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Friday, 28 August 2015

एक साथ मिलकर पूजा करें


आज ९० % घरों में परमेश्वर की पूजा नहीं होती। लोग अपने जीवन में काम को ही महत्व देते हैं। वे बिना पूजा किये ही घर से बहार निकलते हैं और इसका परिणाम यह होता है कि कार्य स्थल पर उन्हें दिनभर बिलकुल अराजकता का सामना करना पड़ता है। उनकी मानसिक शांति भंग  हो जाती है। उनके काम करने की इच्छा मर जाती है लेकिन घर गृहस्ती के बोझ तले दबा होने के कारण ऐसी विषम परिस्थितियों में भी उन्हें काम करना ही पड़ता है।  जब वे थक कर चुड़ हुए घर में आते हैं तो घर के सदस्यों के बीच में करवाहट सुनने को मिलती है। घर के बच्चे माँ - बाप का कहना नहीं मानते जिसकारण नहीं चाहने के वावजूद भी बच्चों का जीवन बर्वाद होते हुए उन्हें  देखना पड़ता है। अंत में उन्हें समझ में नहीं  आता है कि क्या करें ? उनकी समस्याओं को बढ़ाने वाले लोगों  की कमी नहीं है परन्तु उनकी समस्याओं को  सुलझाने वाला आज  कोई नहीं है । ऐसी विषम परिस्थति में उनकी चिन्तायें बढ़ जाती है और उनका मानसिक तनाव उनके शरीर में अनेक प्रकार की विमारिओं को जन्म देती है।  जैसे - ब्लड्प्रेसर, हार्टडिजिज, डिप्रेशन, शुगर, अनिद्रा, अनेक प्रकार के दुर्व्यसन ये तो आम साधारण बातें हैं जिनका वे  शिकार होजाते हैं और इसी में वे अपनी जीवन लीला को समाप्त कर देते हैं। इस प्रकार उनका घर - परिवार बिखर कर एक दिन बर्वाद हो जाता है और घर के लोग अपनी किस्मत को दोषी ठहराते हुए जगत में विचरण करने लगते हैं। क्या आप ऐसा ही जीवन चाहते हैं  ?
आज आपके आंशुओं को पोछने के लिए परमेश्वर धरती पर आएं हैं। वे मनुष्य वेश को धारण कर अपने नए नाम "कल्कि नाम " से धरती पर धरती पर आये हैं। वे आपको ढूंढ रहे हैं, वे आपको बुला रहे हैं, वे आप को विपत्ती में पड़ा देख स्वयं भी दुखी एवं पड़ेशान हैं। अभी ही वह सही वक्त है कि आप परमेश्वर के आश्रय में आजाइये।परमेश्वर के सिवा आपको दुःख, विपत्ति एवं पड़ेशनी से कोई भी बहार नहीं निकाल सकता। परमेश्वर की शक्ति अनंत है। परमेश्वर का सामर्थ्य अनंत है। परमेश्वर का शरणागत होने से सारे दुःख, रोग और संकट नष्ट हो जाते हैं,  परमेश्वर का नाम ले  लेने से जीवन में आये संकट रूपी भयानक जलन खत्म हो जाती है और गर्मी पर छाया बन कर जीव को शीतलता प्रदान करती है।
परमेश्वर का  नाम मनुष्यों के लिए व्यवहारिक सामग्री है। उसकी आवश्यकता  मनुष्यों को हर वक्त होती है। जब परमेश्वर के नाम की वर्षा होती है तो वह जीवन में उपस्थित संकट व् समस्या रूपी जलन को बुझा देती है। 
आज आपसे परमेश्वर यह कहते हैं कि मैं शान्ति का धनी हूँ। मैं शान्ति का राजा हूँ। मेरे पास शांति रूपी धन है। जब तुम मेरे पास आओगे तब तुम शान्ति से भर जाओगे। तुम्हारा परिवार शांति से भर जाएगा। जब मैं तुम्हारे घर आऊंगा तब तुम अपने आस - पास शान्ति अनुभव करोगे। जब तुम यह कहोगे कि मुझको शुद्ध कर दो ताकि मेरे घर में शान्ति बहुतायत हो तब मैं तुम्हारे घर में शांति का बरसात करूंगा। लेकिन इसके लिए तुम पहले अपने घर का नीव परमेश्वर के चट्टान पर रखो। तुम परमेश्वर को स्वीकार करो। तुम्हारी पत्नी परमेश्वर को स्वीकार करे। तुम्हारा बेटा परमेश्वर को स्वीकार करे।  तुम्हारी बेटी परमेश्वर को स्वीकार करे। मैं जनता हूँ कि तुम्हारा दुःख - दर्द सुनने वाला मेरे सिवा  कोई नहीं है। मैं जानता हूँ कि वीमारी से तुम्हें छुटकारा दिलाने वाला  मेरे सिवा  कोई नहीं है। मैं तुम्हें अनाथ न छोड़ूंगा।
परमेश्वर ने कहा कि तू हियाव बाँध और दृढ हो, उनसे न डर और न भयभीत हो क्योंकि  तुम्हारे  संग चलने वाला तेरा परमेश्वर है। वह तुमको धोखा न देगा और न रास्ते में छोड़ेगा।  इसलिए तेरा मन कच्चा न हो। ऊँची - ऊँची बातों का सुनना काफी अच्छा लगता है किन्तु कुछ जमीनी बातें हैं जिसको व्यवहारिक जीवन में उतारना आवश्यक है। यह सच है कि परमेश्वर आपके जीवन को बदलना चाहते हैं, यह सच है कि परमेश्वर आपके जीवन के  दुःख को मिटा कर खुशियाँ देना चाहते हैं,   यह सच है कि परमेश्वर आपके उदासी को हटा कर आनन्द देना चाहते हैं। आपने परमेश्वर को नहीं ढूंढा बल्कि परमेश्वर आपको ढूँढ रहे हैं  ताकि आप बहुत फल लाओ।
प्रत्येक चीज के लिए अलग - अलग वक्त  होता है। रोने का अलग वक्त  होता है और हंसने का अलग वक्त  होता है। क्रोध करने अलग वक्त होता है और नाचने का भी अलग वक्त होता  है।  बोेने का अलग वक्त  होता है और काटने का अलग वक्त होता है। ठीक उसी प्रकार भगवन से प्रार्थना करने का अलग वक्त होता है और भगवन को देने का भी अलग वक्त होता है। इसलिए प्रत्येक मनुष्य को ईश्वर की प्रार्थना उस वक्त  करनी  चाहिए जिस समय ईश्वर आपकी प्राथर्ना को सुन सकें। क्या आप जानते हैं कि  ईश्वर आपकी प्राथर्ना को किस समय सुनेंगे ? ब्रह्म मुहूर्त में।  अर्थात प्रातः ४ से ६ वजे के बीच में। 
ईश्वर ने कहा कि यदि तुम ऐसा करोगे  तब मैं तुम्हें मार्गदर्शन करूंगा और उपदेश दूंगा कि तुमको किस दिशा व किस मार्ग में चलना होगा। मैं अपने नजरों से तुमको दिशा निर्देश किया करूंगा।जो प्यासे है उनके लिए मैं जल बरसाऊंगा और जो भूमी सुखी है वहाँ पर मैं जल बरसाऊँगा। मैं लोगों और उनके बच्चों के ऊपर आशीष बरसाऊँगा। ईश्वर  आपके आगे-आगे चलेंगे और आपके जीवन के ऊपर - नीचे कठिन समयों और कठिन रास्तों व परेशानियों को मिटा देंगे। ईश्वर की ओर से आपको व्यवस्था दी जाएगी । ईश्वर वो हर काम आपके लिए करेंगे जो आपके लिए हितकारक और आवश्यक  है। इसलिये आपको  उताबली नहीं करना है और न भागते हुए चलना है। ईश्वर तुम्हारे आगे-आगे अगुवाई करते हुए चलेंगे और तुम्हारे पीछे से भी रक्षा करते हुए चलेंगे। ये  वही ईश्वर हैं जो आपके पापों को माफ करेंगे और वीमारी तथा परेशानियों से छुटकारा दिलाएंगे। यह वही ईश्वर हैं जो आपको अधर्म से बचाएंगे और आपके प्राण को नाश होने से भी बचाएंगे  और आपके सिर  पर करुणा तथा दया का मुकुट बांधेंगे । 
कलियुग में  मनुष्यों के लिए परमेश्वर का  नाम ही छुटकारे का साधन है लेकिन कलियुग में परमेश्वर का नाम क्या है इसको पहले जानिये और फिर उनके नाम का सुमिरण कीजिये तब आपके उपर परमेश्वर के आशीष का  वरसात होगा।
लोग क्या करते हैं ?  वे पहले अपने मन में विचार करते हैं कि किस देवी - देवता की पूजा की जाय ? वे उस देवी - देवता को चुनते हैं  जो जल्दी से प्रसन्न हो जायँ और तुरत उनकी हर इच्छा को पूरा कर  दें। इस प्रकार वे परमेश्वर को छोड़ कर ३३ करोड़ देवी - देवता की पूजा करने लग जाते हैं अर्थात केवल  उन्हीं  देवी - देवताओं को प्रसन्न करने में लिपट  जाते हैं जो पूजा लेने के  अधिकारी नहीं  हैं । ये देवी - देवता अर्ध देवता हैं । इनके पास अपनी  कोई शक्ति नहीं है। जब लोग इन देवी - देवताओं की  पूजा करते हैं तो  वह पूजा उन देवी - देवताओं के पास नहीं जाते बल्कि वह पूजा सही मने में उन्हीं परमेश्वर के पास जाते हैं जिसको  आपने पूजा करना  छोड़ दिया और वह परमेश्वर उनकी पूजा को उसी देवता के प्रति स्थिर करते हैं और साधक को उनके  कर्मों के अनुसार उन देवी - देवताओं के द्वारा उनको फल देते हैं। लेकिन उन देवी - देवताओं के द्वारा उनको जो फल मिलता है वह फल टेमप्रोरी  है और एक दिन वह  नाश हो जायेगा ।  उनका वह पूजा अविधि पूर्वक है। (गीता ७:२१-२३; ९ :२३) मैं आपसे पाँच  प्रश्न करना चाहता हूँ :-
(१) आप जिन  देवी - देवताओं की  पूजा करते हैं वह पूजा उन देवी - देवताओं के पास नहीं जाते बल्कि वह पूजा भी उसी परमेश्वर के ही पास जाते हैं जिनको आपने पूजा करना छोड़ दिया है। (गीता ९ :२४ )जब आपकी पूजा देवी - देवताओं के पास जाते ही नहीं हैं तो उस  पूजा  को करने से क्या लाभ ?
(२) आप जिन देवी - देवताओं की  पूजा करते हैं उनके पास अपनी कोई शक्ति ही नहीं है। गीता ७:२२ में ईश्वर ने कहा कि "जो पुरुष श्रद्धा से युक्त हो कर जिस देवता की पूजन करता है वह उस देवता से मेरे ही द्वारा विधान किये हुए इच्छित भोगों को प्राप्त करता है। " तो उस देवी - देवताओं की  पूजा करने से क्या लाभ होगा? 
(३) आप जिन देवी - देवताओं की  पूजा करते हैं तो उस पूजा का फल उस देवी - देवताओं से नहीं मिलते हैं बल्कि वह फल भी उसी परमेश्वर से मिलते हैं जिसको आपने छोड़ दिया है तो उन देवी - देवताओं की पूजा करने से क्या लाभ होगा ?
(४) जब देवी - देवताओं के माध्यम से मिला हुआ फल एक दिन नष्ट हो जाएगा तो उस फल को हासिल करने  से क्या लाभ ? (गीता ७:२३)
(५) जब आपका पूजा ही अविधि पूर्वक है तो आपको उस पूजा से क्या फल मिल जाएगा ?
पहले तो आप अपना रहन - सहन (Life Style) बदलिए। आप ब्रह्म मुहूर्त में उठिए। पहले आप अपने नौकरी या काम को  महत्व मत दीजिये। पहले आप और आपके सारे परिवार के सारे सदस्य एक साथ बैठ कर एक साथ मिलकर परमेश्वर की प्रार्थना करना शुरू कीजिये। क्योंकि  जब एक से ज्यादा व्यक्ति एक साथ बैठ कर परमेश्वर की पूजा करते हैं तो परमेश्वर उनके बीच में विराजमान होते हैं। दूसरा,  इस संसार में परमेश्वर  आपके साथ खड़े हैं जो हर विपत्ति में वो आपको सुरक्षा प्रदान करेंगे। ये  राजाओं के राजा हैं! देवों के देव हैं! आप केवल इसी  परमेश्वर की पूजा अनन्य प्रेम एवं अनन्य भक्ति के साथ  कीजिये तो ये  परमेश्वर  आपको महिमा का मुकुट देंगे और आपके प्रत्येक  इच्छाओं को पूरा करेंगे। इसलिए आप केवल भगवान नारायण श्री कल्कि जी के पर्सोनल नाम की खोज कीजिये  और केवल एक मात्र उसी  नाम का जप एवं संकीर्तन कीजिए   तो आपकी हर मुरादें पूरी होजाएगी और आप हर संकट से बचे रहेंगे ।   
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