता मिलता है वह टेम्प्रोरी है। वह परमानेंट नहीं है।  जैसे रात को चाँदनी से कुछ हानि नहीं  होती है। ठीक उसी प्रकार परमेश्वर के  शरण में रहने से कुछ हानि नहीं होती बल्कि परमेश्वर सारी विपत्तिओं से आपकी रक्षा करते रहते हैं। आपके आने - जाने में आपकी रक्षा अब से लेकर सदा तक करते रहेंगे। ऐसे परमेश्वर को छोड़ कर यदि कोई मनुष्य संसार के आश्रय में रहता है तो यह उसकी बदकिस्मती है।
मनुष्य को परमेश्वर की ओर सहायता के लिए देखना चाहिए और कुछ ऐसे जतन  करना चाहिए जिससे कि उनकी रखवाली हमेशा होती रहे। वास्तव में वह मनुष्य समझदार है जो यह सही निर्णय लेता है कि मुझे सहायता कहाँ से मिलेगी और इस बात को जान कर उस ओर अपना  ध्यान लगाते हैं।
तुम  जो सवेरे उठते हो और लेट से विश्राम करते हो और दुःख भरी रोटी खाते हो यह सब तुम्हारे लिए व्यर्थ ही है क्योंकि तुम अपना नींद यों  ही दान करते हो।  इसके बदले में तुमको कुछ भी नहीं मिलता है।  मिलता भी है तो बस  पड़ेशानी और दुःख भरा जीवन। लेकिन यदि तुम परमेश्वर की  प्रार्थना के लिए प्रति  दिन सवेरे ब्रह्म मुहूर्त में उठो तो तुम्हारा नींद कभी भी वर्वाद नहीं होगा। वह परमेश्वर तुम्हारे  दुःखों  को आनन्द में बदल देंगे। जब तुम उन्हें पुकारोगे  तब वे तुम्हारी सुनेंगे। वे तुम्हारे संग रहेंगे। वे तुमको  संकटों से बचा कर तुम्हारी महिमा को बढ़ाएंगे। आज वो परमेश्वर धरती पर अपने  नए नाम से आये हैं। आज  वे आपको ढूंढ़ रहे हैं।  लोग उनको कल्कि नाम से  पुकारते हैं।  आज वह वक्त आ गया है  कि आप अपने आप को भगवान कल्कि जी के चरणों में समर्पित कीजिए और उपस्थित  वाले विपत्तियों से बचिए।   
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